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बिटिया है सरहद पार... खत बिन कैसे होगी बात, पाकिस्तान से बंद हुई डाक
Thu, 24 Oct 2019 11:44 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 24 Oct 2019 11:44 AM IST
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डॉ. नसरीन बेगम व डॉ. सिराज कुरैशी
- फोटो : अमर उजाला
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दो बेटियां पाकिस्तान में है, दोनों मुल्कों का तनाव उन्हें आने नहीं देता, उनके खत आ जाते थे, इसी से तसल्ली हो जाती थी, लगता था, बातें कर लीं, कभी खुशी का पैगाम तो कभी गम की खबर... मगर अब तो मुलाकात का यह जरिया भी बंद हो गया... यह दर्द है सदर भट्टी के निजामुद्दीन का जिनकी दो बेटियों की शादी कराची में हुई है।
पाकिस्तान से खत ओ किताबत बंद हो जाने से उनके जैसे 200 परिवारों में बेचैनी है। खतों के जरिए दूरियों में भी रिश्तों की गर्माहट बनी हुई थी। अब फोन का ही सहारा रह गया है।
शाहगंज, कोठी मीना बाजार निवासी शबनम नूर ने बताया कि उनके भाई मोहम्मद हामिद एडवोकेट कराची में रहते हैं। 10 सितंबर को उनके बेटे का निकाह हुआ था। तब शादी का कार्ड आया था। अब कोई खबर नहीं है। वह ईद और बकरीद के त्योहारों पर नजराना भेजा करते थे, अब चिट्ठी बंद होने से सुख-दुख की खबरें भी नहीं पहुंच पाएंगी।
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पाकिस्तान से खत ओ किताबत बंद हो जाने से उनके जैसे 200 परिवारों में बेचैनी है। खतों के जरिए दूरियों में भी रिश्तों की गर्माहट बनी हुई थी। अब फोन का ही सहारा रह गया है।
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शाहगंज, कोठी मीना बाजार निवासी शबनम नूर ने बताया कि उनके भाई मोहम्मद हामिद एडवोकेट कराची में रहते हैं। 10 सितंबर को उनके बेटे का निकाह हुआ था। तब शादी का कार्ड आया था। अब कोई खबर नहीं है। वह ईद और बकरीद के त्योहारों पर नजराना भेजा करते थे, अब चिट्ठी बंद होने से सुख-दुख की खबरें भी नहीं पहुंच पाएंगी।
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सदर भट्ठी, मंटोला के निजामुद्दीन बताते हैं कि चार साल पहले दोनों बेटियां आई थीं, वीजा अवधि समाप्त होने से पहले ही पाकिस्तान लौट गईं थीं। निजामुद्दीन का कहना है कि खतों के जरिये तफ्सील से एक दूसरे का हाल जान लेते हैं। शादी संबंधों से लेकर गमी तक के बारे में पता रहता था। अब डाक बंद होने से बेटियों के पास कुछ भेज भी नहीं सकते हैं।
हिंदुस्तानी बिरादरी के अध्यक्ष डॉ. सिराज कुरैशी बताते हैं कि मंटोला में इसी महीने दो लड़कों का निकाह होना है, जिनके रिश्तेदार हैदराबाद और कराची में रहते हैं। शादी के कार्ड तो भेजते थे, लेकिन अब वह भी बंद हो गए हैं। पाकिस्तान की लड़कियों की शादी भी ताजगंज के परिवारों में हुई हैं। वह अभी अपने लोगों से संपर्क में रहती थीं, लेकिन अब यह संपर्क और सीमित हो जाएंगे।
हास्पिटल रोड स्थित मस्जिद के मुतवल्ली सैयद इरफान सलीम बताते हैं कि पहले आगरा की अबुल उला दरगाह और मस्जिद में होने वाले उर्स में शिरकत करने पाकिस्तान से लोग पहुंचते थे। यह सिलसिला पांच साल से बंद है, अब चिट्ठी भी बंद हो गईं। बहुत से लोगों के रिश्तेदार पाकिस्तान में रहते हैं। एक दूसरे का हाल जानने की बेताबी तो रहती है।
