फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Pitru Paksha 2021: First Date Of Pitru Paksha Devotees Came To Tirthnagari Soron For Shradh

पितृ पक्ष: पूर्णिमा तिथि को तीर्थनगरी सोरों में तर्पण करने जुटेंगे श्रद्धालु, हरिपदी के तट करेंगे श्राद्ध

Sat, 18 Sep 2021 02:58 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क,अमर उजाला, कासगंज
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, कासगंज Published by: Abhishek Saxena Updated Sat, 18 Sep 2021 02:58 PM IST
सार

 पौराणिक उल्लेखों के अनुसार भगवान वराह की अवतरणस्थली सूकरक्षेत्र में श्राद्ध कर्म सर्वोपयुक्त माना गया है

विज्ञापन
Pitru Paksha 2021: First Date Of Pitru Paksha Devotees Came To Tirthnagari Soron For Shradh
हरिपदी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तीर्थनगरी में भाद्रपद पूर्णिमा तिथि 20 सितंबर से श्राद्ध तर्पण करने के लिए श्रद्धालु जुटेंगे। सुबह साढे पांच बजे पूर्णिमा तिथि लगने के बाद श्रद्धालु अपने दिवंगत प्रियजनों जिनका निधन पूर्णिमा तिथि को हुआ है उनका श्राद्ध हरिपदी के तट पर करेंगे। 

विज्ञापन

श्राद्ध पक्ष में तीर्थनगरी में प्रतिदिन औसतन तीन से चार हजार श्रद्धालु अपने दिवंगत जनों का अस्थि विसर्जन, पूर्वजों का श्राद्ध व जल तर्पण करने आते हैं। इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। श्रद्धालुओं के साथ साथ तर्पण कराने के लिए तीर्थपुरोहितों ने भी तैयारियां की हैं। तर्पण के लिए आवश्यक सामग्री कुश, काले तिल, चावल, जौ आदि सामग्री का तीर्थपुरोहितों ने पर्याप्त संचय कर लिया है। यूं तो हरिपदी के सभी घाटों पर श्राद्ध तर्पण किया जा सकता है, लेकिन वाराह मंदिर वाले घाट पर पंडित धर्मधर शास्त्री व लक्ष्मण मंदिर घाट पंडित शशिधर शास्त्री विधिविधान पूर्वक पूरे श्राद्ध पक्ष में श्राद्ध एवं तर्पण कर्मकांड कराएंगे। 
विज्ञापन


पितृ ऋण से मुक्त होने को करते हैं तर्पण
श्राद्ध मीमांसा के अनुसार इस मास की प्रतीक्षा हमारे पूर्वज पूरे वर्ष भर करते हैं। वे चंद्रलोक के माध्यम से दक्षिण दिशा में अपनी मृत्यु तिथि पर अपने घर के दरवाजे पर पहुंच जाते हैं। वहां अपना सम्मान पाकर प्रसन्नतापूर्वक अपनी नई पीढ़ी को आशीर्वाद देकर चले जाते हैं। इसलिए पितृ ऋण से मुक्त होने के लिए श्राद्ध काल में पितरों का तर्पण व पूजन किया जाता है। पितृ पक्ष में तीन पीढ़ियों तक के पिता पक्ष के, तथा तीन पीढ़ियों के माता के पक्ष के पूर्वजों को तर्पण किया जाता है। पितृ पक्ष में शुभ कार्य वर्जित रहते हैँ। - पंडित शशिधर शास्त्री, तीर्थ पुरोहित
विज्ञापन
विज्ञापन

 

दिवंगत तृप्त होकर देते हैं आशीष 
सूकरक्षेत्र में हरिपदी किनारे जो श्रद्धालु सत्य व श्रद्धा से श्राद्ध और तर्पण कर्म करते हैं उससे माता पिता, आचार्य व अन्य सभी दिवंगत सगे संबंधी तृप्त हो अपनी संतानों को  खुशहाली का आशीष देते हैं। वेद पुराणानुसार यह श्राद्ध तर्पण हमारे पूर्वज, माता पिता, और आचार्य के प्रति सम्मान का भाव है। पितरों के कल्याणार्थ इन श्राद्ध के दिनों में श्राद्ध अवश्य करना चाहिए। पितरों के लिए श्रद्धा से श्राद्ध करके तिल जौ चावल मिश्रित जल से तर्पण करने से वे तृप्त होते हैं। श्राद्ध का समय दोपहर 12 से एक बजे तक है। पौराणिक उल्लेखों के अनुसार भगवान वराह की अवतरणस्थली सूकरक्षेत्र में श्राद्ध कर्म सर्वोपयुक्त माना गया है। - पंडित भारत किशारे दुबे, तीर्थ पुरोहित। 

आगरा में कोरोना: एक नया संक्रमित मिला, अब तक 17 लाख लोगों की हुई जांच

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed