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मथुरा: वृंदावन के रंगनाथ मंदिर में मनाया गया रामनवमी उत्सव, भगवान राघवेंद्र सरकार की हुई भव्य आरती

Tue, 10 May 2022 03:04 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Tue, 10 May 2022 03:04 PM IST
सार

वृंदावन में स्थित दक्षिण भारतीय शैली के रंगनाथ मंदिर में मंगलवार को भगवान राम का जन्म उत्सव मनाया गया। वैदिक परंपरा और मंत्रोच्चारण के मध्य भगवान राम, माता जानकी और लक्ष्मण जी का अभिषेक किया गया। 3 दिवसीय उत्सव के अंतिम दिन भगवान राघवेंद्र सरकार की भव्य आरती की गई।

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Ram Navami festival celebrated in Ranganath temple vrindavan mathura
रंगनाथ मंदिर में मनाया गया राम नवमी उत्सव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वृंदावन के रंगनाथ मंदिर में भगवान राम का जन्म उत्सव श्रद्धा के साथ मनाया गया। मंगलवार सुबह वैदिक परंपरा और मंत्रोच्चारण के मध्य भगवान राम, माता जानकी और लक्ष्मण जी की प्रतिमाओं का अभिषेक हुआ। तीन दिवसीय उत्सव के अंतिम दिन भगवान राघवेंद्र सरकार की भव्य आरती की गई।
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रंगनाथ मंदिर में राम नवमी उत्सव की धूम रही। भगवान राम के जन्म उत्सव पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। सुबह श्री रंगनाथ मंदिर में वैदिक परंपरा के अनुसार मंदिर के पुजारियों ने भगवान राम, माता जानकी और लक्ष्मण की प्रतिमाओं का मंत्रोचारण के मध्य अभिषेक किया। 
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आठ कलश में लाए गए शुद्ध जल में विभिन्न पवित्र नदियों के जल का मिश्रण कर आह्वान किया गया। इसके बाद भगवान राम का अभिषेक शुरू हुआ। पहले पवित्र शुद्ध जल से अभिषेक हुआ इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर, शहद से पंचामृत अभिषेक किया गया। शाम के समय हनुमान जी पर विराजमान होकर भगवान राघवेंद्र सरकार निकले। 
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रविवार को शुरू हुआ था उत्सव 

इससे पूर्व तीन दिवसीय रामनवमी उत्सव का प्रारंभ रविवार को हुआ। यहां सुबह उत्सव प्रतिमाओं का अभिषेक हुआ शाम को सूर्य वाहन पर विराजमान होकर भगवान राम माता जानकी और लक्ष्मण जी निकले। इसी तरह सोमवार को स्वर्ण हाथी पर विराजमान होकर भगवान की सवारी निकाली गई। 

रंगनाथ मंदिर की सीईओ अनघा श्री निवासन ने बताया कि उत्सव के दौरान प्रतिदिन उत्सव प्रतिमाओं का अभिषेक होता है लेकिन राम नवमी के दिन उत्सव प्रतिमा और मूल प्रतिमा दोनों का एक साथ अभिषेक लोक दर्शन के लिये किया जाता है।

नक्षत्र और तिथि के एक साथ होने के कारण मनाई गई रामनवमी 

रामनवमी का पर्व वैसे तो एक माह पूर्व ही मनाया गया लेकिन दक्षिण भारतीय शैली के रंगनाथ मंदिर में मंगलवार को इस पर्व को मनाया गया। मंदिर के सुपरवाइजर लखन लाल पाठक ने बताया कि उत्तर भारत में तिथि के हिसाब से उत्सव मनाए जाते हैं लेकिन दक्षिण भारत में जन्म नक्षत्र और तिथि एक साथ हो तभी उत्सव मनाने की परंपरा है। ऐसा तीन चार वर्ष में एक बार होता है जब उत्सव उत्तर और दक्षिण में अलग-अलग मनाया जाता है।

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