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यूपी का ऐसा थाना, जहां 19 साल में दर्ज हुईं महज दो एफआईआर, पुलिस विभाग भी है हैरान
Wed, 11 Sep 2019 12:17 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, एटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, एटा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Wed, 11 Sep 2019 12:17 AM IST
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जीआरपी थाना एटा
- फोटो : अमर उजाला
प्रदेश भर में जरायम के लिए कुख्यात एटा जिले में ऐसा भी एक थाना है, जहां 19 साल में मात्र दो एफआईआर दर्ज हुई हैं। 16 साल तक थाने की जीडी में एक भी शिकायत दर्ज नहीं की गई। इसको लेकर पुलिस विभाग भी हैरान है कि आखिर ऐसा कैसे होता रहा? हालांकि जीआरपी थाना पूरी तरह से शांतप्रिय माहौल होने का दावा कर रहा है।
एटा की रेलवे कॉलोनी स्थित जीआरपी थाने की स्थापना वर्ष 2001 में हुई थी। इससे पहले तक एटा जिले में जीआरपी की चौकी रही। एटा से टूंडला तक चलने वाली पैसेंजर ट्रेन की सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारी पहले चार सिपाहियों के जिम्मे थी। हालांकि थाना बनने के बाद यहां एक प्रभारी, एक हेड कांस्टेबिल सहित आठ कर्मियों की तैनाती कर दी गई।
थाने का संचालन होने के बाद से वर्ष 2016 तक थाने में रखी जीडी पूरी तरह से खाली पड़ी रही। लंबे समय तक जीआरपी थाना पर एक भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई। वर्ष 2016 में ट्रेन की बोगी में एक शव मिला। इसके बाद एक एफआईआर दर्ज हो सकी। हालांकि मामले में बाद में एफआर लगा दी गई।
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एटा की रेलवे कॉलोनी स्थित जीआरपी थाने की स्थापना वर्ष 2001 में हुई थी। इससे पहले तक एटा जिले में जीआरपी की चौकी रही। एटा से टूंडला तक चलने वाली पैसेंजर ट्रेन की सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारी पहले चार सिपाहियों के जिम्मे थी। हालांकि थाना बनने के बाद यहां एक प्रभारी, एक हेड कांस्टेबिल सहित आठ कर्मियों की तैनाती कर दी गई।
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थाने का संचालन होने के बाद से वर्ष 2016 तक थाने में रखी जीडी पूरी तरह से खाली पड़ी रही। लंबे समय तक जीआरपी थाना पर एक भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई। वर्ष 2016 में ट्रेन की बोगी में एक शव मिला। इसके बाद एक एफआईआर दर्ज हो सकी। हालांकि मामले में बाद में एफआर लगा दी गई।
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2019 में दर्ज हुई दूसरी रिपोर्ट
इसके बाद वर्ष 2019 में कुछ अराजक तत्वों ने गेटमैन के साथ मारपीट की तो थाने में दूसरी एफआईआर दर्ज हुई। एटा जिला अपराध ग्रस्त की सूची में शामिल है अथवा लोगों की ऐसी धारणा भी है। लेकिन थाने की जीडी साबित कर रही है कि एटा पर लगाए जाते रहे आरोप और दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
एटा जीआरपी थाना की पुलिस एटा और आगरा बॉर्डर की अंतिम स्टेशन बरहन तक निगरानी करता है। एटा जिले की शाह नगर टिमरूआ स्टेशन अंतिम स्टेशन है। जीआरपी के दो सिपाही ट्रेन के साथ जाते हैं, जो ट्रेन ले जाने और लाने का कार्य करते हैं। थाने की स्थापना होने के बाद से ट्रेन में अब तक किसी भी तरह की लूट चोरी की वारदात तक नहीं हुई है।
जीआरपी थाना प्रभारी प्रताप सिंह ने बताया कि इस जीआरपी थाने की स्थापना वर्ष 2001 में हुई थी, वर्ष 2016 में एक एफआईआर हुई इसके बाद वर्ष 2019 में दूसरी एफआईआर दर्ज हुई है। थाना पर आठ पुलिस कर्मी तैनात हैं, दो सिपाही प्रत्येक यात्री ट्रेन के साथ आते-जाते हैं। छोटी बड़ी आठ स्टेशनों का जिम्मा थाना पर है इसको बखूबी निभाया जा रहा है।
एटा जीआरपी थाना की पुलिस एटा और आगरा बॉर्डर की अंतिम स्टेशन बरहन तक निगरानी करता है। एटा जिले की शाह नगर टिमरूआ स्टेशन अंतिम स्टेशन है। जीआरपी के दो सिपाही ट्रेन के साथ जाते हैं, जो ट्रेन ले जाने और लाने का कार्य करते हैं। थाने की स्थापना होने के बाद से ट्रेन में अब तक किसी भी तरह की लूट चोरी की वारदात तक नहीं हुई है।
जीआरपी थाना प्रभारी प्रताप सिंह ने बताया कि इस जीआरपी थाने की स्थापना वर्ष 2001 में हुई थी, वर्ष 2016 में एक एफआईआर हुई इसके बाद वर्ष 2019 में दूसरी एफआईआर दर्ज हुई है। थाना पर आठ पुलिस कर्मी तैनात हैं, दो सिपाही प्रत्येक यात्री ट्रेन के साथ आते-जाते हैं। छोटी बड़ी आठ स्टेशनों का जिम्मा थाना पर है इसको बखूबी निभाया जा रहा है।