{"_id":"5e56633e8ebc3ef3fe6227f0","slug":"poor-children-get-free-admission-in-private-school-application-starts-from-march-2nd","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"खुशखबरः गरीब बच्चों को मिलेगा निजी विद्यालय में निशुल्क दाखिला, दो मार्च से करें आवेदन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खुशखबरः गरीब बच्चों को मिलेगा निजी विद्यालय में निशुल्क दाखिला, दो मार्च से करें आवेदन
Wed, 26 Feb 2020 06:04 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 26 Feb 2020 06:04 PM IST
विज्ञापन
शिक्षा के अधिकार अधिनियम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अप्रैल से शुरू होने जा रहे शैक्षणिक सत्र में गरीब बच्चों को कान्वेंट स्कूलों में पढ़ने का मौका मिलेगा। निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम में दी गई व्यवस्था के तहत इन गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से मांगे गए हैं। पात्र बच्चों के आवेदन दो से 26 मार्च के मध्य लिए जाएंगे।
निशुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत निजी स्कूलों को पहली कक्षा की 25 प्रतिशत सीटों पर दुर्लभ व अलाभित समूहों के बच्चों को प्रवेश देना होगा। इसके लिए निजी स्कूलों को सरकार शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए प्रति बच्चा 450 रुपए प्रतिमाह की दर से अनुदान देती है।
यदि बच्चे की पढ़ाई पर आने वाला खर्च 450 रुपये से कम होगा तो स्कूल को वास्तविक खर्च के भुगतान की व्यवस्था है। अभिभावकों को निजी स्कूल के हिसाब से किताब-कॉपियों और ड्रेस की व्यवस्था करने के लिए सरकार अलग से इंतजाम करती है। अभिभावकों के खाते में इस मद में पांच हजार रुपये प्रतिवर्ष भेजे जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
निशुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत निजी स्कूलों को पहली कक्षा की 25 प्रतिशत सीटों पर दुर्लभ व अलाभित समूहों के बच्चों को प्रवेश देना होगा। इसके लिए निजी स्कूलों को सरकार शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए प्रति बच्चा 450 रुपए प्रतिमाह की दर से अनुदान देती है।
विज्ञापन
यदि बच्चे की पढ़ाई पर आने वाला खर्च 450 रुपये से कम होगा तो स्कूल को वास्तविक खर्च के भुगतान की व्यवस्था है। अभिभावकों को निजी स्कूल के हिसाब से किताब-कॉपियों और ड्रेस की व्यवस्था करने के लिए सरकार अलग से इंतजाम करती है। अभिभावकों के खाते में इस मद में पांच हजार रुपये प्रतिवर्ष भेजे जाते हैं।
विज्ञापन
जिला समन्वयक केवी सिंह ने बताया कि आरटीई 2009 अधिनियम के तहत जितने भी मान्यता प्राप्त स्कूल हैं, उनको नर्सरी व कक्षा एक की छात्र संख्या के हिसाब से 25 प्रतिशत कोटे के तहत अलाभित और दुर्बल समूह के बच्चों का दाखिला लेना पड़ेगा। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू होंगे।
आवेदन प्रक्रिया दो से 26 मार्च तक चलेगी। इस अवधि में प्राप्त आवेदनों में से पात्रता के आधार पर छंटनी की जाएगी। समस्त कागजातों के सत्यापन के बाद प्रथम चरण में 31 मार्च को लॉटरी निकाली जाएगी, पांच अप्रैल तक दाखिले कराए जाएंगे। जिन बच्चों को जिला प्रशासन की तरफ से अंग्रेजी माध्यम स्कूल में भेजा जाएगा, उनका दाखिला विद्यालय को लेना पड़ेगा।
दूसरे चरण में ऑनलाइन आवेदन चार से 24 अप्रैल तक लिए जाएंगे। जबकि तीसरे चरण में आवेदन चार मई से 10 जून तक लिए जाएंगे। जिसकी लॉटरी 16 जून कराते हुए 15 जुलाई तक प्रवेश दिलाया जाएगा।
आवेदन प्रक्रिया दो से 26 मार्च तक चलेगी। इस अवधि में प्राप्त आवेदनों में से पात्रता के आधार पर छंटनी की जाएगी। समस्त कागजातों के सत्यापन के बाद प्रथम चरण में 31 मार्च को लॉटरी निकाली जाएगी, पांच अप्रैल तक दाखिले कराए जाएंगे। जिन बच्चों को जिला प्रशासन की तरफ से अंग्रेजी माध्यम स्कूल में भेजा जाएगा, उनका दाखिला विद्यालय को लेना पड़ेगा।
दूसरे चरण में ऑनलाइन आवेदन चार से 24 अप्रैल तक लिए जाएंगे। जबकि तीसरे चरण में आवेदन चार मई से 10 जून तक लिए जाएंगे। जिसकी लॉटरी 16 जून कराते हुए 15 जुलाई तक प्रवेश दिलाया जाएगा।
निशुल्क एडमिशन को यह होंगे पात्र बच्चे
एससी-एसटी, सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग तथा निशक्त बच्चों, एचआईवी या कैंसर पीड़ित माता-पिता या अभिभावक का बच्चा या निराश्रित बेघर बच्चों को अलाभित समूह में रखा गया है। जबकि दुर्बल वर्ग की श्रेणी में जिसके माता-पिता या संरक्षक गरीबी रेखा के नीचे, दिव्यांग या वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त करते हैं या जिनकी अधिकतम वार्षिक आय एक लाख रुपये तक है, को रखा गया है।
बच्चों का होता है शोषण
आरटीई एक्ट के तहत निजी स्कूलों में दाखिला तो दिलाया जाता है। मगर शहर के कुछ स्कूलों में फीस न देने पर बच्चों को स्कूल से निकाल दिया। बीएसए ने स्कूल संचालक के खिलाफ नगर शिक्षाधिकारी को एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए थे। किंतु एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।
एससी-एसटी, सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग तथा निशक्त बच्चों, एचआईवी या कैंसर पीड़ित माता-पिता या अभिभावक का बच्चा या निराश्रित बेघर बच्चों को अलाभित समूह में रखा गया है। जबकि दुर्बल वर्ग की श्रेणी में जिसके माता-पिता या संरक्षक गरीबी रेखा के नीचे, दिव्यांग या वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त करते हैं या जिनकी अधिकतम वार्षिक आय एक लाख रुपये तक है, को रखा गया है।
बच्चों का होता है शोषण
आरटीई एक्ट के तहत निजी स्कूलों में दाखिला तो दिलाया जाता है। मगर शहर के कुछ स्कूलों में फीस न देने पर बच्चों को स्कूल से निकाल दिया। बीएसए ने स्कूल संचालक के खिलाफ नगर शिक्षाधिकारी को एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए थे। किंतु एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।