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ऑनलाइन शिकायत सिस्टम फेल, विश्वविद्यालय की कमी का खामियाजा भुगत रहे छात्र
Tue, 04 Feb 2020 10:17 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 04 Feb 2020 10:17 AM IST
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में शिकायत निस्तारण के लिए ऑनलाइन सिस्टम फेल हो गया है। यहां आवेदन के बाद भी समाधान नहीं हो पा रहा है। इसके कारण शिकायत प्रकोष्ठ और कुलसचिव कार्यालय पर छात्र-छात्राओं की भीड़ लगी हुई है।
विश्वविद्यालय में मार्कशीट में त्रुटियां, डिग्री, प्रोविजनल मार्कशीट-डिग्री, माइग्रेशन, मार्कशीट-डिग्री सत्यापन आदि के लिए ऑनलाइन पोर्टल की व्यवस्था की गई है। इसमें आवेदन के सात दिन में समाधान का दावा किया जा रहा है, लेकिन यहां लंबे समय तक इन शिकायतों की सुनवाई नहीं होती और न ही इसकी जानकारी विद्यार्थियों को दी जाती। इससे दूरदराज के छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय पहुंच रहे हैं।
इस तरह से रोजाना 350 से अधिक प्रार्थनापत्र मैनुअल आ रहे हैं। मैनपुरी के दिनेश राजपूत ने बताया कि अपनी बहन की बीए की मार्कशीट में पिता के नाम में गड़बड़ी की समस्या ठीक कराने के लिए आवेदन किए डेढ़ महीना हो गया, कोई सुनवाई न होने पर यहां आना पड़ा।
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माईथान के हर्षित बघेल ने बताया कि पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत की मानीटरिंग नहीं की जाती, यहां आने पर भी पोर्टल पर देखने को कहा गया, मजबूरी में अधिकारियों को प्रार्थनापत्र देना पड़ा है।
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विश्वविद्यालय में मार्कशीट में त्रुटियां, डिग्री, प्रोविजनल मार्कशीट-डिग्री, माइग्रेशन, मार्कशीट-डिग्री सत्यापन आदि के लिए ऑनलाइन पोर्टल की व्यवस्था की गई है। इसमें आवेदन के सात दिन में समाधान का दावा किया जा रहा है, लेकिन यहां लंबे समय तक इन शिकायतों की सुनवाई नहीं होती और न ही इसकी जानकारी विद्यार्थियों को दी जाती। इससे दूरदराज के छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय पहुंच रहे हैं।
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इस तरह से रोजाना 350 से अधिक प्रार्थनापत्र मैनुअल आ रहे हैं। मैनपुरी के दिनेश राजपूत ने बताया कि अपनी बहन की बीए की मार्कशीट में पिता के नाम में गड़बड़ी की समस्या ठीक कराने के लिए आवेदन किए डेढ़ महीना हो गया, कोई सुनवाई न होने पर यहां आना पड़ा।
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माईथान के हर्षित बघेल ने बताया कि पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत की मानीटरिंग नहीं की जाती, यहां आने पर भी पोर्टल पर देखने को कहा गया, मजबूरी में अधिकारियों को प्रार्थनापत्र देना पड़ा है।