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मोहब्बत की निशानी ताजमहल ने छीन ली इनकी आजादी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Wed, 24 Jan 2018 04:05 PM IST
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यहां के लोगों को वैकल्पिक रास्ते की दरकार
- फोटो : अमर उजाला
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26 जनवरी, अपने संविधान के प्रति आस्था और विश्वास जताने का दिन। इसको लेकर पूरा देश गणतंत्र दिवस की तैयारियों में लगा है। मगर, विश्व विख्यात ताजमहल के साये में रहने वाले हजारों लोग कुछ मूल अधिकारों के लिए अभी भी जूझ रहे हैं।
एक रास्ते ने उनकी सुविधाओं के सभी रास्ते बंद कर दिए हैं। कोई बीमार पड़ जाए तो मदद को एंबुलेंस नहीं आ सकती। घर में शादी हो तो मेहमान अपने वाहन से नहीं आ सकते। दुल्हन विदा होकर आए तो दरवाजे तक कार से नहीं आ सकती।
बेपनाह मोहब्बत को बयां करने वाली इस अनमोल कृति ने तमाम लोगों की खुशियां छीन ली है। इस गणतंत्र दिवस पर भी दर्जनभर गांव-कॉलोनी के लिए एक ऐसे रास्ते की मांग कर रहे हैं, जिस पर उन्हें आने-जाने की आजादी हो।
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एक रास्ते ने उनकी सुविधाओं के सभी रास्ते बंद कर दिए हैं। कोई बीमार पड़ जाए तो मदद को एंबुलेंस नहीं आ सकती। घर में शादी हो तो मेहमान अपने वाहन से नहीं आ सकते। दुल्हन विदा होकर आए तो दरवाजे तक कार से नहीं आ सकती।
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बेपनाह मोहब्बत को बयां करने वाली इस अनमोल कृति ने तमाम लोगों की खुशियां छीन ली है। इस गणतंत्र दिवस पर भी दर्जनभर गांव-कॉलोनी के लिए एक ऐसे रास्ते की मांग कर रहे हैं, जिस पर उन्हें आने-जाने की आजादी हो।
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पूरी दुनियां को अपनी संगमरमरी चमक से मुरीद बनाने वाले ताजमहल ने आसपास रहने वाले लोगों की जिंदगी मुहाल कर दी है। एक वैकल्पिक मार्ग के अभाव में दशहरा घाट से जाने वाले रास्ते के लगभग दर्जनभर गांव और कॉलोनी के लोगों को चंद कदमों की दूरी 12 किमी का चक्कर काटकर पूरी करनी पड़ रही है।
14 नवंबर 2000 को सुप्रीम कोर्ट ने आईए 112 वाद संख्या 1381/84 (एमसी मेहता बनाम यूनियन ऑफ इंडिया) की सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि ताजमहल के 500 मीटर दायरे में बाहरी वाहनों के प्रवेश पर शिकंजा कसा जाए।
इसके लिए 500 मीटर दायरे में रहने वाले लोगों के वाहन चिह्नित कर उन्हें विशेष पास जारी किए जाएं। यह आदेश ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के मद्देनजर दिया गया।
14 नवंबर 2000 को सुप्रीम कोर्ट ने आईए 112 वाद संख्या 1381/84 (एमसी मेहता बनाम यूनियन ऑफ इंडिया) की सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि ताजमहल के 500 मीटर दायरे में बाहरी वाहनों के प्रवेश पर शिकंजा कसा जाए।
