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आगरा: संक्रमित की जान भी नहीं बची, 12 दिन में बिल बनाया नौ लाख रुपये, परिजनों ने की शिकायत

Wed, 02 Jun 2021 12:15 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 02 Jun 2021 12:15 AM IST
सार

सरकार के सख्त आदेश के बाद भी कोरोना मरीज के इलाज का मनमाना बिल वसूला जा रहा है। आगरा में ऐसा ही मामला सामने आया है। पीड़ित परिजनों ने निजा अस्पताल पर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत कर जांच की मांग की है। 

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के रवि हॉस्पिटल में कोरोना संक्रमित मरीज के इलाज के नाम पर मनमानी कीमत वसूलने की एक और शिकायत हुई है। पीड़िता ने 12 दिन के इलाज के लिए करीब नौ लाख रुपये वसूलने का आरोप लगाया है। मुख्यमंत्री पोर्टल पर इस संबंध में शिकायत कर जांच की मांग की गई है।  

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मारुति रेजीडेंसी, मारुति एस्टेट निवासी रिचा बत्रा का कहना है कि एसबीआई में डिप्टी मैनेजर उनके पति हरीश बत्रा (55) को संक्रमित होने पर 29 अप्रैल को दिल्ली गेट स्थित रवि हॉस्पिटल में भर्ती कराया। एडवांस में उन्होंने 50 हजार रुपये जमा कराए। 
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चार मई को हालत खराब होने लगी तो अस्पताल स्टाफ ने वेंटिलेटर न होने की बात कहते हुए दूसरे अस्पताल लेकर जाने के लिए कहा। आरोप है कि बाद में मैनेजर आया और कहा कि 1.50 लाख रुपये जमा करा दो तो वेंटिलेटर की व्यवस्था हो जाएगी। रुपये जमा कराने पर अस्पताल में ही वेंटिलेटर उपलब्ध करा दिया गया। 

4,50,000 रुपये की दवाएं और पीपीई किट, मास्क और सैनिटाइजर के 4500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से वसूले गए। 42 हजार रुपये की सर्जरी का बिल भी बनाया, जबकि ऑपरेशन करने के लिए परिजनों से कोई सहमति नहीं ली गई थी। 11 मई को पति का देहांत हो गया। 

रिचा बत्रा का कहना है कि करीब नौ लाख रुपये उनसे वसूले गए। उन्होंने आरोप लगाया कि पति जब भर्ती किए थे, तब उनके गले में सोने का लॉकेट भी था, वह भी चोरी हो गया। उन्होंने मुख्यमंत्री और डीएम के यहां शिकायत करते हुए बिल की जांच कराने की मांग की है। 

सभी आरोप बेबुनियाद
अस्पताल संचालक डॉ. रविंद्र मोहन पचौरी ने कहा कि सभी आरोप बेबुनियाद हैं। इलाज में कोई लापरवाही नहीं बरती और ना ही गलत बिल वसूले गए हैं। इलाज के वक्त यथास्थिति परिजनों को बताते रहे। जांच के लिए तैयार हैं। 

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