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क्वीन विक्टोरिया कालेज में शिक्षकों का चयन रद्द
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Updated Wed, 02 Mar 2016 02:00 AM IST
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क्वीन विक्टोरिया गर्ल्स इंटर कालेज में पिछले वर्ष चयनित किए गए 16 प्रवक्ता और सहायक अध्यापिकाओं के लिए बुरी खबर है। पदों को भरे जाने के लिए की गई कार्रवाई को विधिक रूप से शून्य कर दिया गया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने इस संबंध में मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक को आदेश जारी किया है।
क्वीन विक्टोरिया गर्ल्स इंटर कालेज में प्रवक्ता और सहायक अध्यापिकाओं के पदों पर किए गए चयन के विरुद्ध मुख्यमंत्री से शिकायत की गई थी। जिसकी जांच जिलाधिकारी ने जिला विद्यालय निरीक्षक दिनेश कुमार यादव को सौंपी। 23 मार्च 2015 को डीएम के यहां से भेजी गई जांच आख्या में चयन को नियम विरुद्ध बताया गया। इस संबंध में दो बार मंडलीय संयुक्त निदेशक अरविंद पांडेय से भी जांच आख्या मांगी गई। जिलाधिकारी और मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक की रिपोर्ट के अध्ययन के बाद पाया गया कि शिक्षकों का चयन नियमानुसार नहीं है।
व्यवस्था है कि स्वीकृत पद के रिक्त होने पर उसको भरे जाने के लिए तीन माह के अंदर विज्ञप्ति जारी करनी चाहिए। ऐसा न करने पर पद समाप्त माने जाते हैं। ऐसी स्थिति में माध्यमिक शिक्षा निदेशक की स्वीकृति के बाद ही पदों को भरा जा सकता है। क्वीन विक्टोरिया में शिक्षकों के चयन के लिए निदेशक से स्वीकृति नहीं ली गई। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने वर्ष 2013 में हुए हाईकोर्ट के एक निर्णय का हवाला देते हुए पदों को भरे जाने के लिए की गई कार्रवाई को विधिक रूप से शून्य बताया है। मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) अरविंद कुमार पांडेय का कहना है कि माध्यमिक शिक्षा निदेशक के आदेश का पालन किया जाएगा।
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नए सिरे से नियुक्ति प्रक्रिया अपनानी होगी
आगरा। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक को निर्देश दिया कि संस्था के अधिकारियों को अवगत कराया जाए कि वह छात्राओं की संख्या के आधार पर पदों को भरे जाने के लिए अनुमति प्राप्त करें।
चर्चा में रहा था चयन
आगरा। तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक द्वितीय कमलेश कुमार चयन प्रक्रिया के दौरान ही मेडिकल लीव पर चले गए थे। बाद में उनको प्रभारी डायट प्राचार्य के पद पर तैनाती मिली। चर्चाओं में इसे क्वीन विक्टोरिया में शिक्षकों के चयन प्रक्रिया से जोड़ा गया।
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क्वीन विक्टोरिया गर्ल्स इंटर कालेज में प्रवक्ता और सहायक अध्यापिकाओं के पदों पर किए गए चयन के विरुद्ध मुख्यमंत्री से शिकायत की गई थी। जिसकी जांच जिलाधिकारी ने जिला विद्यालय निरीक्षक दिनेश कुमार यादव को सौंपी। 23 मार्च 2015 को डीएम के यहां से भेजी गई जांच आख्या में चयन को नियम विरुद्ध बताया गया। इस संबंध में दो बार मंडलीय संयुक्त निदेशक अरविंद पांडेय से भी जांच आख्या मांगी गई। जिलाधिकारी और मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक की रिपोर्ट के अध्ययन के बाद पाया गया कि शिक्षकों का चयन नियमानुसार नहीं है।
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व्यवस्था है कि स्वीकृत पद के रिक्त होने पर उसको भरे जाने के लिए तीन माह के अंदर विज्ञप्ति जारी करनी चाहिए। ऐसा न करने पर पद समाप्त माने जाते हैं। ऐसी स्थिति में माध्यमिक शिक्षा निदेशक की स्वीकृति के बाद ही पदों को भरा जा सकता है। क्वीन विक्टोरिया में शिक्षकों के चयन के लिए निदेशक से स्वीकृति नहीं ली गई। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने वर्ष 2013 में हुए हाईकोर्ट के एक निर्णय का हवाला देते हुए पदों को भरे जाने के लिए की गई कार्रवाई को विधिक रूप से शून्य बताया है। मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) अरविंद कुमार पांडेय का कहना है कि माध्यमिक शिक्षा निदेशक के आदेश का पालन किया जाएगा।
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नए सिरे से नियुक्ति प्रक्रिया अपनानी होगी
आगरा। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक को निर्देश दिया कि संस्था के अधिकारियों को अवगत कराया जाए कि वह छात्राओं की संख्या के आधार पर पदों को भरे जाने के लिए अनुमति प्राप्त करें।
चर्चा में रहा था चयन
आगरा। तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक द्वितीय कमलेश कुमार चयन प्रक्रिया के दौरान ही मेडिकल लीव पर चले गए थे। बाद में उनको प्रभारी डायट प्राचार्य के पद पर तैनाती मिली। चर्चाओं में इसे क्वीन विक्टोरिया में शिक्षकों के चयन प्रक्रिया से जोड़ा गया।