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गो हत्या के पाप से मुक्ति पाने को प्रायश्चित की राह पर राजेंद्र
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कासगंज। गांव के बाहर बाग में झोंपड़ी बनाकर रहता राजेंद्र। संवाद
- फोटो : KASGANJ
सिढ़पुरा (कासगंज)। थाना क्षेत्र के गांव नगला केसरी के एक ग्रामीण ने गो हत्या के पाप से मुक्ति के लिए प्रायश्चित की राह पकड़ी है। वह अपना घर छोड़कर एक बाग में झोंपड़ी में रह रहा है। इसके बाद वह यमुना और गंगा किनारे जाकर ब्राह्मणों के माध्यम से पूजा अर्चना कर पाप से मुक्ति की कामना करेगा। इस कार्य के लिए गांव के लोग भी राजेंद्र का सहयोग करेंगे।
गांव नगला केसरी निवासी राजेंद्र राठौर मंगलवार को अपने खेत पर था। तभी एक सांड़ दो तीन गायों के झुंड के साथ खेत में घुस आया। सांड़ को भगाने के लिए राजेंद्र ने डंडे से प्रहार किया लेकिन वह बच गया। डंडा गाय को लगा और गाय की मौत हो गई। गाय की मौत के बाद राजेंद्र घबरा गया। उसने गौ हत्या की जानकारी गांव के लोगों को दी तो गांव के लोगों ने पुरानी परंपराओं का जिक्र करते हुए राजेंद्र को प्रायश्चित की सलाह दी।
राजेंद्र ने ग्रामीणों की मदद से पहले तो गाय का अंतिम संस्कार किया। अब वह ग्रामीणों की सलाह पर गांव के बाहर एक बाग में झोंपड़ी में प्रायश्चित के लिए रह रहा है। वह यहां पांच दिन तक रहेगा। इसके बाद वह यमुना और गंगा जाकर ब्राह्मणों के माध्यम से पूजा अर्चना कर गौ हत्या के पाप से मुक्ति के लिए प्रार्थना करेगा। ग्रामीण केसरी ने बताया कि राजेंद्र ने गाय को जानबूझकर नहीं मारा है। सांड़ को मारने के चक्कर में गाय को डंडा लगा और उसकी मौत हो गई ।
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गांव के ही प्रेमवीर सिंह ने बताया कि गांव के लोगों ने उसे पाप से मुक्ति यह तरीका सुझाया है। ग्रामीण भी मानते हैं कि राजेंद्र ने जानबूझकर अपराध नहीं किया है। गांव के मदनलाल भूरे ने बताया कि विधिविधान से पूजा अर्चना कर प्रायश्चित पूरा होगा और पाप से मुक्ति मिलेगी। राजेंद्र के प्रायश्चित के लिए ग्रामीण भी उसकी आर्थिक मदद करेंगे। इसके लिए राजेंद्र को गांव और आसपास के गांव के लोगों से आर्थिक मदद लेनी होगी। राजेंद्र के प्रायश्चित का मामला लोगो के बीच कौतूहल बना हुआ है।
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गांव नगला केसरी निवासी राजेंद्र राठौर मंगलवार को अपने खेत पर था। तभी एक सांड़ दो तीन गायों के झुंड के साथ खेत में घुस आया। सांड़ को भगाने के लिए राजेंद्र ने डंडे से प्रहार किया लेकिन वह बच गया। डंडा गाय को लगा और गाय की मौत हो गई। गाय की मौत के बाद राजेंद्र घबरा गया। उसने गौ हत्या की जानकारी गांव के लोगों को दी तो गांव के लोगों ने पुरानी परंपराओं का जिक्र करते हुए राजेंद्र को प्रायश्चित की सलाह दी।
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राजेंद्र ने ग्रामीणों की मदद से पहले तो गाय का अंतिम संस्कार किया। अब वह ग्रामीणों की सलाह पर गांव के बाहर एक बाग में झोंपड़ी में प्रायश्चित के लिए रह रहा है। वह यहां पांच दिन तक रहेगा। इसके बाद वह यमुना और गंगा जाकर ब्राह्मणों के माध्यम से पूजा अर्चना कर गौ हत्या के पाप से मुक्ति के लिए प्रार्थना करेगा। ग्रामीण केसरी ने बताया कि राजेंद्र ने गाय को जानबूझकर नहीं मारा है। सांड़ को मारने के चक्कर में गाय को डंडा लगा और उसकी मौत हो गई ।
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गांव के ही प्रेमवीर सिंह ने बताया कि गांव के लोगों ने उसे पाप से मुक्ति यह तरीका सुझाया है। ग्रामीण भी मानते हैं कि राजेंद्र ने जानबूझकर अपराध नहीं किया है। गांव के मदनलाल भूरे ने बताया कि विधिविधान से पूजा अर्चना कर प्रायश्चित पूरा होगा और पाप से मुक्ति मिलेगी। राजेंद्र के प्रायश्चित के लिए ग्रामीण भी उसकी आर्थिक मदद करेंगे। इसके लिए राजेंद्र को गांव और आसपास के गांव के लोगों से आर्थिक मदद लेनी होगी। राजेंद्र के प्रायश्चित का मामला लोगो के बीच कौतूहल बना हुआ है।