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वसंत के आगाज का उल्लास, तैयारियों में जुटे स्कूल व संस्थान

Sat, 13 Feb 2021 11:57 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sat, 13 Feb 2021 11:57 PM IST
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,preparation of vasanat panchami in school
सोरों में संस्कृत विद्यालय के छात्र वेदों का मंत्रोच्चारण करना सीखते। - फोटो : KASGANJ
वसंत का आगाज हुआ है तो लोगों में उल्लास है। वसंत पंचमी पर्व को लेकर स्कूलों से लेकर साहित्य कला सहित अन्य क्षेत्रों से जुड़े संस्थान भी कार्यक्रमों के आयोजनों की तैयारियों में जुटे हैं। जहां एक ओर संस्कृत विद्यालयों एवं सरस्वती विद्या एवं शिशु मंदिरों में कार्यक्रमों के आयोजन के लिए रिहर्सल चल रहा है तो वहीं साहित्य, शिक्षा, कला, संस्कृति के क्षेत्र से जुड़े संस्थान भी आयोजन की रूप रेखा तैयार कर चुके हैं।
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सिखाये जा रहे नई विद्या आरंभ के संस्कार
सोरों का मेहता संस्कृत विद्यालय हो या फिर सरस्वती शिशु मंदिर या जिले के अन्य संस्कृत स्कूल। हर जगह नई विद्या आरंभ करने के संस्कार सिखाए जा रहे हैं। बसंत पंचमी पर्व को लेकर तैयारियां की गई हैं। 16 फरवरी को इन संस्थाओं में मां सरस्वती की वंदना व पूजन के कार्यक्रम होंगे। शिक्षक व विद्यार्थी पूजन करेंगे। इस दिन पीले वस्त्र पहनने का महत्व है। सोरों के संस्कृत विद्यालय में अभी से वेदों की रचनाओं को पढ़ने का अभ्यास कराया जा रहा है। मां सरस्वती के पूजन की तैयारियां की जा रही हैं।
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अन्य संस्थाओं ने खींचा तैयारियां का खाका
साहित्यिक संस्था निर्झर, रंग रस मंजरी भी बसंत पंचमी पर्व पर कार्यक्रमों के आयोजनों की तैयारियां कर चुकी हैं। निर्झर संस्था की ओर से काव्य पाठ होगा। मां सरस्वती का पूजन होगा। बसंत पंचमी पर्व का महत्व बताया जाएगा। यह कार्यक्रम संस्था के कार्यालय पर होगा। मनमस्त महाराज आश्रम पर भी सरस्वती पूजन होगा। इसके अलावा नाट्य संस्कृत संस्थान की ओर से भी मां सरस्वती पूजन होगा और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। नाट्य संस्कृति संस्थान में अभी से रिहर्सल चल रहा है। इस संस्थान की संचालिका हिमांशी द्विवेदी अपने आवास पर रिहर्सल कराने के साथ-साथ ऑनलाइन भी तैयारियां कर रही हैं।
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कवि डॉक्टर अजय अटल की रचना:
झन झनन झनन झन झनन झनन,
झन झनन झनन झन झनन झनन ।
माँ उंगली से छू रही तार, वीणा से निकल रही सरगम ।
झन झनन झनन झन झनन झनन। बैठी है धवल चांदनी की,
झिलमिल झिलमिल ओढ़े चूनर
तुलसी मीरा सूरा कबीर से,
टंके सितारे हैं जिस पर ।।
पर्वत सागर के मध्य योगियों,
सी समाधि में निर्विकार ।
रच रही राग रागिनी ताल धुन,
शब्द छन्द रस अलंकार ।।
इस दिव्य दृश्य को देख दिशाएं नाच उठीं छन छनन छनन । पुलकित पशु पक्षी पेड़ पुष्प,
प्रमुदित पृथ्वी पल पल पल पल ।
उठतीं गिरतीं ध्वनि की तरंग,
नभ में होती हलचल हलचल ।।
पायल की मृदु झनकार,
हारती जिससे भवरों की गुन गुन ।
करधनी कमर की कसी कनक,
कड़ियों से निकल रही रुन झुन ।।
कर कमल कलाई कमलनाल के कंगना खनके खन खन ।
झन झनन झ नन झन झनन झनन

संत की खबर से संबंधित। कवि डॉक्टर अजय अटल।

संत की खबर से संबंधित। कवि डॉक्टर अजय अटल।- फोटो : KASGANJ

बसंत पंचमी की खबर से संबंधित- बसंत पंचमी पर्व के लिए बच्चों को कार्यक्रम का रिहर्सल करातीं हिमांश

बसंत पंचमी की खबर से संबंधित- बसंत पंचमी पर्व के लिए बच्चों को कार्यक्रम का रिहर्सल करातीं हिमांश- फोटो : KASGANJ

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