NRI Day: विदेशों में कमाया नाम, अब आगरा के लिए कर रहे काम, पढ़ें प्रवासियों की कहानी
- आगरा के लीलाराम, ललित लालवानी और राजीव डागा वर्षों से विदेश में बसे हैं पर अपने शहर से है लगाव
- यहां निर्धनों की पढ़ाई व परवरिश, जरूरतमंदों का उपचार, गोशालाओं को दान आदि से कर रहे सहयोग
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रोजगार की तलाश में ताजनगरी से बड़ी संख्या में लोग विदेशों में गए और वहां बस गए। वहां अच्छे पदों पर काबिज हैं और अपने-अपने क्षेत्र में नाम कमा रहे हैं। लेकिन, इनमें कुछ ऐसे हैं जो अपने शहर की बेहतरी के लिए भी संकल्पित हैं। वे अपनी-अपनी क्षमताओं और तरीकों से अपने शहर के लोगों के जीवन और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए जुटे हुए हैं। पढ़ें ऐसे ही कुछ लोगों और उनके संकल्पों के बारे में जानकारी देती यह रिपोर्ट...
10 बच्चों की पढ़ाई व परवरिश का जिम्मा उठा रहे यशु
गांधी नगर निवासी यशु गुप्ता एक साल से दुबई में एक बड़ी कंपनी में ऊंचे पद पर काम कर रहे हैं। इसके बाद भी आगरा से उनका लगाव कम नहीं हुआ है। उन्होंने यहां निर्धन बच्चों की पढ़ाई का बीड़ा उठाया है। वह दो वर्षों से दस बच्चों की शिक्षा का खर्च वहन कर रहे हैं। पढ़ाई के अलावा उनके कपड़े और खाने का इंतजाम भी करते हैं। वह कहते हैं कि उन्हें कोई भी ऐसा बच्चा दिखता है, जिसकी पढ़ाई में रुचि है तो वह उसे प्रोत्साहित करते हैं। जहां तक हो सके उसकी मदद करते हैं।
लीलाराम की गरीबों में बसती आत्मा
शाहगंज निवासी लीलाराम मयानी करीब 35 वर्ष पूर्व स्पेन के बार्सिलोना शहर में बस गए। वहां एंटीक वस्तुओं का कारोबार शुरू किया, काम चल निकला। खूब नाम कमाया, लेकिन मन अपने शहर में ही रमा रहा। ऐसे में उन्होंने शहरवासियों के लिए कुछ करने का मन बनाया। जरूरतमंद लोगों के निशुल्क ऑपरेशन कराए। पशुओं के उद्धार के लिए काम किया। उनका कहना है कि उनकी आत्मा गरीब लोगों में बसती है। वह आगरा में एक संस्था से जुड़े हैं। जहां निर्धन लोगों का निशुल्क ऑपरेशन कराया जाता है। वह अब तक करीब 25 लोगों का इलाज करा चुके हैं। यह सिलसिला जारी है।
विकलांगों को बांटे दो हजार उपकरण
मोती कटरा निवासी राजीव डागा अमेरिका में करीब 25 साल से रह रहे हैं। वहां आभूषण और शेयर के कारोबार से जुड़े हैं। वह आगरा की महावीर विकलांग सेवा संस्था से जुड़े हैं। विकलांगों के लिए लगातार प्रयासरत रहते हैं। हर साल आगरा आते हैं। उन्होंने बीते वर्ष आगरा में एक शिविर लगाकर दो हजार से ज्यादा विकलांगों को अलग-अलग उपकरणों का निशुल्क वितरण करवाया था। इसके अलावा जल्द उनके लिए एक स्वास्थ्य केंद्र भी खोलने की योजना है।
स्पेन जैसी व्यवस्था बनाने की कवायद में ललित
मारुति एस्टेट निवासी ललित लालवानी 16 सालों से स्पेन में बसे हुए हैं। वहां आभूषणों का कारोबार है। समय-समय पर घर आते रहते हैं। उन्हें यहां की गंदगी और यातायात की व्यवस्था कचोटती है। वह शहर की तस्वीर को बदलने की कोशिश में जुटे हुए हैं। उनका कहना है कि वह एनजीओ बनाएंगे, जिसमें स्थानीय लोगों की टीम बनाई जाएगी। वे लगभग हर रोज लोगों में जागरूकता लाने की कोशिश करेंगे। इसके बाद नगर निगम और पुलिस के साथ मिलकर स्पेन की व्यवस्था को लागू करने का प्रयास करेंगे।
गाय से लगाव खींच लाता है रुंजन को शहर
कमला नगर निवासी रुंजन गांधी का परिवार कई वर्षों पहले अमेरिका चला गया था। रुंजन का जन्म वहीं हुआ। इस समय वह एक ऑटोमोबाइल कंपनी में ऊंचे पद पर कार्यरत हैं। शहर के प्रति लगाव यह है कि हर साल आगरा आना होता है। उनका कहा है कि उन्हें गायों से लगाव है, यहां आकर हर बार गोशाला में दान देने की परंपरा बन गई है। यहां पर गायत्री परिवार से भी जुड़ गई हैं। गायों की सेवा करती हैं। हिंदू संस्कृति और गायत्री परिवार का प्रचार प्रसार भी करती हैं।