रामभद्राचार्य बोले: हिंदू लड़कियों को आगरा लाकर किया जाता था अत्याचार, अब यह स्वाभिमान की धरती बनेगी
आगरा में रामकथा के छठें दिन जगदगुरू तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य जी ने माता सीता की महिमा और श्रीराम के साथ विवाह का प्रसंग सुनाया। इस दौरान उन्होंने कहा कि हिंदू लड़कियों को आगरा लाकर उन पर अत्याचार किया जाता था। अब यह स्वाभिमान की धरती बनेगी।
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उत्तर प्रदेश के आगरा में रामकथा के छठवें दिन शनिवार को कोठी मीना बाजार मैदान पूरी तरह सीतामय नजर आया। जगदगुरू तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के मुख से माता सीता की महिमा और श्रीराम के साथ विवाह का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु निहाल हो गए। उन्होंने कहा कि बेटी कभी भी अपने मां-बाप का अपमान नहीं करती। हालांकि यह बात बेटों के बारे में नहीं कही जा सकती। बेटी के रूप में सीता इसका उत्तम व अनुपम उदाहरण हैं।
स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि संत जहां जाते हैं, वहां सकारात्मक बदलाव लाते हैं। लोक कल्याण का संदेश देते हैं। कोठी मीना बाजार मैदान अब सीता बाजार के नाम से जाना जाए, इसकी अपील वो कर चुके हैं। आज मैं सीता की कथा सुनाता हूं। सीता हिंदुओं के सम्मान व गर्व का प्रतीक हैं। जो मानवों को एक प्रेम बंधन में बांध लेती हैं, उनका नाम है सीता। जो सबको जन्म देती हैं वही हैं सीता। जो सभी की पालनकारी हैं उनका नाम है सीता। जो सबका दुख दूर करती हैं उनका नाम है सीता। जो सबको अच्छा काम करने की प्रेरणा देती हैं उनका नाम है सीता। जो भक्त के बुलाने पर श्रीराम के साथ चली आती हैं वह हैं सीता।
अगली बार आऊं तो सीता बाजार कहलाए
स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि मैंने तो इस मैदान का नाम सीता बाजार रख दिया। मैं चाहता हूं कि मैं जब अगली बार यहां आऊं तो यह यह आधिकारिक रूप में भी सीता बाजार मैदान कहलाए। दोनों सांसदों (प्रो. रामशंकर कठेरिया व प्रो. एसपी सिंह बघेल का उल्लेख करते हुए) से कह रहा हूं। इनमें एक तो देश के कानून मंत्री भी हैं।
आगरा बनेगा हिंदू स्वाभिमान की धरती
स्वामी ने कहा कि आगरा हिंदुओं के स्वाभिमान की धरती बनेगा। पहले यह उनके अपमान की धरती थी। यहां हिंदू लड़कियों को लाकर उन पर अत्याचार किए जाते थे।
मेरे साथ सवा सौ करोड़ हिंदू
स्वामी ने कहा कि मेरे बयानों को लेकर मीडियाबाजी हो रही है। मैंने किसी का अपमान करने के लिए कुछ नहीं कहा था। अपनी बात कहने के लिए संदर्भवश पूर्व के बयानों का उल्लेख किया था। मैं किसी से डरता नहीं हूं। अकेला नहीं हूं, भारत में रहने वाले 100 करोड़ और विदेशों में रहने वाले 25 करोड़ हिंदू मेरे साथ हैं। मैंने कोई गलत बयान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि मैं पैसे के लिए कथा नहीं करता। जब तक हूं तब तक वैदिक संस्कृति व वैदिक हिंदू धर्म का प्रचार करता रहूंगा।
क्रोध आता है तो धूमकेतु कह देता हूं
मुझे गाली से बहुत चिढ़ है। मुझे क्रोध आता है तो धूमकेतु कह देता हूं। जो मनुष्य गाली देता है उसे कभी आध्यात्मिक विद्या मिल ही नहीं सकती। ऐसा कभी मत करो जिससे आपके माता पिता रोएं, अगर आपके माता पिता प्रसन्न रहेंगे तो आपको जीवन में कभी कोई कष्ट नहीं हो सकता है।
तब किसी ने नहीं करवाई थी रिपोर्ट
स्वामी ने कहा कि वर्ष 1990 में जब अयोध्या में निहत्थे हिंदुओं पर गोली चली थी। सरयू हिंदुओं के खून से लाल हो गई थी, तत्कालीन सरकार कहती थी कि मात्र 16 हिंदू मरे हैं जबकि यह संख्या सैकड़ों में थी। यह नीचता व बर्बरता की सीमा थी, तब किसी ने एफआईआर नहीं कराई थी।
इन कार्यक्रमों में लिया हिस्सा
स्वामी रामभद्राचार्य ने शनिवार को पूर्व हिंदुस्तान कॉलेज के नजदीक पीपी टाउन स्थित लुई ब्रेल दृष्टिबाधित कॉलेज में केएल गर्ग की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। कीठम स्थित सूरकुटी दृष्टिबाधित विद्यालय में विद्यार्थियों से भेंटकर उनका उत्साह बढ़ाया। तत्पश्चात वे वृंदावन के लिए अपने उत्तराधिकारी रामचंद्र और शिष्यों के साथ प्रस्थान कर गए।
यह लोग यजमान रहे
मुख्य यजमान धनकुमार जैन, शालिनी जैन रहे। दैनिक यजमान में हरि नारायण चतुर्वेदी, शकुन बंसल, राजेश गुप्ता, संजय गुप्ता, राजीव जयराम, अर्पित मित्तल, अमित गुप्ता, मनीष बंसल और नवल शर्मा रहे। शनिवार की प्रसादी वितरण की व्यवस्था मोहनलाल की रही।