इसके लिए 500 मीटर दायरे में रहने वाले लोगों के वाहन चिह्नित कर उन्हें विशेष पास जारी किए जाएं। यह आदेश ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के मद्देनजर दिया गया।
दशहरा घाट से होकर गुजरता है रास्ता
ताजमहल
इस आदेश के बाद अहमद बुखारी, नगला पैमा, धांधूपुरा, नगला टीन, कर्बला, गढ़ी बंगस, नगला तुलसी, राजीव नगर, वासुदेव नगर, फॉरेस्ट कॉलोनी, जालमा कुष्ठ आश्रम क्षेत्र में रहने वाले लोगों की मुश्किल बढ़ गईं।
दरअसल, इन सभी क्षेत्रों का रास्ता ताज के दशहरा घाट से होकर गुजरता है, जो कि 500 मीटर के दायरे में है। ऐसे में बाहरी लोग इस रास्ते से अपने वाहन नहीं ला सकते। इसके चलते जरूरत पड़ने पर इन क्षेत्रों में न तो एंबुलेंस आ पाती।
न ही रिश्तेदारों के वाहन। क्षेत्रीय लोगों को बीमार व्यक्ति को अपने संसाधन से ही इस दायरे से बाहर लाना पड़ता है। दशहरा घाट रोड पर सख्ती के चलते क्षेत्रीय लोग करबना-धांधुपुरा रोड से होकर शिल्पग्राम तक पहुंचते हैं।
यहां से शहर की ओर निकल जाते हैं। यह रास्ता लगभग 12 किमी लंबा पड़ता है, जबकि दशहरा घाट रोड की ओर से बमुश्किल चंद कदम की दूरी पर ताजगंज बाजार शुरू हो जाता है।
दरअसल, इन सभी क्षेत्रों का रास्ता ताज के दशहरा घाट से होकर गुजरता है, जो कि 500 मीटर के दायरे में है। ऐसे में बाहरी लोग इस रास्ते से अपने वाहन नहीं ला सकते। इसके चलते जरूरत पड़ने पर इन क्षेत्रों में न तो एंबुलेंस आ पाती।
न ही रिश्तेदारों के वाहन। क्षेत्रीय लोगों को बीमार व्यक्ति को अपने संसाधन से ही इस दायरे से बाहर लाना पड़ता है। दशहरा घाट रोड पर सख्ती के चलते क्षेत्रीय लोग करबना-धांधुपुरा रोड से होकर शिल्पग्राम तक पहुंचते हैं।
यहां से शहर की ओर निकल जाते हैं। यह रास्ता लगभग 12 किमी लंबा पड़ता है, जबकि दशहरा घाट रोड की ओर से बमुश्किल चंद कदम की दूरी पर ताजगंज बाजार शुरू हो जाता है।
देखते ही देखते बंद हो गया रास्ता
गढ़ी बंगस निवासी 70 वर्षीय लाखन सिंह का जन्म यहीं हुआ। बचपन से बुढ़ापे तक का सफर ताज के साये में ही तय किया है। वे बताते हैं, पहले कोई रोकटोक नहीं थी। सभी दशहरा घाट रोड से आया-जाया करते थे।
मगर, कई साल पहले बैरियर लगाकर पुलिसकर्मी बैठा दिए और आवागमन बंद कर दिया। लाखन कहते हैं, देखते ही देखते हमारा ताज हमसे दूर हो गया। इतने नजदीक होकर भी हमें 12 किमी का चक्कर काटकर आना पड़ता है।
एक घटना को याद करते हुए कहते हैं कि एक गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना था। मगर, एंबुलेंस को यहां नहीं आने दिया। इसके चलते महिला को पैदल ही 500 मीटर दायरे के बाहर तक ले जा रहे थे, इसी बीच रास्ते में उसे प्रसव पीड़ा हुई और सड़क किनारे ही बच्चे को जन्म दिया।
मगर, कई साल पहले बैरियर लगाकर पुलिसकर्मी बैठा दिए और आवागमन बंद कर दिया। लाखन कहते हैं, देखते ही देखते हमारा ताज हमसे दूर हो गया। इतने नजदीक होकर भी हमें 12 किमी का चक्कर काटकर आना पड़ता है।
