फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Parents Under Pressure: Schools Changing Books Every Year, Raising Cost Burden

गजब: कुछ पन्ने बदले और बन गई नई किताब, इस तरह अभिभावकों की कट रही जेब; स्कूल फीस बढ़ने का भी डर

Fri, 27 Mar 2026 10:00 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Fri, 27 Mar 2026 10:00 AM IST
सार

नए सत्र के साथ स्कूलों द्वारा हर साल किताबें बदलने और फीस बढ़ोतरी की आशंका से अभिभावक परेशान हैं, जिससे शिक्षा पर खर्च लगातार बढ़ रहा है। अधिकारियों ने ऐसे स्कूलों पर कार्रवाई की चेतावनी दी है, जो नियमों के खिलाफ जाकर अभिभावकों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं।

विज्ञापन
Parents Under Pressure: Schools Changing Books Every Year, Raising Cost Burden
संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) डॉ. मुकेश अग्रवाल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

स्कूलों में नए शैक्षिक सत्र की घंटी बजते ही बच्चों के चेहरों पर जहां नई कक्षा में जाने की खुशी है, वहीं अभिभावकों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। शिक्षा के मंदिर अब व्यापारिक केंद्रों में तब्दील होते दिख रहे हैं, जहां अभिभावकों का खुलेआम शोषण हो रहा है। स्कूलों में हर साल किताबों की नई लिस्ट जारी की जाती है, जिससे विगत सत्र में पढ़ाई गई किताबें रद्दी हो जाती हैं। वहीं, स्कूलों से फीस बुक भी नहीं दी गई है। ज्यादातर अभिभावक फीस में वृद्धि की आशंका से भी परेशान हैं।
विज्ञापन


शिक्षा के नाम पर यूनिफॉर्म, कॉपी-किताब, स्टेशनरी से लेकर कॉपी-किताबों के कवर तक हर चीज में सौदेबाजी की जा रही है। स्कूल संचालक सबसे बड़ा खेल किताबों में करते हैं। सिलेबस में बदलाव के नाम पर हर साल नए प्रकाशक की किताब लगा दी जाती हैं। इसमें भी कुछ तयशुदा प्रकाशक स्कूलवार सेट हैं। दर साल इन्हीं की किताबें लगाई जाती हैं। हालांकि सिलेबस में कोई अंतर नहीं होता, बस पाठों का क्रम बदल दिया जाता है। कुछ पाठों की एक्सरसाइज बदल दी जाती हैं तो कुछ के चित्र और अंदर की हेडिंग्स। इसके अलावा दो से चार साल के भीतर ही उन्हीं प्रकाशकों की किताबें दोबारा लगा दी जाती हैं।
विज्ञापन


एक ही ग्रुप के स्कूलों और एक ही स्कूल की शाखाओं में भी इसी प्रकार किताबें बदलने का खेल संचालित हैं। न्यू आगरा निवासी स्मिता बताती है कि उनके बेटे ने चार साल पहले शहर के प्रतिष्ठित कॉन्वेंट स्कूल से 9वीं परीक्षा दी थी। इस साल उनकी बेटी 9वीं में आई हैं। दोनों की किताबों का कंटेंट में कोई अंतर नहीं है। कमला नगर निवासी रश्मि बताती हैं कि उनकी छोटी बेटी कक्षा 6 में आई है, जबकि बड़ी कक्षा 9 में। जब बड़ी बहन ने छोटी की किताबें देखीं तो उसमें भी सभी पाठ, और पाठ्य सामग्री एक समान थी। बस किताबों के कवर और प्रकाशक बदले हुए हैं। इसके अलावा अंग्रेजी साहित्य की किताब का प्रकाशक बदला हुआ है। खंदारी निवासी भावना बताती हैं कि उनकी मित्र की बेटी ने जब उनके बेटे की किताबें देखीं तो उसमें भी पाठ्य सामग्री एकदम समान थी। बस पाठ के पीछे की एक्सरसाइज को बदल दिया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


कम से कम पांच साल न बदली जाएं किताबें
अधिकांश अभिभावक चाहत हैं कि स्कूलों में किताबें कम से कम पांच साल तक न बदली जाएं। इससे एक ही परिवार के बच्चे कम से कम अपने भई बहनों की किताबें इस्तेमाल कर सकेंगे। पश्चिमपुरी निवासी ललित बताते हैं कि उन्होंने कक्षा एक से लेकर 12वीं तक अपने भाई की किताबों से पढ़ाई की। कहते हैं छोटा होने के कारण साल दर साल सिर्फ उन्होंने ही नहीं बल्कि उनसे बड़े और भाई और छोटी बहन ने भी उन्हीं किताबों से पढ़ाई की जिनसे सबसे बड़े भाई ने पढ़ाई की थी।


सिर्फ स्कूल ही नहीं नपेंगे संबंधित अधिकारी
मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक माध्यमिक डॉ. मुकेश अग्रवाल बताते हैं उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षक और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को ऐसे विद्यालयों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई और जनपद स्तरीय कमेटी के माध्यम से ऐसे विद्यालयों की अनापत्ति (एनओसी) प्रमाणपत्र और मान्यता समाप्ति के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजने के निर्देश दिए हैं। स्पष्ट किया कि जिन क्षेत्रों के स्कूलों की शिकायतें हैं और संबंधित अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, ऐसे अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए वे शासन को पत्र लिखेंगे।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed