संगमरमरी ताज पर प्रदूषण के दाग की जांच 

अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 06 Oct 2016 12:58 AM IST
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एएसआई साइंस ब्रांच ने संगमरमर पर जमा गंदगी के सैंपल के साथ हवाओं की दिशा का अध्ययन शुरू किया
एएसआई साइंस ब्रांच ने संगमरमर पर जमा गंदगी के सैंपल के साथ हवाओं की दिशा का अध्ययन शुरू किया - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

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संगमरमरी ताजमहल पर प्रदूषण के दागों की जांच शुरू की गई है। कार्बन कणों की जांच रिपोर्ट के बाद एएसआई साइंस ब्रांच ने ताज के संगमरमर पर जमा गंदगी के सैंपल इकट्ठे किए हैं और प्रदूषण साथ लाने वाली हवाओं की दिशा का अध्ययन शुरू किया है। साइंस ब्रांच की एयर पॉल्यूशन विंग हवा की दिशा, खास समय पर प्रदूषण की तीव्रता और मौसम के मुताबिक प्रदूषण में बदलाव की स्टडी कर रही है। इससे ताज पर लग रहे दाग की मुख्य वजह सामने आ पाएगी।
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ताजमहल के पीले पड़ने के बाद मडपैक तो शुरू हो गया लेकिन ताज किन वजहों से पीला पड़ रहा है, एएसआई उन सभी वजहों की जांच में जुट गया है। एएसआई साइंस ब्रांच के अधीक्षण रसायनविद् डा. एमके भटनागर के नेतृत्व में ताजमहल के संगमरमर पर जमा गंदगी के सैंपल जुटाए गए हैं और उनमें मौजूद तत्वों की जांच की जा रही है। इसी के साथ ही ताज पर प्रदूषण लेकर आ रही हवा की दिशा तक का अध्ययन शुरू किया गया है। ताज की मीनारों के सबसे ऊपरी हिस्से के साथ बीच में और निचले हिस्से से सैंपल इकट्ठे किए गए हैं। ताजमहल पर मौजूद साइंस ब्रांच की एयर पाल्यूशन लैब में करीब एक साल तक हर मौसम की हवाओं का अध्ययन किया जाएगा।
इन सवालों का ढूंढा जा रहा जवाब
- ताज पर हवा की दिशाएं और चक्र किस तरह का है
- ताज पर प्रदूषण की मार सबसे ज्यादा किस समय पर
- सर्दी, बारिश और गर्मी में प्रदूषण की तीव्रता का समय
- हवा की दिशा के साथ उसमें मौजूद तत्वों की मात्रा
- यमुना नदी की ओर से कौन सी गैसों का हो रहा हमला

मडपैक के फायदे या नुकसान की भी स्टडी
ताजमहल की चारों मीनारों और मुख्य गुंबद पर पहली बार किए जा रहे मडपैक से संगमरमर को कितना फायदा हुआ या नुकसान भी हो सकता है, इसकी स्टडी भी साइंस ब्रांच कर रही है। मडपैक से पहले और बाद के मार्बल की जांच शुरू हुई है। दरअसल, एएसआई के लिए यह स्टडी इसलिए भी जरूरी है ताकि ताज के प्रदूषण से पीले पड़ने पर कितने साल बाद मडपैक प्रयोग किया जाए, यह तय हो सके ।

ताजमहल के संगमरमर पर कार्बन के कण जांच में पाए गए। पीलेपन की शिकायतों के बाद संसदीय कमेटी ने जो सिफारिशें की, उसके मुताबिक मडपैक किया जा रहा है। प्रदूषण न रोका गया तो ताजमहल फिर पीला पड़ेगा और मडपैक का प्रयोग करना होगा। मडपैक से ज्यादा जरूरी है ताज के पास पर्यावरण में सुधार।
डा. भुवन विक्रम
अधीक्षण पुरातत्वविद


गुंबद के मडपैक की विदेशों से पूछताछ
आगरा। ताजमहल के मुख्य गुंबद के पहली बार होने जा रहे मडपैक पर अमर उजाला की खबर प्रकाशित होने के बाद बुधवार को विदेशों से कई टूर एंड ट्रेवल आपरेटरों ने एएसआई से पूछताछ की। एएसआई अधिकारियों के मुताबिक, ताज की उत्तरी दीवार के बाद सभी दीवारों पर मडपैक लगेगा। उसके बाद ही मुख्य गुंबद पर काम होगा। कम से कम तीन महीने पाड़ बांधने में लगेंगे। ऐसे में नए साल में ही मुख्य गुंबद पर मडपैक शुरू हो सकेगा। तब तक लोड वियरिंग कैपेसिटी की जांच भी हो जाएगी।
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