आगरा में हत्या का खुलासा: लूट के लिए दोस्त बनाकर शोरूम मैनेजर की ली थी जान, दो आरोपी गिरफ्तार
मोती कटरा स्थित सब्जी मंडी निवासी रंजीत खरे 18 अक्तूबर की रात को लापता हो गए थे। 19 अक्तूबर को उनका शव मुरैना में मिला था। शर्ट पर लगे कार शोरूम के टैग से उनकी पहचान हुई थी। उनकी गला रेतकर हत्या की गई थी।
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आगरा के सिकंदरा से लापता कार शोरूम मैनेजर रंजीत खरे की हत्या का शनिवार को पुलिस ने खुलासा कर दिया। दो अभियुक्त अर्जुन और अमन शर्मा को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का दावा है कि इन दोनों ने हत्याकांड को लूट के लिए अंजाम दिया। उन्होंने रंजीत की मदद की थी। इस पर वो उन्हें पार्टी कराने ले जा रहे थे। इसी बीच दोनों आरोपियों ने हत्या कर शव मुरैना में फेंका और कार को फोर्ट स्टेशन के बाहर खड़ी करके भाग गए।
मोती कटरा निवासी रंजीत खरे 18 अक्तूबर की रात को लापता हो गए थे। 19 अक्तूबर को उनकी लाश मुरैना में मिली थी। 20 अक्तूबर को कार आगरा फोर्ट स्टेशन के बाहर खड़ी मिली थी। 22 अक्तूबर को मृतक के भाई सुरजीत खरे ने थाना सिकंदरा में मुकदमा दर्ज कराया। एसएसपी सुधीर कुमार सिंह ने खुलासे के लिए थाना सिकंदरा के प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार सहित टीम को लगाया।
एसएसपी ने बताया कि सिकंदरा स्थित शिवपुरी कालोनी निवासी अर्जुन शर्मा उर्फ सीटू और रोशन विहार कालोनी निवासी अमन शर्मा को गिरफ्तार किया है। दोनों ने लूटपाट के उद्देश्य से हत्याकांड को अंजाम दिया। उनके पास से तमंचा, टोल की पर्ची और रंजीत खरे की चेक बुक बरामद हुई है।
रंजीत के मोबाइल पर आया था एसएमएस
पुलिस ने बताया कि दोनों के बारे में सुराग एक मिस्ड कॉल से मिला था। रंजीत से दोस्ती के समय दोनों ने अपने नंबर का आदान प्रदान किया था। रंजीत ने अपने मोबाइल से अर्जुन के मोबाइल पर कॉल किया था। मगर, अर्जुन का मोबाइल बंद था। उसका मोबाइल चालू होते ही रंजीत के मोबाइल पर एक एमएमएस आया।
यह मैसेज मोबाइल ऑन होने का था। इसी से पुलिस को सुराग मिल गया। यह मैसेज अर्जुन के नंबर की थी। पुलिस ने नंबर को सर्विलांस पर लिया तो अर्जुन की फोटो आ गई। इस पर पुलिस ने अर्जुन को पहचान लिया। वो पहले भी दो हत्या में जेल जा चुका था।
कार की डिकी में रखकर मुरैना ले गए थे शव
पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह 18 अक्तूबर को ककरैठा रोड पर जा रहे थे। तभी एक कार नाले में फंसी मिली। उन्होंने कार निकालने में मदद की। इस पर रंजीत ने दोनों का धन्यवाद दिया। अपना परिचय देते हुए दोस्त भी बना लिया। उन्हें लगा कि रंजीत के पास बहुत पैसा होगा। इस पर उसे लूटने का प्लान बनाया। रंजीत के पार्टी की कहने पर कार में बैठ गए। अर्जुन कार चलाने लगा।
रास्ते में रंजीत के मोबाइल को स्विच ऑफ कर दिया। रुनकता के पास फ्लाईओवर से उतरकर कार और रंजीत की तलाशी लेने लगे। यह देख रंजीत ने विरोध किया। इस पर व्हील पाना से रंजीत के सिर पर प्रहार कर दिए। इससे उसकी मृत्यु हो गई। उसके पास से तकरीबन चार हजार रुपये, पासबुक, चेकबुक गाड़ी के कागजात मिले।
आरोपियों ने चेकबुक और रुपये रख लिए। बाकी सामान फेंक दिया। शव को डिकी में रख लिया। मुरैना में शव फेंकने के बाद वापस आए। फास्टैग भी हटा दिया, जिससे पहचान नहीं हो सके। टोल पर गाड़ी का गलत नंबर बताकर पर्ची कटाई। गाड़ी फोर्ट स्टेशन पर खड़ी कर दी। चाबी को भावना एस्टेट के पास फेंक दिया।
हत्यारोपी अर्जुन ने तीसरी हत्या को दिया अंजाम
एसएसपी ने बताया कि अर्जुन और अमन शर्मा दोस्त है। उन्होंने एक साथ इंटरमीडिएट तक पढ़ाई की है। अर्जुन ने वर्ष 2017 में हत्या की थी। इसके बाद वर्ष 2019 में भी हत्याकांड को अंजाम दिया। वह जेल से छूटकर आया था। अब उसने तीसरी हत्या को अंजाम दिया। उसने हत्या के बाद अपने मोबाइल भी बंद कर लिए थे। अमन का किरावली में बाइक का शोरूम है।
पुलिस के खुलासे से संतुष्ट नहीं रंजीत के परिजन
पुलिस के खुलासे पर रंजीत के घरवालों ने सवाल उठाए हैं। भाई सुरजीत खरे ने बताया कि भाई की कार सैंया और ग्वालियर के पास एक टोल से गुजरी थी। इसके फुटेज उनके पास मौजूद हैं। फुटेज में नजर आ रहा है कि कार में चार लोग सवार हैं। एक युवती भी है। भाई नहीं दिख रहे हैं।
जिन युवकों को पकड़ा है, उन्हें दिखाने के लिए पुलिस ने थाने बुलाया था। युवक हंस-हंस बात कर रहे थे। हत्याकांड की असली वजह को पुलिस ने सामने नहीं लाया है। इस संबंध में उन्होंने एसएसपी सुधीर कुमार सिंह से भी शिकायत की है। पुलिस ने सही आरोपियों को नहीं पकड़ा है। वह इस संबंध में उच्चाधिकारियों से मिलेंगे।