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इस चर्चित IPS से विवाद के बाद सुर्खियां बने रामवीर, मुलायम सरकार में बोलती थी तूती
दीपक जैन, अमर उजाला फिरोजाबाद
Updated Sat, 06 Jan 2018 10:09 AM IST
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रामवीर यादव, अमिताभ ठाकुर
- फोटो : अमर उजाला
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फिरोजाबाद में जसराना के पूर्व विधायक रामवीर यादव की समाजवादी पार्टी की सरकार में तूती बोलती थी। फिरोजाबाद के तत्कालीन एसपी अमिताभ ठाकुर के ऊपर उन्होंने हाथ तक छोड़ने तक का आरोप उनके ऊपर लगा। रामवीर विधायक अपनी छवि को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहे हैं।
मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव के काफी करीब होने के कारण सपा में जब अखिलेश यादव का राज आया तो उनका कद पार्टी में काफी कम हो गया।
जसराना विधानसभा से रामवीर यादव चार बार विधायक चुने गए। चारों बार वह समाजवादी पार्टी से जीते थे। सूबे में जब-जब सपा की सरकार रही तो लखनऊ तक अपनी धमक के लिए रामवीर जाने जाते रहे हैं। वर्ष 2006 में आईपीएस अमिताभ ठाकुर फिरोजाबाद में पुलिस अधीक्षक के पद पर थे।
28 जुलाई 2006 में एका क्षेत्र में रामवीर यादव का विवाद अमिताभ ठाकुर से हो गया था। सत्ता की हनक में रामवीर यादव ने अमिताभ ठाकुर के साथ अभद्रता कर दी थी। तब आरोप लगा था कि रामवीर यादव ने ठाकुर पर हाथ छोड़ दिया है। मामला काफी तूल पकड़ा था।
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मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव के काफी करीब होने के कारण सपा में जब अखिलेश यादव का राज आया तो उनका कद पार्टी में काफी कम हो गया।
जसराना विधानसभा से रामवीर यादव चार बार विधायक चुने गए। चारों बार वह समाजवादी पार्टी से जीते थे। सूबे में जब-जब सपा की सरकार रही तो लखनऊ तक अपनी धमक के लिए रामवीर जाने जाते रहे हैं। वर्ष 2006 में आईपीएस अमिताभ ठाकुर फिरोजाबाद में पुलिस अधीक्षक के पद पर थे।
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28 जुलाई 2006 में एका क्षेत्र में रामवीर यादव का विवाद अमिताभ ठाकुर से हो गया था। सत्ता की हनक में रामवीर यादव ने अमिताभ ठाकुर के साथ अभद्रता कर दी थी। तब आरोप लगा था कि रामवीर यादव ने ठाकुर पर हाथ छोड़ दिया है। मामला काफी तूल पकड़ा था।
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अखिलेश राज में कम हो गया कद
रामगोपाल यादव
- फोटो : अमर उजाला
अमिताभ ठाकुर ने रामवीर यादव यादव के खिलाफ एका थाने में मामला दर्ज कराया था। तब सपा की ही सरकार थी। बाद में अमिताभ ठाकुर को हटा दिया गया था। 2007 में हुए विधानसभा चुनाव में यह चुनावी मुद्दा बन गया था और लगातार तीन बार जीतने वाले रामवीर यादव निर्दलीय रामप्रकाश यादव से हार गए थे।
सपा में जब अखिलेश यादव का राज शुरू हुआ तो जिले की राजनीति में रामवीर यादव का कद कम हो गया। लोकसभा चुनाव में यहां से सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव सांसद बने तो रामगोपाल यादव का सीधा दखल जिले में हो गया।
चूंकि रामवीर शिवपाल ग्रुप के करीब थे लिहाजा प्रोफेसर रामगोपाल यादव के दरबार में रामवीर यादव की सपा की सरकार होते भी चल नहीं पा रही थी। यहां तक कि जब विधानसभा चुनाव में उनका टिकट काट कर शिवप्रताप यादव को दिया गया तो रामवीर यादव ने सीधा हमला प्रोफेसर रामगोपाल यादव और सांसद अक्षय यादव पर बोला।
सपा में जब अखिलेश यादव का राज शुरू हुआ तो जिले की राजनीति में रामवीर यादव का कद कम हो गया। लोकसभा चुनाव में यहां से सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव सांसद बने तो रामगोपाल यादव का सीधा दखल जिले में हो गया।
चूंकि रामवीर शिवपाल ग्रुप के करीब थे लिहाजा प्रोफेसर रामगोपाल यादव के दरबार में रामवीर यादव की सपा की सरकार होते भी चल नहीं पा रही थी। यहां तक कि जब विधानसभा चुनाव में उनका टिकट काट कर शिवप्रताप यादव को दिया गया तो रामवीर यादव ने सीधा हमला प्रोफेसर रामगोपाल यादव और सांसद अक्षय यादव पर बोला।
भाजपा के साथ आने पर भी सुर्खियों में रहे
दोनों पर गंभीर आरोप लगाए थे। रामवीर यादव 2017 का विधानसभा चुनाव सपा से बगावत कर लडे और खुद न जीत कर सपा को जसराना से हरा कर अपनी अनदेखी का बदला लेने में कामयाब हो गए।
जिले में सपा में रहते हुए पार्टी से ही एक विधायक से उनकी हमेशा ठनी रही इस कारण भी वह सुर्खियों में रहे हैं। सूबे में भाजपा की सरकार बनने पर सपा के जिला पंचायत अध्यक्ष विजय प्रताप यादव छोटू के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव में खुल कर भाजपा के साथ आने पर भी रामवीर सुर्खियों में रहे।
जिले में सपा में रहते हुए पार्टी से ही एक विधायक से उनकी हमेशा ठनी रही इस कारण भी वह सुर्खियों में रहे हैं। सूबे में भाजपा की सरकार बनने पर सपा के जिला पंचायत अध्यक्ष विजय प्रताप यादव छोटू के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव में खुल कर भाजपा के साथ आने पर भी रामवीर सुर्खियों में रहे।