हिंदुस्तानी बिरादरी के अध्यक्ष डॉ. सिराज कुरैशी बताते हैं कि मंटोला में इसी महीने दो लड़कों का निकाह होना है, जिनके रिश्तेदार हैदराबाद और कराची में रहते हैं। शादी के कार्ड तो भेजते थे, लेकिन अब वह भी बंद हो गए हैं। पाकिस्तान की लड़कियों की शादी भी ताजगंज के परिवारों में हुई हैं। वह अभी अपने लोगों से संपर्क में रहती थीं, लेकिन अब यह संपर्क और सीमित हो जाएंगे।
हास्पिटल रोड स्थित मस्जिद के मुतवल्ली सैयद इरफान सलीम बताते हैं कि पहले आगरा की अबुल उला दरगाह और मस्जिद में होने वाले उर्स में शिरकत करने पाकिस्तान से लोग पहुंचते थे। यह सिलसिला पांच साल से बंद है, अब चिट्ठी भी बंद हो गईं। बहुत से लोगों के रिश्तेदार पाकिस्तान में रहते हैं। एक दूसरे का हाल जानने की बेताबी तो रहती है।
पाकिस्तान को रोजाना 30 सामान बुक होते थे
पाकिस्तान ने 23 अगस्त 2019 से ही भारत से जाने वाली डाक सामग्री को बंद कर दिया। इसके बाद 18 अक्तूबर से यहां से भी पाकिस्तान को भेजी जाने वाली डाक पर रोक लगा दी गई। आगरा से ही पाकिस्तान को प्रतिदिन औसतन 30 सामान डाक, पार्सल आदि बुक किए जाते थे। अब प्रतापपुरा व आगरा फोर्ट डाकघरों पर यह सेवा बंद कर दी गई है। -यूपी सिंह सेंगर, उप निदेशक, डाक सेवाएं
खत यानी आधी मुलाकात: डॉ. नसरीन बेगम
खत वह जरिया है कि हम अपने अजीज दोस्त व अहबाब से कोई कहना चाहें और वह हमारे सामने मौजूद न हो तो अपने दिली जज्बात और गुफ्तगू उसे लिख भेजना मकतूब निगारी है।
खत से हमारी आधी मुलाकात हो जाती है। खत पढ़ते वक्त ऐसा महसूस होता है कि वह शख्स हमारे सामने मौजूद है और हमारे अजीज जो हमसे फासलों पर रहते हैं, तवादलाये रुयाल के लिए और खैरियत जानने के लिए बेचैन रहते हैं। खत मिलते ही दिली सुकून हासिल हो जाता है। तो बस खत ही ऐसा जरिया है जिसे हम आधी मुलाकात के बाद उसे तौर यादगार संभाल कर रखते हैं।
खतूत नवीसी का फन हमारी कलमी सलाहियत को भी बेहतर बनाता है। मिर्जा गालिब ने तो जाती खत को एक फन बना दिया ‘हजार कोस से बजबान ए कलम बातें किया करो और हिज्र में विसाल के मजे लिया करो।’
पाकिस्तान ने 23 अगस्त 2019 से ही भारत से जाने वाली डाक सामग्री को बंद कर दिया। इसके बाद 18 अक्तूबर से यहां से भी पाकिस्तान को भेजी जाने वाली डाक पर रोक लगा दी गई। आगरा से ही पाकिस्तान को प्रतिदिन औसतन 30 सामान डाक, पार्सल आदि बुक किए जाते थे। अब प्रतापपुरा व आगरा फोर्ट डाकघरों पर यह सेवा बंद कर दी गई है। -यूपी सिंह सेंगर, उप निदेशक, डाक सेवाएं
खत यानी आधी मुलाकात: डॉ. नसरीन बेगम
खत वह जरिया है कि हम अपने अजीज दोस्त व अहबाब से कोई कहना चाहें और वह हमारे सामने मौजूद न हो तो अपने दिली जज्बात और गुफ्तगू उसे लिख भेजना मकतूब निगारी है।
खत से हमारी आधी मुलाकात हो जाती है। खत पढ़ते वक्त ऐसा महसूस होता है कि वह शख्स हमारे सामने मौजूद है और हमारे अजीज जो हमसे फासलों पर रहते हैं, तवादलाये रुयाल के लिए और खैरियत जानने के लिए बेचैन रहते हैं। खत मिलते ही दिली सुकून हासिल हो जाता है। तो बस खत ही ऐसा जरिया है जिसे हम आधी मुलाकात के बाद उसे तौर यादगार संभाल कर रखते हैं।
खतूत नवीसी का फन हमारी कलमी सलाहियत को भी बेहतर बनाता है। मिर्जा गालिब ने तो जाती खत को एक फन बना दिया ‘हजार कोस से बजबान ए कलम बातें किया करो और हिज्र में विसाल के मजे लिया करो।’