एक घटना को याद करते हुए कहते हैं कि एक गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना था। मगर, एंबुलेंस को यहां नहीं आने दिया। इसके चलते महिला को पैदल ही 500 मीटर दायरे के बाहर तक ले जा रहे थे, इसी बीच रास्ते में उसे प्रसव पीड़ा हुई और सड़क किनारे ही बच्चे को जन्म दिया।
रास्ता खुला नहीं देखा
ताज महल
- फोटो : ANI
अहमद बुखारी निवासी 22 वर्षीय मोहम्मद वकील का कहना है कि उसका जन्म यहीं हुआ। जब से उसने होश संभालना है, उसने दशहरा घाट पर बाहरी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित ही देखा है।
वह कहता है कि हम साइकिल से तो रास्ते पर आ-जा सकते हैं, लेकिन मोटर साइकिल और कार ले जाना आसान नहीं है। जलेसर निवासी निर्मला मंगलवार को गढ़ी बंगस निवासी अपने रिश्तेदार के यहां आई थीं। वे
बस स्टैंड से ताजगंज तक तो ऑटो रिक्शा से आईं, लेकिन इससे आगे वाहन आने की अनुमति नहीं थी। इसलिए उन्हें लगभग दो किमी पैदल चलकर आना पड़ा है। वे कहती हैं कि सालों से यही समस्या झेल रही हैं। अब तक ज्यादा दिक्कत नहीं थी, लेकिन अब बढ़ती उम्र में इतना पैदल चलना मुश्किल होता है। इसलिए कम आती-जाती हैं।
वह कहता है कि हम साइकिल से तो रास्ते पर आ-जा सकते हैं, लेकिन मोटर साइकिल और कार ले जाना आसान नहीं है। जलेसर निवासी निर्मला मंगलवार को गढ़ी बंगस निवासी अपने रिश्तेदार के यहां आई थीं। वे
बस स्टैंड से ताजगंज तक तो ऑटो रिक्शा से आईं, लेकिन इससे आगे वाहन आने की अनुमति नहीं थी। इसलिए उन्हें लगभग दो किमी पैदल चलकर आना पड़ा है। वे कहती हैं कि सालों से यही समस्या झेल रही हैं। अब तक ज्यादा दिक्कत नहीं थी, लेकिन अब बढ़ती उम्र में इतना पैदल चलना मुश्किल होता है। इसलिए कम आती-जाती हैं।
शादी करने से कतरा रहे लड़की वाले
इन क्षेत्रों में आने-जाने की समस्या को देखते हुए तमाम लोग अपनी बेटी का इस क्षेत्र के युवक के साथ विवाह करने से बच रहे हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि इस समस्या के चलते कई युवकों के संबंध तय होने के बाद भी टूट गए।
साल 2006 में ताजमहल पूर्वी गेट पर पाठक प्रेस के सामने नाले के ऊपर से वैकल्पिक मार्ग बनाए जाना प्रस्तावित किया गया। ताज खेमा होटल के पास यह मार्ग अंडरपास के जरिये नगला पैमा जाने वाली सड़क में मिल जाना था।
मगर, एडीए अधिकारियों ने पाठक प्रेस पर वैकल्पिक मार्ग तो नहीं बनाया, लेकिन दो किलोमीटर दूर धांधूपुरा के पास एक कच्चे रास्ते को पक्का करके वैकल्पिक मार्ग की फाइल बंद कर दी।
साल 2006 में ताजमहल पूर्वी गेट पर पाठक प्रेस के सामने नाले के ऊपर से वैकल्पिक मार्ग बनाए जाना प्रस्तावित किया गया। ताज खेमा होटल के पास यह मार्ग अंडरपास के जरिये नगला पैमा जाने वाली सड़क में मिल जाना था।
मगर, एडीए अधिकारियों ने पाठक प्रेस पर वैकल्पिक मार्ग तो नहीं बनाया, लेकिन दो किलोमीटर दूर धांधूपुरा के पास एक कच्चे रास्ते को पक्का करके वैकल्पिक मार्ग की फाइल बंद कर दी।