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यूपी: आरबीएस कॉलेज की किताबें होंगी ऑनलाइन, नवंबर से शुरू होगा डिजिटल रिकॉर्ड, 40-50 लाख रुपये होंगे खर्च
Sat, 26 Sep 2026 12:59 PM IST
Dhirendra Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sat, 26 Sep 2026 12:59 PM IST
सार
आरबीएस डिग्री कॉलेज की अकादमिक लाइब्रेरी में मौजूद करीब 1.11 लाख किताबों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। नवंबर से शुरू होने वाले इस काम पर करीब 40 से 50 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिससे किताबों को खोजना आसान होगा।
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आरबीएस डिग्री कॉलेज की अकादमिक लाइब्रेरी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आरबीएस डिग्री कॉलेज की अकादमिक लाइब्रेरी अब डिजिटल होने जा रही है। लाइब्रेरी में मौजूद करीब 1.11 लाख किताबों का डिजिटलाइजेशन किया जाएगा। इसके लिए नवंबर से काम शुरू करने की तैयारी है। पूरी प्रक्रिया पर करीब 40 से 50 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।
पुस्तकों के डिजिटल रिकॉर्ड में किताब का नाम, लेखक, विषय और उपलब्धता समेत जरूरी जानकारी दर्ज की जाएगी। इससे विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधार्थियों को लाइब्रेरी में किसी किताब को तलाशने में आसानी होगी। बड़ी संख्या में मौजूद पुस्तकों के कारण अभी किसी पुस्तक को खोजने में समय लगता है लेकिन डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने के बाद यह प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
लाइब्रेरी इंचार्ज योगेंद्र राठौर ने बताया कि इससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को किताबें तलाशने में सुविधा मिलेगी। लाइब्रेरी में लंबे समय से मौजूद पुरानी और महत्वपूर्ण पुस्तकों का रिकॉर्ड भी डिजिटल रूप में सुरक्षित हो जाएगा। इससे कॉलेज के पुस्तक संग्रह की जानकारी व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध रहेगी और जरूरत के समय किसी पुस्तक की उपलब्धता का पता लगाया जा सकेगा।
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पुस्तकों के डिजिटल रिकॉर्ड में किताब का नाम, लेखक, विषय और उपलब्धता समेत जरूरी जानकारी दर्ज की जाएगी। इससे विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधार्थियों को लाइब्रेरी में किसी किताब को तलाशने में आसानी होगी। बड़ी संख्या में मौजूद पुस्तकों के कारण अभी किसी पुस्तक को खोजने में समय लगता है लेकिन डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने के बाद यह प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
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लाइब्रेरी इंचार्ज योगेंद्र राठौर ने बताया कि इससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को किताबें तलाशने में सुविधा मिलेगी। लाइब्रेरी में लंबे समय से मौजूद पुरानी और महत्वपूर्ण पुस्तकों का रिकॉर्ड भी डिजिटल रूप में सुरक्षित हो जाएगा। इससे कॉलेज के पुस्तक संग्रह की जानकारी व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध रहेगी और जरूरत के समय किसी पुस्तक की उपलब्धता का पता लगाया जा सकेगा।
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