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कहीं गुम न हो जाए आगरा की ये पहचान, अपने खड़ी कर रहे बाधा

Mon, 08 Jan 2018 05:25 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा Updated Mon, 08 Jan 2018 05:25 PM IST
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on the verge fo ending petha business in agra
आगरा का पेठा
पेठा नगरी बसने से पहले ही उजड़ गई है। गैस और पानी के अभाव में गिने चुने पहुंचे पेठा इकाई संचालक भी यहां से पलायन कर गए हैं। एकाध बचे भी हैं तो कोई नाम के लिए काम कर रहा है तो किसी ने पेठा कारोबार छोड़, परचून की दुकान खोल ली है।
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ताजमहल के बाद आगरा को पेठा कारोबार की वजह से विश्वस्तर पर पहचाना जाता है। मगर, प्रशासन की उदासीनता के चलते यह प्राचीन कुटीर उद्योग दम तोड़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश पर इन्हें शहर से बाहर शिफ्ट करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। लेकिन, उन्हें कोई सुविधा मुहैया नहीं कराई जा रही।
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कोयले के प्रयोग पर प्रतिबंध और शहर को गंदगी से मुक्ति दिलाने के लिए इन सभी इकाइयों को कालिंदी विहार स्थित पेठा नगर में शिफ्ट किया जाना था। कई साल पहले इसके लिए आगरा विकास प्राधिकरण ने यहां भूखंड तो उपलब्ध कराए थे लेकिन यहां न तो भट्ठी के लिए गैस उपलब्ध कराई गई और न ही भूमिगत खारा पानी के बदले जल संस्थान के पानी की सप्लाई ही दी गई।
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खारा पानी बिगाड़ रहा स्वाद

वर्ष 2014 में यहां पहुंचे लगभग 70 पेठा इकाई संचालक भी यहां से छोड़कर अपने पुराने ठिकाने भाग गए। यहां नालियां और सीवर लाइन भी चोक हैं। इन समस्याओं के चलते उन्हें पेठा नगरी छोड़नी पड़ी।

कालिंदी विहार में भूमिगत पानी खारा है। पेठा बनाने से पहले कच्चे पेठे को पानी से धोना पड़ता है। इससे पेठे में खट्टापन आ रहा था। इससे बचने के लिए संचालकों को पानी का टैंकर खरीदना पड़ता था। यह काफी महंगा पड़ता था। इससे उनकी पेठे की लागत काफी बढ़ रही थी। इसके चलते उन्हें भाग यहां से भागना पड़ा।

पेठे का मूल कारोबार नूरी दरवाजा क्षेत्र में होता है। प्रशासन का जोर भी इसी क्षेत्र के कारोबारियों पर चलता है। यहीं के तमाम कारोबारी कालिंदी विहार गए थे लेकिन संसाधनों के अभाव में वह फिर से लौट आए।

इन्हें दिया गया था नोटिस

एडीए ने लगभग 165 पेठा व्यापारियों को कालिंदी विहार योजना में भूखंड प्रदान करने का निर्णय लिया था। इनमें से 90 व्यापारियों को भूखंड आवंटित भी किए गए हैं। 80 प्रतिशत से अधिक आवंटन 20 साल पूर्व किए जा चुके हैं। बावजूद इसके अभी तक व्यापारियों ने व्यवसाय शुरू नहीं किया है।

ऐसे में प्राधिकरण अब उन व्यापारियों का आवंटन निरस्त करने जा रहा है जिन्हें सबसे पहले भूखंड प्रदान कर दिए गए थे। वर्ष 2014-15 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) में भी इस मामले में सुनवाई हुई थी। डा. देवाशीष भट्टाचार्य बनाम स्टेट ऑफ उत्तर प्रदेश की सुनवाई के दौरान इकाइयों के शहर से बाहर शिफ्ट न होने पर नाराजगी जताई थी।

प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण, ताज संरक्षित क्षेत्र (टीटीजेड) के अध्यक्ष और मंडलायुक्त आगरा, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष, जिलाधिकारी, नगर निगम, आगरा विकास प्राधिकरण को नोटिस जारी किया था।

तोड़ी गईं थी भट्ठियां

नूरी दरवाजा क्षेत्र में संचालित पेठा इकाइयों पर जिला प्रशासन कई बार कार्रवाई कर चुका है। कोयले से संचालित भट्ठियां कई बार तोड़ी जा चुकी हैं। इन पर सील भी लगाई जा चुकी है। कुछ दिन बाद ये फिर से चालू हो जाती हैं।

पवन कुमार गर्ग कहते हैं कि हमें पेठा नगरी में कोई दिक्कत नहीं है। मगर, प्रशासन वहां सुविधा तो उपलब्ध कराए। कोयले के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है लेकिन गैस मुहैया नहीं करा रहे हैं।
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