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घर वापसी की राह पर अंजुला माहौर
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Tue, 12 May 2015 01:54 AM IST
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भाजपा का दामन छोड़कर साइकिल की सवारी करने वाली पूर्व मेयर अंजुला माहौल क्या घर वापसी की राह पर हैं? यह सवाल निकला है सोमवार को होटल वैभव पैलेस में आयोजित नारज जयंती के कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी से। दरअसल, यह कार्यक्रम विश्व संवाद केन्द्र का था, जिसमें आरएसएस के बड़े नेता मौजूद थे। इसमें अंजुला के पहुंचते ही अटकलबाजी शुरू हो गई कि क्या वह भाजपा में वापसी की राह पर चल पड़ी हैं?
दरअसल, ये बातें पहले से ही चल रही थी कि सपा में अंजुला माहौर को कुछ परेशानी हो रही है। उनसे लालबत्ती छिनने के बाद ही कयास लगने शुरू हो गए थे कि वे साईकिल की सवारी करती रहेंगी या फिर कोई और फैसला लेंगी। इस बीच उनकी आरएसएस नेताओं के साथ कार्यक्रम में मौजूदगी ने अटकलों को पंख लगा दिए।
दरअसल हुआ यूं कि दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री रह चुकीं अंजुला सिंह माहौर होटल वैभव में एक महिला संगठन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने गई थीं। इसी होटल के एक हॅाल में विश्व संवाद केंद्र, ब्रज प्रांत की ओर से आयोजित नारद जयंती का कार्यक्रम चल रहा था। इस कार्यक्रम में महानगर संघ चालक विजय गोयल, राम संघ चालक हरीशंकर, पूर्वी पश्चिमी क्षेत्र के प्रचार प्रमुख कृपा शंकर, क्षेत्र व्यवस्था प्रमुख ललित, ब्रज प्रांत प्रचारक दिनेश, विधायक जगन प्र्रसाद गर्ग भी मौजूद थे। कहा तो यह जा रहा है कि अंजुला माहौर जब महिला संगठन के कार्यक्रम से रुखसत होने लगीं तो आयोजकों से उनकी भेंट हो गई। उन्होंने कार्यक्रम का निमंत्रण दिया तो वे उसमें शिरकत करने के लिए पहुंच गई।
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विधायक जगन प्रसाद गर्ग के बराबर उन्हें स्थान दिया गया। उन्हें देख वहां मौजूद लोग चौंक गए। सपा नेत्री का आरएसएस के कार्यक्रम में भला क्या काम? यह सवाल निकला और चल पड़ा। बात निकली तो दूर तलक गई। सपाइयों में ही बेचैनी नहीं बढ़ी। भाजपाइयों में भी कानाफूसी होने लगी। अब यह तो अंजुला ही जानें कि उनका नारद जयंती के कार्यक्रम में जाना महज इत्तेफाक था या फिर उन्होंने भविष्य की राजनीति के लिए कुछ तैयारी कर रखी है। हालांकि उन्होंने कभी नहीं कहा है कि उनकी सपा से कोई नाराजगी है।
--। क्यों छोड़ी थी भाजपा ?
भारतीय जनता पार्टी में केंद्रीय राज्यमंत्री राम शंकर कठेरिया (तत्कालीन सांसद) से आई कटुता के बाद अंजुला का भाजपा से मोह भंग होने लगा था। लोकसभा चुनाव में वे टिकट की दावेदार मानी जा रही थीं लेकिन भाजपा ने दोबारा रामशंकर कठेरिया पर ही दांव खेला। इससे नाराज अंजुला ने सपा का दामन थाम लिया था।
--। क्यों लग रही हैं अटकलें?
समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद उनका जोरदार स्वागत हुआ। उन्हें लाल बत्ती से नवाजा गया लेकिन कुछ ही दिनों में उनकी लाल बत्ती छिन गई। उन्हें कोई और बड़ी जिम्मेदारी भी नहीं दी गई। तभी से माना जा रहा है कि वे नाराज चल रही हैं। इसी के चलते कयास लगाए जा रहे हैं कि वे भाजपा में घर वापसी कर सकती हैं।
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दरअसल, ये बातें पहले से ही चल रही थी कि सपा में अंजुला माहौर को कुछ परेशानी हो रही है। उनसे लालबत्ती छिनने के बाद ही कयास लगने शुरू हो गए थे कि वे साईकिल की सवारी करती रहेंगी या फिर कोई और फैसला लेंगी। इस बीच उनकी आरएसएस नेताओं के साथ कार्यक्रम में मौजूदगी ने अटकलों को पंख लगा दिए।
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दरअसल हुआ यूं कि दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री रह चुकीं अंजुला सिंह माहौर होटल वैभव में एक महिला संगठन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने गई थीं। इसी होटल के एक हॅाल में विश्व संवाद केंद्र, ब्रज प्रांत की ओर से आयोजित नारद जयंती का कार्यक्रम चल रहा था। इस कार्यक्रम में महानगर संघ चालक विजय गोयल, राम संघ चालक हरीशंकर, पूर्वी पश्चिमी क्षेत्र के प्रचार प्रमुख कृपा शंकर, क्षेत्र व्यवस्था प्रमुख ललित, ब्रज प्रांत प्रचारक दिनेश, विधायक जगन प्र्रसाद गर्ग भी मौजूद थे। कहा तो यह जा रहा है कि अंजुला माहौर जब महिला संगठन के कार्यक्रम से रुखसत होने लगीं तो आयोजकों से उनकी भेंट हो गई। उन्होंने कार्यक्रम का निमंत्रण दिया तो वे उसमें शिरकत करने के लिए पहुंच गई।
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विधायक जगन प्रसाद गर्ग के बराबर उन्हें स्थान दिया गया। उन्हें देख वहां मौजूद लोग चौंक गए। सपा नेत्री का आरएसएस के कार्यक्रम में भला क्या काम? यह सवाल निकला और चल पड़ा। बात निकली तो दूर तलक गई। सपाइयों में ही बेचैनी नहीं बढ़ी। भाजपाइयों में भी कानाफूसी होने लगी। अब यह तो अंजुला ही जानें कि उनका नारद जयंती के कार्यक्रम में जाना महज इत्तेफाक था या फिर उन्होंने भविष्य की राजनीति के लिए कुछ तैयारी कर रखी है। हालांकि उन्होंने कभी नहीं कहा है कि उनकी सपा से कोई नाराजगी है।
--। क्यों छोड़ी थी भाजपा ?
भारतीय जनता पार्टी में केंद्रीय राज्यमंत्री राम शंकर कठेरिया (तत्कालीन सांसद) से आई कटुता के बाद अंजुला का भाजपा से मोह भंग होने लगा था। लोकसभा चुनाव में वे टिकट की दावेदार मानी जा रही थीं लेकिन भाजपा ने दोबारा रामशंकर कठेरिया पर ही दांव खेला। इससे नाराज अंजुला ने सपा का दामन थाम लिया था।
--। क्यों लग रही हैं अटकलें?
समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद उनका जोरदार स्वागत हुआ। उन्हें लाल बत्ती से नवाजा गया लेकिन कुछ ही दिनों में उनकी लाल बत्ती छिन गई। उन्हें कोई और बड़ी जिम्मेदारी भी नहीं दी गई। तभी से माना जा रहा है कि वे नाराज चल रही हैं। इसी के चलते कयास लगाए जा रहे हैं कि वे भाजपा में घर वापसी कर सकती हैं।