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ऊर्जा मंत्री को खुश करने के लिए उनके क्षेत्र की जनता को ही परेशान कर रहा ऊर्जा विभाग

Wed, 31 Oct 2018 07:29 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला मथुरा Updated Wed, 31 Oct 2018 07:29 PM IST
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Power department imposing false case for illegal power connection in mathura
प्रतीकात्मक तस्वीर

उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा को खुश करने का तरीका ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को उल्टा पड़ गया है। अधिकारियों की गलत तरकीब से ऊर्जा मंत्री के क्षेत्र की जनता परेशान हो उठी है। इससे ऊर्जा मंत्री को जनता के गुस्सा का शिकार होना पड़ रहा है। अब अधिकारियों की शामत पर बन आई है।  

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मथुरा में ऊर्जामंत्री को खुश करने के लिए उनके गृह जनपद में विद्युत निगम के इंजीनियर धड़ाधड़ बिजली चोरी की रिपोर्ट दर्ज करा रहे हैं। सरकार बनने के बाद अब तक मथुरा जनपद में ही आठ हजार से ज्यादा रिपोर्ट दर्ज करा दी गई हैं। 
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यह आंकड़ा प्रत्येक दिन 300 से ज्यादा बिजली चोरी की रिपोर्ट के रूप में सामने आ रहा हैं। इसमें भी पकड़े जा रहे अधिकांश बिजली चोरी के मामले संदिग्ध पाए जा रहे हैं। यह सिर्फ गुडवर्क दिखाने और मंत्री को खुश करने के लिए किया जा रहा है।
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चौंकाने वाली यह रिपोर्ट जनपद के विशेष न्यायाधीश अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अमर पाल सिंह की है। उन्होंने प्रमुख सचिव (ऊर्जा) बिजली आलोक कुमार को पत्र भेजते हुए कहा है कि वर्ष 2003 से 2013 तक मात्र चार हजार बिजली चोरी की रिपोर्ट मथुरा जनपद में दर्ज हुईं। जबकि वर्ष 2017 और 18 में मात्र एक साल में बिजली चोरी के आठ हजार केस दर्ज कराए गए हैं।

वर्तमान में 1200 बिजली चोरी के मुकदमे लंबित हैं। विशेष न्यायाधीश ने प्रमुख सचिव आलोक कुमार को पत्र में अवगत कराया है कि कानून को ताक पर रख कर बिजली चोरी के मामले दर्ज कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि इंजीनियरों द्वारा घोर अनियमिताओं के साथ केवल गुडवर्क और ऊर्जा मंत्री को खुश और संतुष्ट करने के लिए कानून को नजरअंदाज किया जा रहा है। 

विशेष न्यायाधीश ने प्रमुख सचिव को नौहझील थाने के चार केस की जानकारी भी भेजी है। इनमें से गांव नावली में मात्र तीन घंटे में बिजली इंजीनियरों ने 55 लोगों के खिलाफ बिजली चोरी करते पकड़ा दर्शाया है। इस मामले में अदालत ने माना कि इतने कम समय में 55 लोगों को चेक नहीं किया जा सकता। 

विद्युत इंजीनियरों ने यह रिपोर्ट चार महीने बाद दर्ज कराई। केस में चोरी का भार तक अंकित नहीं है। एक को छोड़कर सभी तहरीर फोटो स्टेट दी गईं।अधिकतर मुकदमे साक्ष्य विहीन हैं। इंजीनियरों द्वारा मरे हुए व्यक्तियों को भी नहीं बख्शा है। कोई अधिकारी साक्ष्य देने कोर्ट में हाजिर नहीं होता है ऐसे में
मुकदमों में सफलता नाउम्मीद होती है।
       
फिलहाल रिपोर्ट दर्ज कराने पर रोक लगाने का अनुरोध करते हुए विशेष न्यायाधीश ने सुझाव दिया है कि इन केसों के निस्तारण के लिए अलग से अधिवक्ता
रखा जाना चाहिए। विशेष न्यायाधीश द्वारा भेजे पत्र से विद्युत इंजीनियरों में खलबली मची हुई है। दक्षिणाचंल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक एसके वर्मा ने विशेष न्यायाधीश द्वारा दिए गए सुझावों को अमल में लाते हुए 14 सूत्री निर्देश दिए हैं। 

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