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इस नारी निकेतन से फिल्मी स्टाइल में 20 लड़कियों को भगा ले गए थे दो युवक

Thu, 09 Aug 2018 10:17 AM IST
पुनीत शर्मा, अमर उजाला मथुरा
पुनीत शर्मा, अमर उजाला मथुरा Updated Thu, 09 Aug 2018 10:17 AM IST
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officials inspect government shelter home after deoria case
राजकीय महिला शरणालय मथुरा
यूपी के देवरिया में हुई घटना के बाद अब मथुरा नारी निकेतन भी अफसरों को याद आ रहा है। सुरक्षा के इंतजाम परखे जा रहे हैं। बता दें कि मथुरा का नारी निकेतन भी खूब चर्चाओं में रह चुका है।
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इस नारी निकेतन से फिल्मी स्टाइल में दो युवक 20 लड़कियों को निकाल ले गए थे। अपनी प्रेमिकाओं को नारी निकेतन से भगाने पहुंचे युवकों ने दूसरी लड़कियों को भी मुक्त करा दिया था। इसके बाद भी यहां से संवासिनियां कई दफा फरार हो चुकी हैं। 
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घटना 17 सितंबर 2015 की है। रात को करीब 2 बजे का वक्त था, दो युवक असलहे लेकर नारी निकेतन में घुस गए थे और गार्ड को बंधक बनाकर नारी निकेतन का दरवाजा खोल दिया था।
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कई बार भाग चुकी हैं संवासिनियां

दोनों युवक आए तो अपनी प्रेमिकाओं को ले जाने के लिए थे, लेकिन उनके साथ में 18 दूसरी संवासिनियों को भी यहां से भगा दिया था। दोनों युवक अपनी प्रेमिकाओं को जिनमें एक देहरादून की थी तो दूसरी मथुरा की ही रहने वाली थी, उन्हें साथ ले गए थे। 

पुलिस ने घंटों की दौड़भाग के बाद 18 संवासिनियों को पकड़ लिया था, लेकिन बाकी दोनों का सुराग नहीं लगा। उस वक्त बताया गया था कि ये युवक नारी निकेतन में अपनी प्रेमिकाओं से मिलने के लिए अक्सर आते-जाते थे। यहां से 11 मई 2017 को भी संवासिनी फरार हो गईं थीं। 11 जून 2018 और 31 मई 2018 को भी संवासिनियां फरार हो चुकी हैं। 

'अफसरों की लापरवाही से होते हैं ऐसे कांड'

पहले बिहार के मुजफ्फरपुर और अब देवरिया के नारी संरक्षण गृह में देह व्यापार के खुलासे ने सिस्टम को हिलाकर रख दिया है। सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारियों का कहना है कि अफसरों की लापरवाही से ऐसे कांड हो रहे हैं। अब अधिकारी न तो निरीक्षण करते हैं और न छापे मारे जाते हैं। ऐसे सुस्त अफसरों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। 

सेवानिवृत्त डीजीपी एके जैन का कहना है कि अब अगर शासन से आदेश आ गया तो चेकिंग हो जाएगी वरना तो कोई जाता ही नहीं है। इससे खौफ खत्म हो जाता है और यह लोग मनमानी पर उतर आते हैं। सेवानिवृत्त डीजीपी विक्रम सिंह का कहना है देवरिया जैसी घटनाएं तो एक संगठित अपराध है। सब कुछ अफसरों की नाक के नीचे हो रहा था। 
 
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