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राममंदिर निर्माण में चमकेगा यहां के कारीगरों का हुनर, पत्थरों पर की है खूबसूरत नक्काशी

Tue, 12 Nov 2019 10:17 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Tue, 12 Nov 2019 10:17 AM IST
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Ram Mandir Nirman Use Fatehpursikari Artisans Carved Stone in Construction
फतेहपुरसीकरी के कारीगरों के तराशे पत्थर - फोटो : अमर उजाला
अयोध्या में बनने जा रहे राम मंदिर में सीकरी के 12 कारीगरों का हुनर भी चमकेगा। इन कारीगरों ने मंदिर के लिए 90 के दशक में ही तैयार कर लिए गए खंभों के पत्थरों को तराश कर खूबसूरत नक्काशी की है।
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद ये लोग खुशी से फूले नहीं समा रहे। इनका कहना है कि यह प्रभु श्रीराम की ही कृपा है जो वह उनके मंदिर में कुछ काम आ सके। इन लोगों को पूरी उम्मीद है कि इनके तराशे गए पत्थरों का इस्तेमाल राम मंदिर में जरूर किया जाएगा।
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मई, 1992 में सीकरी के गांव दूरा से रामप्रसाद, बच्चू सिंह, हाकिम सिंह, ग्राम रामनगर के संतोष कुमार, ग्राम जाजऊ के शंकरलाल, ग्राम बरौली के रमेश मिस्त्री आदि कारीगर गए थे। इन्हें विहिप के नेताओं ने वहां जाने के लिए कहा था। इन्होंने वहां करीब 3 वर्ष रहकर मंदिर के लिए विशाल खंभों, जालियों और फर्श के लिए पत्थर तराशे थे। उन पर सुंदर कलाकृतियां उकेरी थीं।
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Ram Mandir Nirman Use Fatehpursikari Artisans Carved Stone in Construction
पत्थर कारीगर - फोटो : अमर उजाला
कारीगर विजय सिंह ने भी मंदिर निर्माण के लिए पत्थरों को तराशा। वह भी इसे अपना सौभाग्य मानते हैं। रामप्रसाद, बच्चू सिंह, हाकिम सिंह, शंकरलाल समेत अन्य कारीगर इस समय गुजरात के अंबाजी, अहमदाबाद में मंदिर निर्माण के कार्य में गए हुए हैं। इन सभी कारीगरों के परिवार के लोग भी अपने आप को धन्य मानते हैं कि उनके परिजनों के हाथों तराशे गए पत्थर अयोध्या पति के मंदिर में लगेंगे।

संतोष बोले, होइहि सोई, जो राम रचि राखा
इकराम नगर निवासी कारीगर संतोष कुमार ने बताया कि छह दिसंबर, 1992 की घटना उनके सामने ही हुई थी। उस दिन बहुत डर लगा था। इतने दिन तक मामला खिंचता रहा, तो मायूसी थी। अब फैसला आ गया है तो इतनी खुशी है कि बयां करने के लिए शब्द नहीं मिल रहे। संतोष कहते हैं कि यह सब राम की ही लीला है। तुलसीदास ने सही लिखा है कि होइहि सोई, जो राम रचि राखा...।

बड़े पैमाने पर होता है पत्थर तराशी का काम
फतेहपुर सीकरी में पत्थर तराशी का काम बड़े पैमाने पर होता है। यह मुगलों के शासन से भी पहले से चला आ रहा है। पास में ही राजस्थान का भरतपुर है। वहां के पत्थर राम मंदिर में काम आएंगे।

 
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