Agra: बंदियों के हुनर से रोशन होगी घरों की दिवाली, जेल में हिंदू-मुस्लिम मिलकर बना रहे गोबर के दीये
जिला कारागार में निरुद्ध बंदी इन दिनों गोबर से दीये बना रहे हैं। इनको बाजार में भी बेचा जाएगा। दिवाली पर यह दीये खास होंगे।
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जिला जेल के बंदी भले ही दिवाली पर अपनों से दूर हैं, लेकिन उनके बनाए दीये उनके और दूसरों के घरों में उजाला फैलाएंगे। जेल प्रशासन बंदियों से सवा लाख दीये तैयार करा रहा है। इनको 50 पैसे प्रति दीये के हिसाब से बेचा जाएगा। इसे मुलाकात के लिए आने वाले खरीद सकेंगे। जेल के बाहर स्टाल लगाकर आम लोगों में भी बिक्री होगी। 50 हजार दीये अकेले गायत्री परिवार को दिए जाने हैं।
जेल अधीक्षक पीडी सलौनिया ने बताया कि गोबर से सवा लाख दीये तैयार कराए जा रहे हैं। इस कार्य में 35 से 40 बंदी लगे हैं। दीयातैयार कराने का मुख्य उद्देश्य बंदियों को सकारात्मक ऊर्जा और विचार की ओर से बढ़ाना है। मुलाकात करने आने वालों को 20 दीयों का एक पैकेट 10 रुपये में दिया जा रहा है। जेल परिसर के बाहर भी एक स्टाल लगाया गया है। यहां से कर्मचारी और आम लोग दीये खरीद सकेंगे। 50 हजार दीये आंवलखेड़ा में गायत्री पीठ परिवार को दिए जाएंगे।
गोशाला से आ रहा गोबर
जेल की गोशाला में 88 गाय हैं। देखरेख बंदी ही करते हैं। वह एक तो गोबर की लोई बनाते हैं, दूसरा गोबर को सुखाकर पाउडर तैयार करते हैं। इसके बाद बंदी खराब एलईडी बल्ब का प्रयोग गोबर को ढालकर आकार देने में करते हैं। सूखने के बाद दीया तैयार हो जाता है।
आमिर और इब्राहिम भी कर रहे सहयोग
जेल में मुख्य रूप से 15 बंदियों को दीपक तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। बाकी 20 से 25 बंदी सहयोग में हैं। 15 बंदियों में मोहन, राहुल, राजू, रोहित, भूरा, संदीप, निहाल, सूरज, अहिबरन, अमित, काले के अलावा आमिर, इब्राहिम और शमशाद भी हैं।