Vrindavan: सिंहासन पर विराजे राधारमण लाल, 100 जड़ी बूटियों के मिश्रित दिव्य जल से हुआ महाभिषेक
वृंदावन में वैशाख शुक्ल पूर्णिमा को सप्त देवालयों में से एक ठाकुर राधारमण लाल का प्राकट्य उत्सव मनाया गया। सोमवार सुबह महाभिषेक के बाद बधाई गायन हुआ।
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सेवायत श्रीवत्स गोस्वामी ने बताया कि समाज गायन और मंगल बधाई गीत हुए। महाभिषेक के समय मंदिर परिसर देशी-विदेशी श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा। भक्तजनों ने ठाकुर राधारमणलाल के अद्भुत सौंदर्य और अनंत माधुर्य की सुंदर झांकी का दर्शन कर जीवन धन्य किया। उत्सव में मंदिर के सेवायतों ने भक्तों में पंचामृत प्रसाद वितरण किया।
शृंगार आरती के दर्शनों के लिए मंदिर में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मीठे शरबत की प्याऊ लगाई गई। शाम को भव्य फूल बंगला सजाया गया। इस अवसर पर अनिल गोस्वामी, पद्मनाभ गोस्वामी, पद्मलोचन गोस्वामी, आलोक गोस्वामी, अनुभूति कृष्ण गोस्वामी, सेवायत सलिल गोस्वामी , शरद गोस्वामी आदि उपस्थित थे।
शालिग्राम के श्रीविग्रह के रूप में विराजे
राधारमण मंदिर के सेवायत डॉ. कपिल गोस्वामी ने बताया कि लगभग 480 वर्ष पूर्व बैकुंठ के गोपाल ब्रजभूमि में धरती के गोपाल से मिलने के लिए ठाकुर राधारमण लाल जू के श्रीविग्रह के रूप प्राचीन गोमा टीला से प्रकट हुए थे।
ब्रजभूमि में ठाकुर राधा रमण लाल के दर्शन करने से गोविंद देव , गोपीनाथ, मदन मोहन और चैतन्य महाप्रभु के दर्शन ठाकुर राधा रमण लाल के श्री विग्रह में भक्तों को प्राप्त होते हैं और संपूर्ण विश्व में शालिग्राम के श्रीविग्रह के रूप में केवल ठाकुर राधारमण लाल ही विराजित हैं।