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आगराः अब एक ही कब्र में दफन होगा एक परिवार, ये है वजह
Thu, 25 Jul 2019 12:31 PM IST
दुष्यंत शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 25 Jul 2019 12:31 PM IST
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graveyard
ईसाई समाज की संस्था आगरा ज्वाइंट्स सिमेट्रीज कमेटी (एजेएससी) ने फैसला लिया है कि अब एक ही परिवार के सभी सदस्यों को एक ही कब्र में दफनाया जाएगा। इसके लिए कब्र को गहराई तक खोदा जाएगा।
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एक सदस्य को दफनाने के बाद स्लैब डाला जाएगा। इसी तरह से एक -एक कर सदस्यों को दफनाया जाएगा। यह फैसला कब्रिस्तानों में पड़ रही जमीन की कमी के कारण लिया गया है। दूसरी वजह जिंदगी के बाद भी परिवार को एक ही जगह रखना बताई जा रही है।
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कमेटी के चेयरमैन फादर मून लाजरस, पादरी जिब्राइल दास, पादरी ज्योति सिंह, बिशप पीपी हाबिल, फादर राजन, फादर स्टीफन ने बैठक कर यह फैसला हाल ही में लिया गया है। अब गिरजाघरों में प्रार्थना के लिए आने वाले लोगों को इसके बारे में जानकारी दी जा रही है। इस कमेटी के अंतर्गत गोरों का कब्रिस्तान और तोता का ताल पर बना कब्रिस्तान आता है।
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हमारा मकसद कब्रिस्तान की जमीन में उन लोगों को सम्मान के साथ स्थान देना है, जो इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं। जमीन की कमी के कारण यह फैसला लिया गया है। प्रार्थना सभा में लोगों को इसका महत्व समझाया जा रहा है। समाज के लोगों को समझ भी आ रहा है।
फादर मून लाजरस - चेयरमैन, आगरा ज्वाइंट्स सिमेट्रीज कमेटी
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दक्षिण भारत में पहले से किया जा रहा ऐसा
दक्षिण भारत के कई शहरों में एक कब्र में एक परिवार को दफनाने का सिलसिला चल रहा है। एजेसीसी के चेयरमैन मून लाजरस का कहना है कि वहां लोगों को इस बात का भी सुकून है कि जो परिवार जिंदगी भर साथ-साथ रहा, दुनिया छोड़़ने के बाद भी वह परिवार एक ही कब्र में हमेशा के लिए सुकून की नींद सो रहा है।
पुरानी कब्रों में भी दफनाए जाएंगे शव
कब्रिस्तानों में कई दशकों पुरानी उन कब्रों को खोला जा रहा है, जिन कब्रों पर दशकों से कोई भी मोमबत्ती जलाने तक नहीं आया है। कमेटी का कहना है कि इस कोशिश से नए शवों को दफनाने के लिए स्थान मिल रहा है। इसके लिए कमेटी पूरी तरह से निगरानी रखती है। कब्र का पूरा ब्योरा मिलने के बाद कब्र की छानबीन करने के बाद ही उसे खोला जाता है। इस तरह जमीन की कमी के कारण शवों को दफनाने में आने वाली दिक्कत को दूर करने की कोशिश की जा रही है।
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