फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Railway Spends Rs 70 Lakh on Rat Control, Yet Rats Continue to Trouble Passengers

यूपी: 70 लाख रुपये कर दिए खर्च, फिर भी ट्रेन में धमाचौकड़ी मचा रहे चूहे; एक यात्री की तो नाक काटी

Sat, 12 Sep 2026 12:18 PM IST
Dhirendra Singh अवधेश भारद्वाज, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
अवधेश भारद्वाज, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Sat, 12 Sep 2026 12:18 PM IST
सार

आगरा रेल मंडल में चूहों के नियंत्रण पर सात साल में करीब 70 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी ट्रेनों और यार्ड में इनका आतंक जारी है। जनवरी से अगस्त तक चूहों से जुड़ी 15 शिकायतें मिलीं, जबकि एसी कोचों में चूहे यात्रियों के सामान और वायरिंग तक को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
 

विज्ञापन
Railway Spends Rs 70 Lakh on Rat Control, Yet Rats Continue to Trouble Passengers
ट्रेन में धमाचौकड़ी मचा रहे चूहे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा रेल मंडल में पटरियों से लेकर एसी कोचों तक चूहों की हुकूमत चल रही है। बीते सात वर्षों में रेलवे ने चूहों और कीटों के सफाए पर लगभग 70 लाख रुपये खर्च कर दिए। इसके बाद भी चूहे रेलवे के बजट के साथ-साथ यात्रियों का सामान चट कर रहे हैं।
विज्ञापन


मंडल में वर्ष 2019 से 30 जून 2023 तक पेस्ट और रोडेंट कंट्रोल पर 41,37,547 रुपये खर्च किए गए। इसके बाद भी चूहों की उछल-कूद कम नहीं हुई। आगरा रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी संजय कुमार गौतम ने बताया कि जुलाई 2023 में 35,46,384 रुपये का नया अनुबंध किया गया था, जो 30 जून 2027 तक प्रभावी है।
विज्ञापन


 

कुल मिलाकर बीते सात साल में अब तक करीब 70 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। जून 2027 तक खर्च का आंकड़ा 76.83 लाख रुपये पहुंच जाएगा फिर भी चूहों के कहर से मुक्ति नहीं मिल पा रही है।
 

बता दें कि कैंट और आगरा फोर्ट यार्ड, वाॅशेबल एप्रन व ट्रैक के किनारे चूहों के बिल बने हैं। चूहे वायरिंग, केबल, सीट, कंबल, चादरों के साथ यात्रियों के सामान को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। जनवरी से अगस्त तक रेलवे के हेल्पलाइन नंबर पर चूहों से संबंधित 15 शिकायतें मिल चुकी हैं। इनमें कोच में चूहे घूमने, यात्रियों को परेशान करने और चूहे के काटने जैसी दुश्वारियां शामिल हैं।



 
विज्ञापन

क्या है पेस्ट और रोडेंट कंट्रोल
रेलवे में पेस्ट कंट्रोल का मतलब कॉकरोच, खटमल, मच्छर, मक्खी और दीमक जैसे कीड़ों को नियंत्रित करना है। वहीं रोडेंट कंट्रोल में चूहों के बिल और आवाजाही वाले स्थान चिह्नित कर ट्रीटमेंट दिया जाता है। ट्रीटमेंट के बाद कोच में स्टिकर लगाकर तारीख और अगली ट्रीटमेंट तारीख दर्ज की जाती है। स्वास्थ्य निरीक्षक और अधिकारी निरीक्षण करते हैं। काम का रिकॉर्ड दर्ज होता है। जनसपंर्क अधिकारी ने बताया कि अभी तक 15 शिकायतें प्राप्त हुई थीं। सभी का निस्तारण कर दिया गया है।


 

केस-1 : फर्स्ट एसी में बुजुर्ग की नाक काटी
22 अगस्त की रात ऊना हिमाचल-इंदौर एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी कोच में चंडीगढ़ से इंदौर जा रहे 80 वर्षीय सेवानिवृत्त सीआईएसएफ असिस्टेंट कमांडेंट एचपी करण की नाक पर रात करीब 10 बजे चूहे ने काट लिया। रात 1:55 बजे आगरा कैंट पर मेडिकल स्टाफ ने प्राथमिक उपचार दिया। बेटे ने रेल मंत्री से एक्स पर शिकायत की थी।


 

केस-2 : एसी कोच में रातभर दौड़ते रहे चूहे
30 जुलाई को होशियारपुर-आगरा एक्सप्रेस के ए-2 कोच में समाजसेवी कृष्ण अरोड़ा ने चूहों की शिकायत की। होशियारपुर से मथुरा तक चूहे सीटों और सामान के बीच दौड़ते रहे। यात्री की सीट बदली गई तब जाकर राहत मिली।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed