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पराली जलाने में 18 पर मामला दर्ज
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24एमएनपी-17-ग्राम पंचायत हलपुरा में एक खेत में चलती पराली
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। पराली से पर्यावरण में बढ़े प्रदूषण को लेकर काफी कार्य योजना बनी। अधिकारियों ने निरीक्षण कर ग्रामीणों से न जलाने की अपील की। उन पर निगरानी रखने के लिए लेखपालों को जिम्मेदारी दी। लेकिन पराली जलाने से रोकने में प्रशासन नाकाम रहा। किसान रात में पराली जलाने लगे थे। कृषि योग्य भूमि में से करीब 1.40 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती की जाती है। राजस्व विभाग ने सिर्फ 18 किसानों के पराली जलाने की रिपोर्ट जिला कृषि अधिकारी को भेजी है।
करीब दो लाख किसान खेती करते हैं। धान की कटाई शुरू हुई तो पराली जलाने का सिलसिला भी शुरू हो गया। बढ़ते प्रदूषण के चलते पराली जलान वाले किसानों पर कार्रवाई के आदेश भी दिए लेकिन मैनपुरी में जिम्मेदारों ने पर्यावरण को बचाने के लिए कोई पहल नहीं की। राजस्व विभाग ने सिर्फ 18 किसानों के पराली जलाने की रिपोर्ट जिला कृषि अधिकारी को भेजी है। इस रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने किसानों पर एफआईआर भी दर्ज कराई। लेकिन क्या जिले भर में 18 लोगों ने ही पराली जलाई, इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है।
मैनपुरी की अगर बात करें तो यहां 552 ग्राम पंचायतें और 812 राजस्व गांव हैं। लेखपालों पर जिम्मेदारी थी कि वो अपने-अपने क्षेत्र में निरीक्षण कर पराली जलाने वालों की रिपोर्ट संकलित करें। लेकिन प्रत्येक लेखपाल एक किसान की भी रिपोर्ट नहीं दे सका। इससे साफ जाहिर है कि प्रशासन पराली जलाने को रोकने लिए कितना गंभीर है।
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सड़क पर अगर निकलें तो हर दूसरे खेत में पराली का धुआं उठता दिखाई दे रहा है। इतना ही नहीं अगर किसान रात में भी पराली जलाते हैं तो सुबह खेतों में उसकी राख फैली नजर आती है। लेकिन जिम्मेदारों को शायद ये नजर नहीं आता है। क्योंकि अगर उन्हें नजर आता तो उन्होंने जरूर कार्रवाई की होती।
धान की कटाई पहले हाथ से होती थी। धान झाड़ने के बाद बचने वाली पराली का उपयोग पशुओं के चारे व अन्य कार्यों में होता था। वर्तमान में कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई होने के चलते पराली के छोटे-छोटे टुकड़े पूरे खेत में बिखर जाते हैं, ऐसे में किसानों के सामने भी समस्या होती है कि वे इसे कैसे एकत्रित करें।
शासन ने अब कंबाइन हार्वेस्टर पर शिकंजा कसने के लिए आदेश जारी कर दिया है। उप्र सरकार के मुख्य सचिव राहुल भट्नागर ने डीएम को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि किसी भी हालत में बिना स्ट्रॉ रीपर के कंबाइन हार्वेस्टर को चलाने की अनुमति न दी जाए। क्योंकि स्ट्रॉ रीपर से पराली का भूसा बन जाएगा जो मिट्टी में भी आसानी से मिल जाएगा। अगर इसका पालन नहीं होता है तो संचालक पर कार्रवाई की जाएगी। पत्र आने के बाद सभी सीओ और राजस्व विभाग के कर्मचारियों को इसकी जानकारी दी गई है।
जिले में धान पर एक नजर
- 1.40 लाख हेक्टेयर है धान का क्षेत्रफल
- 2 लाख किसान करते हैं धान की खेती
- 552 हैं ग्राम पंचायतें
- 812 हैं राजस्व गांव
- 18 किसानों पर ही हुई एफआईआर
राजस्व विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों ने पराली जलाने की जितनी रिपोर्ट दी, उन सभी में एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है।
डॉ. गगनदीप सिंह, जिला कृषि अधिकारी।
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करीब दो लाख किसान खेती करते हैं। धान की कटाई शुरू हुई तो पराली जलाने का सिलसिला भी शुरू हो गया। बढ़ते प्रदूषण के चलते पराली जलान वाले किसानों पर कार्रवाई के आदेश भी दिए लेकिन मैनपुरी में जिम्मेदारों ने पर्यावरण को बचाने के लिए कोई पहल नहीं की। राजस्व विभाग ने सिर्फ 18 किसानों के पराली जलाने की रिपोर्ट जिला कृषि अधिकारी को भेजी है। इस रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने किसानों पर एफआईआर भी दर्ज कराई। लेकिन क्या जिले भर में 18 लोगों ने ही पराली जलाई, इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है।
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मैनपुरी की अगर बात करें तो यहां 552 ग्राम पंचायतें और 812 राजस्व गांव हैं। लेखपालों पर जिम्मेदारी थी कि वो अपने-अपने क्षेत्र में निरीक्षण कर पराली जलाने वालों की रिपोर्ट संकलित करें। लेकिन प्रत्येक लेखपाल एक किसान की भी रिपोर्ट नहीं दे सका। इससे साफ जाहिर है कि प्रशासन पराली जलाने को रोकने लिए कितना गंभीर है।
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सड़क पर अगर निकलें तो हर दूसरे खेत में पराली का धुआं उठता दिखाई दे रहा है। इतना ही नहीं अगर किसान रात में भी पराली जलाते हैं तो सुबह खेतों में उसकी राख फैली नजर आती है। लेकिन जिम्मेदारों को शायद ये नजर नहीं आता है। क्योंकि अगर उन्हें नजर आता तो उन्होंने जरूर कार्रवाई की होती।
धान की कटाई पहले हाथ से होती थी। धान झाड़ने के बाद बचने वाली पराली का उपयोग पशुओं के चारे व अन्य कार्यों में होता था। वर्तमान में कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई होने के चलते पराली के छोटे-छोटे टुकड़े पूरे खेत में बिखर जाते हैं, ऐसे में किसानों के सामने भी समस्या होती है कि वे इसे कैसे एकत्रित करें।
शासन ने अब कंबाइन हार्वेस्टर पर शिकंजा कसने के लिए आदेश जारी कर दिया है। उप्र सरकार के मुख्य सचिव राहुल भट्नागर ने डीएम को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि किसी भी हालत में बिना स्ट्रॉ रीपर के कंबाइन हार्वेस्टर को चलाने की अनुमति न दी जाए। क्योंकि स्ट्रॉ रीपर से पराली का भूसा बन जाएगा जो मिट्टी में भी आसानी से मिल जाएगा। अगर इसका पालन नहीं होता है तो संचालक पर कार्रवाई की जाएगी। पत्र आने के बाद सभी सीओ और राजस्व विभाग के कर्मचारियों को इसकी जानकारी दी गई है।
जिले में धान पर एक नजर
- 1.40 लाख हेक्टेयर है धान का क्षेत्रफल
- 2 लाख किसान करते हैं धान की खेती
- 552 हैं ग्राम पंचायतें
- 812 हैं राजस्व गांव
- 18 किसानों पर ही हुई एफआईआर
राजस्व विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों ने पराली जलाने की जितनी रिपोर्ट दी, उन सभी में एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है।
डॉ. गगनदीप सिंह, जिला कृषि अधिकारी।