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आगरा पुलिस ने किया क्षत्रिय सभा के पदाधिकारियों को नजरबंद, ये है वजह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Sun, 09 Sep 2018 09:11 PM IST
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पुलिस की निगरानी में क्षत्रिय सभा के पदाधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा में क्षत्रिय सभा के पदाधिकारियों को वाटर वर्क्स स्थित क्षत्रिय सदन में नजरबंद कर दिया गया। ये लोग खंदौली के गांव सेमरा गांव में महापंचायत में जाने को थे। सभी पदाधिकारी पांच घंटे तक पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में रहे।
क्षत्रिय सदन में रविवार को मासिक बैठक बुलाई गई थी। इसके बाद पदाधिकारियों की सेमरा महापंचायत में जाने की तैयारी थी। दोपहर 12 बजे सीओ छत्ता रीतेश कुमार सिंह, छत्ता, न्यू आगरा, लोहामंडी, हरीपर्वत की फोर्स के साथ पहुंच गए।
पदाधिकारियों को खंदौली जाने से रोक दिया गया। इसका पदाधिकारियों ने विरोध जताया, लेकिन पुलिस ने क्षत्रिय सदन से किसी को बाहर नहीं निकलने दिया। शाम तकरीबन पांच बजे तक पदाधिकारी पुलिस की निगरानी में रहे। इसके बाद ही जाने दिया गया।
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क्षत्रिय सदन में रविवार को मासिक बैठक बुलाई गई थी। इसके बाद पदाधिकारियों की सेमरा महापंचायत में जाने की तैयारी थी। दोपहर 12 बजे सीओ छत्ता रीतेश कुमार सिंह, छत्ता, न्यू आगरा, लोहामंडी, हरीपर्वत की फोर्स के साथ पहुंच गए।
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पदाधिकारियों को खंदौली जाने से रोक दिया गया। इसका पदाधिकारियों ने विरोध जताया, लेकिन पुलिस ने क्षत्रिय सदन से किसी को बाहर नहीं निकलने दिया। शाम तकरीबन पांच बजे तक पदाधिकारी पुलिस की निगरानी में रहे। इसके बाद ही जाने दिया गया।
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ये थे मौजूद
संगठन के जिलाध्यक्ष जोगेंद्र सिंह परमार, पूर्व जिलाध्यक्ष दिनेश सिंह सिकरवार, भंवर सिंह चौहान, विजय पाल सिंह चौहान, मखेंद्र सिंह चौहान, मंगल सिंह तोमर, अनिल कुमार, रामप्रकाश तोमर, राजेश सिकरवार, राजू परमार, बच्चू सिंह सिकरवार, कमलेंद्र तोमर, सोमवीर सिकरवार सहित 20 पदाधिकारियों को नजरबंद किया गया।
जोगेंद्र सिंह परमार ने बताया कि पदाधिकारियों को नजरबंद करना पुलिस प्रशासन की तानाशाही है। यह आंदोलन अब लंबा चलेगा। भाजपा ही नहीं सभी पार्टियों का विरोध किया जाएगा। चुनाव में नोटा दबाने के लिए प्रचार-प्रसार किया जाएगा। आंदोलन के लिए संघर्ष समिति का गठन कर दिया गया है।
वहीं सीओ छत्ता रीतेश कुमार सिंह ने बताया कि क्षत्रिय सदन से पदाधिकारियों के गांव सेमरा जाने की सूचना मिली थी। इस पर पुलिस गई थी। पदाधिकारियों को बताया गया था कि वहां नहीं जाने दिया जाएगा।
जोगेंद्र सिंह परमार ने बताया कि पदाधिकारियों को नजरबंद करना पुलिस प्रशासन की तानाशाही है। यह आंदोलन अब लंबा चलेगा। भाजपा ही नहीं सभी पार्टियों का विरोध किया जाएगा। चुनाव में नोटा दबाने के लिए प्रचार-प्रसार किया जाएगा। आंदोलन के लिए संघर्ष समिति का गठन कर दिया गया है।
वहीं सीओ छत्ता रीतेश कुमार सिंह ने बताया कि क्षत्रिय सदन से पदाधिकारियों के गांव सेमरा जाने की सूचना मिली थी। इस पर पुलिस गई थी। पदाधिकारियों को बताया गया था कि वहां नहीं जाने दिया जाएगा।