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अव्यवस्था: तीन साल से वेतन के इंतजार में हैं कल्याण निगम के कर्मचारी
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राज्य कर्मचारी कल्याण निगम का कार्यालय
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के डिपो में तैनात कर्मचारियों को सेवाओं के बाद भी तीन साल से वेतन नहीं मिल सका। वेतन के इंतजार में बीते दिनों एक कर्मचारी की मौत भी हो चुकी है, लेकिन फिर भी शासन और प्रशासन मौन है।
उप्र राज्य कर्मचारी कल्याण निगम द्वारा संचालित कलक्ट्रेट डिपो में प्रबंधक सहित कुल छह कर्मचारी कार्यरत हैं। ये कर्मचारी सालों से नियमित अपनी नौकरी करते आ रहे हैं। बीते तीन सालों से उन्हें वेतन नहीं मिल सका। पहली बार जब उनका वेतन नहीं आया था तो उन्हें लगा कि जल्द ही भुगतान हो जाएगा।
इसी उम्मीद में पहले महीने बीते और फिर सालें, लेकिन तीन साल बाद भी उन्हें वेतन नहीं मिल सका। कई बार इसमें प्रशासन और शासन को अवगत कराया पर वेतन नहीं मिल सका। कोरोना काल में एक माह का वेतन जरूर मिला, लेकिन फिर इसके बाद से अब तक कर्मचारियों को वेतन का ही इंतजार है। वेतन के इंतजार में बीते दिनों 11 जनवरी को एक कर्मचारी धर्मेंद्र मिश्रा की मौत भी हो चुकी है। परिवार के अनुसार हृदयगति रुकने से उनकी मौत हुई है। वे वेतन न मिलने को लेकर काफी तनाव में थे।
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जीएसटी लागू होने के बाद बढ़ी परेशानी
जीएसटी लागू होने से पहले तक राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के कलक्ट्रेट डिपो में सबकुछ ठीक चल रहा था। यहां से प्रतिमाह लगभग 18 लाख रुपये के सामान की बिक्री होती थी। जब जीएसटी लागू हुआ तो दैनिक उपयोगी सामान की कीमतें बाजार के लगभग बराबर हो गईं। ऐसे में डिपो की बिक्री घटकर प्रतिमाह एक से डेढ़ लाख रुपये के बीच आ पहुंची। इससे विभाग घाटे में गया और कर्मचारियों के वेतन का भुगतान रुक गया।
मांगा वीआरएस नहीं मिली अनुमति
वेतन न मिलने से परेशान होकर कलक्ट्रेट डिपो के तीन कर्मचारियों ने वीआरएस (स्वैच्छि सेवानिवृत्ति योजना) के लिए आवेदन किया था। इसमें प्रबंधक दिनेश चौहान के अलावा सत्यराम और मुनेश चंद्र शामिल थे। कोरोना काल के चलते शासन ने वीआरएस के आवेदनों को निरस्त कर दिया।
हाईलाइट्र्स
-06 थे कलक्ट्रेट डिपो में कुल कर्मचारी
-01 कर्मचारी की इसी सप्ताह हुई है मौत
-03 साल से नहीं मिल सका वेतन
-18 लाख रुपये मासिक थी पहले बिक्री
-1.5 लाख रुपये मासिक है अब बिक्री
राज्य कर्मचारी कल्याण निगम में प्रबंधक सहित छह कर्मचारी थे। एक कर्मचारी की 11 जनवरी को मौत हो चुकी है। तीन साल से किसी को वेतन नहीं मिला है। इससे समस्या आ रही है। शासन द्वारा वीआरएस भी मंजूर नहीं किया जा रहा है। ऐसे में परेशानी बढ़ती ही जा रही है।
दिनेश चौहान, प्रबंधक राज्य कर्मचारी कल्याण निगम कलक्ट्रेट डिपो
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उप्र राज्य कर्मचारी कल्याण निगम द्वारा संचालित कलक्ट्रेट डिपो में प्रबंधक सहित कुल छह कर्मचारी कार्यरत हैं। ये कर्मचारी सालों से नियमित अपनी नौकरी करते आ रहे हैं। बीते तीन सालों से उन्हें वेतन नहीं मिल सका। पहली बार जब उनका वेतन नहीं आया था तो उन्हें लगा कि जल्द ही भुगतान हो जाएगा।
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इसी उम्मीद में पहले महीने बीते और फिर सालें, लेकिन तीन साल बाद भी उन्हें वेतन नहीं मिल सका। कई बार इसमें प्रशासन और शासन को अवगत कराया पर वेतन नहीं मिल सका। कोरोना काल में एक माह का वेतन जरूर मिला, लेकिन फिर इसके बाद से अब तक कर्मचारियों को वेतन का ही इंतजार है। वेतन के इंतजार में बीते दिनों 11 जनवरी को एक कर्मचारी धर्मेंद्र मिश्रा की मौत भी हो चुकी है। परिवार के अनुसार हृदयगति रुकने से उनकी मौत हुई है। वे वेतन न मिलने को लेकर काफी तनाव में थे।
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जीएसटी लागू होने के बाद बढ़ी परेशानी
जीएसटी लागू होने से पहले तक राज्य कर्मचारी कल्याण निगम के कलक्ट्रेट डिपो में सबकुछ ठीक चल रहा था। यहां से प्रतिमाह लगभग 18 लाख रुपये के सामान की बिक्री होती थी। जब जीएसटी लागू हुआ तो दैनिक उपयोगी सामान की कीमतें बाजार के लगभग बराबर हो गईं। ऐसे में डिपो की बिक्री घटकर प्रतिमाह एक से डेढ़ लाख रुपये के बीच आ पहुंची। इससे विभाग घाटे में गया और कर्मचारियों के वेतन का भुगतान रुक गया।
मांगा वीआरएस नहीं मिली अनुमति
वेतन न मिलने से परेशान होकर कलक्ट्रेट डिपो के तीन कर्मचारियों ने वीआरएस (स्वैच्छि सेवानिवृत्ति योजना) के लिए आवेदन किया था। इसमें प्रबंधक दिनेश चौहान के अलावा सत्यराम और मुनेश चंद्र शामिल थे। कोरोना काल के चलते शासन ने वीआरएस के आवेदनों को निरस्त कर दिया।
हाईलाइट्र्स
-06 थे कलक्ट्रेट डिपो में कुल कर्मचारी
-01 कर्मचारी की इसी सप्ताह हुई है मौत
-03 साल से नहीं मिल सका वेतन
-18 लाख रुपये मासिक थी पहले बिक्री
-1.5 लाख रुपये मासिक है अब बिक्री
राज्य कर्मचारी कल्याण निगम में प्रबंधक सहित छह कर्मचारी थे। एक कर्मचारी की 11 जनवरी को मौत हो चुकी है। तीन साल से किसी को वेतन नहीं मिला है। इससे समस्या आ रही है। शासन द्वारा वीआरएस भी मंजूर नहीं किया जा रहा है। ऐसे में परेशानी बढ़ती ही जा रही है।
दिनेश चौहान, प्रबंधक राज्य कर्मचारी कल्याण निगम कलक्ट्रेट डिपो