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राज्यसभा टिकट से रामप्रताप की सियासी वापसी: 2022 में कटा था विधानसभा टिकट, अब मंडल से संसद तक पहुंचा सफर
Tue, 06 Oct 2026 09:27 AM IST
Dhirendra Singh
प्रखर दीक्षित, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
प्रखर दीक्षित, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 06 Oct 2026 09:27 AM IST
सार
भाजपा ने आगरा के पूर्व विधायक और प्रदेश महामंत्री रामप्रताप सिंह चौहान को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। 1991 में भाजयुमो मंडल अध्यक्ष से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर विधायक और प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी से होते हुए अब राज्यसभा तक पहुंच गया है।
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रामप्रताप सिंह चौहान
विस्तार
भारतीय जनता पार्टी के एत्मादपुर क्षेत्र से पूर्व विधायक और प्रदेश महामंत्री रामप्रताप सिंह चौहान को अरुण सिंह की जगह राज्यसभा उम्मीदवार बनाया गया है। मंडल से शुरू हुआ उनका सफर अब देश के उच्च सदन तक पहुंच गया है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सिटिंग विधायक होने के बावजूद टिकट कटने और उसके बाद एमएलसी की सीट नहीं मिल पाने के बाद आखिरकार पार्टी ने उन्हें सब्र का फल दिया है। रामप्रताप सिंह चौहान को राज्यसभा का टिकट देकर ब्रज क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों में नए बदलाव के संकेत दिए हैं।
रामप्रताप सिंह चौहान का राजनीतिक सफर एक समर्पित और जमीनी कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुआ था। उन्होंने 1991 में भाजयुमो आगरा के मंडल अध्यक्ष के रूप में शुरुआत की। इसके बाद भाजपा में महानगर उपाध्यक्ष से लेकर प्रदेश महामंत्री के पद पर अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2017 में वह एत्मादपुर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी में शामिल हुए डॉ. धर्मपाल सिंह को प्रत्याशी बनाया गया, जिसके चलते रामप्रताप का टिकट कट गया। इसके बाद वे कई बार एमएलसी बनने की दौड़ में भी रहे लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद उन्होंने संगठन के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी। वर्ष 2023 में उन्हें प्रदेश महामंत्री बनाया गया और जून 2026 में घोषित नई प्रदेश टीम में पुनः प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया।
आगरा की पांच सीटों पर है क्षत्रिय वोटरों का सीधा दखल
जिले की पांच विधानसभा सीटें हैं, जहां क्षत्रियों का खासा दखल रहा है। एत्मादपुर में ठाकुरों की बाइसी की चर्चा हाल ही में यूजीसी प्रदर्शन के दौरान हुई थी। इसके अलावा बाह विधानसभा क्षेत्र में क्षत्रिय वोटरों के बल पर लंबे समय से भदावर राज परिवार काबिज है। वहीं, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी और खेरागढ़ में भी क्षत्रिय वोटर निर्णायक भूमिका में रहते हैं।
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मौजूदा विधायक से अदावत
मौजूदा विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह से रामप्रताप की राजनीतिक अदावत जगजाहिर है। एक ही पार्टी में होने के बावजूद दोनों एक-दूसरे से दूरी बनाए रखते हैं। हाल ही में महामंत्री बनने के बाद आयोजित स्वागत समारोह में रामप्रताप ने राजनीतिक संरक्षण प्राप्त एक प्रशासनिक अधिकारी को आड़े हाथों लेते हुए वक्त आने पर सबक सिखाने की बात कही थी। उस समय कहा गया कि बयान डॉ. धर्मपाल को लेकर था। हालांकि दोनों कभी एक-दूसरे का नाम लेकर खुलकर बोलने से बचते रहे हैं।
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रामप्रताप सिंह चौहान का राजनीतिक सफर एक समर्पित और जमीनी कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुआ था। उन्होंने 1991 में भाजयुमो आगरा के मंडल अध्यक्ष के रूप में शुरुआत की। इसके बाद भाजपा में महानगर उपाध्यक्ष से लेकर प्रदेश महामंत्री के पद पर अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2017 में वह एत्मादपुर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी में शामिल हुए डॉ. धर्मपाल सिंह को प्रत्याशी बनाया गया, जिसके चलते रामप्रताप का टिकट कट गया। इसके बाद वे कई बार एमएलसी बनने की दौड़ में भी रहे लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद उन्होंने संगठन के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी। वर्ष 2023 में उन्हें प्रदेश महामंत्री बनाया गया और जून 2026 में घोषित नई प्रदेश टीम में पुनः प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया।
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आगरा की पांच सीटों पर है क्षत्रिय वोटरों का सीधा दखल
जिले की पांच विधानसभा सीटें हैं, जहां क्षत्रियों का खासा दखल रहा है। एत्मादपुर में ठाकुरों की बाइसी की चर्चा हाल ही में यूजीसी प्रदर्शन के दौरान हुई थी। इसके अलावा बाह विधानसभा क्षेत्र में क्षत्रिय वोटरों के बल पर लंबे समय से भदावर राज परिवार काबिज है। वहीं, फतेहाबाद, फतेहपुर सीकरी और खेरागढ़ में भी क्षत्रिय वोटर निर्णायक भूमिका में रहते हैं।
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मौजूदा विधायक से अदावत
मौजूदा विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह से रामप्रताप की राजनीतिक अदावत जगजाहिर है। एक ही पार्टी में होने के बावजूद दोनों एक-दूसरे से दूरी बनाए रखते हैं। हाल ही में महामंत्री बनने के बाद आयोजित स्वागत समारोह में रामप्रताप ने राजनीतिक संरक्षण प्राप्त एक प्रशासनिक अधिकारी को आड़े हाथों लेते हुए वक्त आने पर सबक सिखाने की बात कही थी। उस समय कहा गया कि बयान डॉ. धर्मपाल को लेकर था। हालांकि दोनों कभी एक-दूसरे का नाम लेकर खुलकर बोलने से बचते रहे हैं।