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UP: क्लीनिक में बेहोश हुए बुजुर्ग...चिकित्सक के सामने बैठे-बैठे गिर गए, सीपीआर देकर बचाई जान; देखें वीडियो
Tue, 01 Jul 2025 10:32 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Tue, 01 Jul 2025 10:32 PM IST
सार
आगरा में चिकित्सक को दिखाने क्लीनिक पर पहुंचे बुजुर्ग अचानक से बेहोश हो गए। चिकित्सक ने उन्हें तत्काल सीपीआर देकर जान बचाई। इसका वीडियो भी सामने आया है।
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सीपीआर देते डाॅक्टर।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
आगरा के कोठी मीना बाजार स्थित एक निजी क्लीनिक में 75 वर्षीय वृद्ध हृदयघात से बेहोश हो गए। यह देखकर डाॅ. हिमांशु यादव ने सीपीआर दी। इससे मरीज को होश आ गया। मरीज की जान बचाते चिकित्सक का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
कोठी मीना बाजार स्थित गजानन नगर में डाॅ. हिमांशु यादव का क्लीनिक है। उन्होंने बताया कि 4 दिन पहले 75 वर्षीय मरीज को परिवार के लोग लेकर आए थे। वह उनके सामने कुर्सी पर बैठे थे। वह पर्चा बनाने लगे। तभी मरीज कुर्सी पर बैठे-बैठे गिर गए। यह देखकर वह दाैड़े। सीपीआर देने लगे। सीने को 8 से 10 बार दबाया। इससे मरीज को होश आ गया। बाद में उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां समय पर पेसमेकर देने की वजह से जान बच गई।
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कोठी मीना बाजार स्थित गजानन नगर में डाॅ. हिमांशु यादव का क्लीनिक है। उन्होंने बताया कि 4 दिन पहले 75 वर्षीय मरीज को परिवार के लोग लेकर आए थे। वह उनके सामने कुर्सी पर बैठे थे। वह पर्चा बनाने लगे। तभी मरीज कुर्सी पर बैठे-बैठे गिर गए। यह देखकर वह दाैड़े। सीपीआर देने लगे। सीने को 8 से 10 बार दबाया। इससे मरीज को होश आ गया। बाद में उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां समय पर पेसमेकर देने की वजह से जान बच गई।
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मरीज को चक्कर आने के साथ हो सकती है बेहोशी
चिकित्सक ने बताया कि मरीज का हृदय पूरी तरह से ब्लाॅकेज था। इस स्थिति में कभी मरीज को चक्कर आ सकते हैं। धड़कन बंद हो जाती है। बेहोशी आ जाती है। मस्तिष्क को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। इस मामले में भी मरीज हृदय के ब्लाकेज से जूझ रहे थे। अगर, समय पर इलाज नहीं मिलता तो स्थिति खराब हो सकती थी।
ये भी पढ़ें-UP: मायके से नहीं आई पत्नी...फ्लाईओवर पर चढ़ गया युवक, पुलिस ने ऐसे बचाई जान; देखें वीडियो
चिकित्सक ने बताया कि मरीज का हृदय पूरी तरह से ब्लाॅकेज था। इस स्थिति में कभी मरीज को चक्कर आ सकते हैं। धड़कन बंद हो जाती है। बेहोशी आ जाती है। मस्तिष्क को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। इस मामले में भी मरीज हृदय के ब्लाकेज से जूझ रहे थे। अगर, समय पर इलाज नहीं मिलता तो स्थिति खराब हो सकती थी।
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