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डेयरी का होता संचालन तो 20 हजार पशुपालकों को मिलता लाभ
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मैनपुरी। छाछा स्थित पराग डेयरी के बंद हो जाने से क्षेत्र के हजारों किसानों को झटका लगा। अचानक दूध की बिक्री बंद हो जाने से पशुपालकों को नुकसान उठाना पड़ा। धीरे-धीर पशुपालकों ने पशुओं की संख्या घटा दी, जिससे उत्पादन भी घट गया। अगर डेयरी का संचालन होता रहता तो बीस हजार पशुपालकों को इस लाभ मिलता रहता।
12 साल पहले वर्ष 2008 में पराग डेयरी प्लांट बंद कर दिया गया। इससे आसपास के 50 से अधिक गांवों के पशुपालकों के दूध की बिक्री रुक गई। दूध उत्पादन कर बिक्री के लिए जिन पशुपालकों ने पशु पाल रखे थे, उन्हें ये पशु मजबूरी में बेचने पड़े। एक ओर जहां सरकारें किसानों की आय दोगुनी करने की बात कह रही हैं, तो वहीं बंद पड़ी पराग डेयरी को चालू कराने के लिए कोई पहल नहीं की गई।
वर्तमान में कुछ निजी डेयरियों द्वारा कलेक्शन सेंटर पर दूध की खरीद की जा रही है, लेकिन यहां किसानों को मनमानी कीमत पर दूध बेचना पड़ रहा है। अगर पराग डेयरी शुरू हो जाए तो फिर एक बार दूध के उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ
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मात्रा को लेकर भी होता है नुकसान
दूध की बिक्री करने वाले पशुपालकों को निजी डेयरी कम दामों के साथ-साथ मात्रा में भी नुकसान पहुंचा रही हैं। दरअसल निजी डेयरियों द्वारा दूध की मात्रा एक किलोग्राम में ली जाती है। जबकि पराग डेयरी द्वारा लीटर के हिसाब से दूध ही लिया जाता था। ऐसे में पशुपालकों को दस प्रतिशत का नुकसान उठाना पड़ता है।
हाईलाइर्टस
-86469 हैं जिले में गोवंशीय पशु
-4.65 लाख हैं महिषवंशीय पशु
-16725 हैं भेड़ें
-24189 हैं बकरियां
बोले पशुपालक
पराग डेयरी की गाड़ी द्वारा गांव-गांव जाकर दूध लिया जाता था। इसके लिए हर गांव में व्यक्ति निर्धारित थे, लेकिन सालों से डेयरी बंद होने से किसानों के लिए मुश्किल खड़ी हो गई।
सुधीर शाक्य
जब किसान पराग डेयरी को दूध बेचते थे तो प्रत्येक सप्ताह उन्हें रुपये दिए जाते थे। वहीं निजी डेयरियों की अगर बात करें इनके रुपये देने का कोई भी समय निर्धारित नहीं है।
जनमेश प्रजापति।
सरकार किसानों को लगातार खेती और पशुपालन के लिए प्रेरित कर रही है लेकिन जब दूध की बिक्री ही नहीं होगी तो किसानों को पशु पालने से क्या लाभ होगा। इस पर ध्यान देना चाहिए।
अवधेश शाक्य।
प्रशासन और सरकार को बंद पड़ी पराग डेयरी शुरू करानी चाहिए। अगर डेयरी शुरू हो जाएगी तो आसपास के गांवों के किसानों को लाभ होगा और उनकी आय भी बढ़ेगी।
धर्मेंद्र राजपूत।
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12 साल पहले वर्ष 2008 में पराग डेयरी प्लांट बंद कर दिया गया। इससे आसपास के 50 से अधिक गांवों के पशुपालकों के दूध की बिक्री रुक गई। दूध उत्पादन कर बिक्री के लिए जिन पशुपालकों ने पशु पाल रखे थे, उन्हें ये पशु मजबूरी में बेचने पड़े। एक ओर जहां सरकारें किसानों की आय दोगुनी करने की बात कह रही हैं, तो वहीं बंद पड़ी पराग डेयरी को चालू कराने के लिए कोई पहल नहीं की गई।
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वर्तमान में कुछ निजी डेयरियों द्वारा कलेक्शन सेंटर पर दूध की खरीद की जा रही है, लेकिन यहां किसानों को मनमानी कीमत पर दूध बेचना पड़ रहा है। अगर पराग डेयरी शुरू हो जाए तो फिर एक बार दूध के उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ
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मात्रा को लेकर भी होता है नुकसान
दूध की बिक्री करने वाले पशुपालकों को निजी डेयरी कम दामों के साथ-साथ मात्रा में भी नुकसान पहुंचा रही हैं। दरअसल निजी डेयरियों द्वारा दूध की मात्रा एक किलोग्राम में ली जाती है। जबकि पराग डेयरी द्वारा लीटर के हिसाब से दूध ही लिया जाता था। ऐसे में पशुपालकों को दस प्रतिशत का नुकसान उठाना पड़ता है।
हाईलाइर्टस
-86469 हैं जिले में गोवंशीय पशु
-4.65 लाख हैं महिषवंशीय पशु
-16725 हैं भेड़ें
-24189 हैं बकरियां
बोले पशुपालक
पराग डेयरी की गाड़ी द्वारा गांव-गांव जाकर दूध लिया जाता था। इसके लिए हर गांव में व्यक्ति निर्धारित थे, लेकिन सालों से डेयरी बंद होने से किसानों के लिए मुश्किल खड़ी हो गई।
सुधीर शाक्य
जब किसान पराग डेयरी को दूध बेचते थे तो प्रत्येक सप्ताह उन्हें रुपये दिए जाते थे। वहीं निजी डेयरियों की अगर बात करें इनके रुपये देने का कोई भी समय निर्धारित नहीं है।
जनमेश प्रजापति।
सरकार किसानों को लगातार खेती और पशुपालन के लिए प्रेरित कर रही है लेकिन जब दूध की बिक्री ही नहीं होगी तो किसानों को पशु पालने से क्या लाभ होगा। इस पर ध्यान देना चाहिए।
अवधेश शाक्य।
प्रशासन और सरकार को बंद पड़ी पराग डेयरी शुरू करानी चाहिए। अगर डेयरी शुरू हो जाएगी तो आसपास के गांवों के किसानों को लाभ होगा और उनकी आय भी बढ़ेगी।
धर्मेंद्र राजपूत।