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सुहागनगरी में भी जली थी अगस्त क्रांति की मशाल, हाथों में तिरंगा लेकर निकले थे युवा

Fri, 09 Aug 2019 09:32 AM IST
Abhishek Saxena दीपक जैन, अमर उजाला, फिरोजाबाद
दीपक जैन, अमर उजाला, फिरोजाबाद Published by: Abhishek Saxena Updated Fri, 09 Aug 2019 09:32 AM IST
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Quit India Movement freedom movement special story of firozabad
इसी जगह बनाई थी आंदोलनकारियों ने रणनीति - फोटो : अमर उजाला
अंग्रेजों भारत छोड़ो नारे के साथ अगस्त क्रांति की मशाल सुहाग नगरी में भी जली थी। आजादी के आंदोलन में सक्रिय इस शहर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा बुलंद किया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की एक आवाज पर आजादी की लड़ाई में यहां के लोग भी कूद पडे़ थे। 
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आठ अगस्त 1942 को महात्मा गांधी ने करो या मरो का नारा दिया और अंग्रेजों भारत छोड़ो की आवाज बुलंद की। नौ अगस्त को मुंबई में महात्मा गांधी गिरफ्तार हुए। इसके बाद देशभर में अगस्त क्रांति की ज्वाला धधक उठी। जगह-जगह गिरफ्तारियां शुरू हो गईं।
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फिरोजाबाद से भी आंदोलन की आग उठी। आजादी की लड़ाई में सक्रिय रहने वाले फिरोजाबाद के वीर योद्धा इस आंदोलन में कूद पडे़ थे। नौ अगस्त 1942 की दोपहर को जगन्नाथ लहरी को अंग्रेजों की सरकार ने गिरफ्तार कर लिया।
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शाम को स्वतंत्रता संग्रामी सेनानी लाला गोपीनाथ भी गिरफ्तार किए गए। उन दिनों नगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष लाला गोपीनाथ और महामंत्री लहरी थे। दोनों को आगरा सेंट्रल जेल में डाल दिया गया था। बाद में यहां गिरजाशंकर दुबे के नेतृत्व में एक बड़ा जुलूस निकला।

जंग ए आजादी का आंदोलन इस तरह भड़का कि विद्यार्थियों ने तिरंगा हाथ में लेकर जुलूस निकाला। कई स्थानों पर तोड़फोड़ की गई। तब शहर का बड़ा डाकखाना आंदोलनकारियों के निशाने पर रहा, काफी तोड़फोड़ की गई। 1942 की अगस्त क्रांति का गवाह बड़ा डाकघर अब उस स्थान पर नहीं रहा है। इस जगह से अब डाकघर का अस्तित्व खत्म हो चुका है। यह डाकघर सुहागनगर स्थित नई बिल्डिंग में शिफ्ट हो चुका है। 

आंदोलन में इन लोगों ने दिया बड़ा योगदान 
अगस्त क्रांति आंदोलन में जीवाराम पालीवाल, पन्नालाल सरल, डॉ. प्यारेलाल राठौर, वैद्य बुद्धदेव, भूपसिंह शर्मा, बौहरे ओमप्रकाश, बाबूलाल याज्ञिक, रतनलाल बंसल, पंडित श्यामलाल वकील, सोमराज पालीवाल, रामगोपाल पालीवाल, गुरुदयाल सिंह, राधारमण वासलस, केदारनाथ हिंद,  कालीचरन जवरेवा, कैलाशचंद्र,  गंधर्वसिंह यादव, मेघदत्त शर्मा, राजाबाबूू गुप्ता, रामकिशन गुप्ता, पंडित रामंचद्र पालीवाल, जगदीश प्रसाद झिंदल, कुंदनलाल, घनश्यामदास चतुर्वेदी ने योगदान दिया।
 

गोशाला में बनती थी रणनीति 
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जगन्नाथ लहरी उस समय यहां आजादी की लड़ाई को धार दिए हुए थे। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामसनेही लाल शर्मा यायावर बताते हैं कि गोशाला स्थित कार्यालय से जगन्नाथ लहरी, रामचंद्र पालीवाल और भूप सिंह शर्मा आजादी की लड़ाई का आंदोलन संचालित किया करते थे।
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