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UP: आईजीआरएस को सियासी हथियार बना रहे पार्षद-पूर्व पार्षद, शिकायतों के आंकड़े इसकी दे रहे गवाही
Fri, 03 Oct 2025 10:14 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 03 Oct 2025 10:14 AM IST
सार
जनप्रतिनिधियों की अफसर सुनवाई नहीं कर रहे हैं। आईजीआरएस पोर्टल पर जनप्रतिनिधियों और उनके करीबियों की ओर से की जा रही शिकायतों के आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। अपने क्षेत्रों से चुनकर नगर निगम सदन पहुंचने वाले पार्षदों को ही जनता के काम कराने के लिए मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल का सहारा लेना पड़ रहा है।
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आगरा नगर निगम में सदन की बैठक
- फोटो : संवाद
विस्तार
आगरा के 30 से अधिक पार्षद खुद, अपने परिवार के सदस्यों या परिचितों के माध्यम से आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायतें कर रहे हैं। यही नहीं, कुछ पार्षद तो लोगों को ही आईजीआरएस पर शिकायत करने के लिए कह रहे हैं। खास बात यह है कि जिन मामलों में उनके दिए गए पत्रों पर कोई कार्रवाई नहीं होती, उन्हीं मुद्दों को आईजीआरएस के जरिये उठाने पर कार्रवाई हो रही है।
यह हाल तब है जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर जिले के प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह तक लगातार अफसरों को जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय स्थापित कर काम करने के लिए कह रहे हैं। हालांकि, इन निर्देशों के बावजूद पार्षद प्रस्तावों, शिकायताें और समस्याओं के समाधान के लिए नगर निगम के अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
केस एक : क्षेत्र की एक काॅलोनी के लोगों ने देवनगर वार्ड से पार्षद निशांत सिंह से लाइट लगवाने के लिए संपर्क किया। पार्षद ने अधिकारियों से कहा, लेकिन क्षेत्रीय अधिकारी ने कार्रवाई नहीं की। लोगों ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की तो लाइट लग गई। अब निशांत काम कराने के लिए निगम के विभिन्न विभागों से संबंधित शिकायतें आईजीआरएस के जरिये कर रहे हैं।
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केस दो: चारसू दरवाजा वार्ड की पार्षद ऊषा देवी के बेटे व पूर्व पार्षद श्रीकांत चौहान ने एक छोटे से निर्माण कार्य के लिए निगम के अधिकारियों को पत्र लिखा। अफसरों ने बजट का हवाला देकर उनकी शिकायत को फाइलों तले दबा दिया। उन्होंने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की तो पहले अफसरों ने कागजों पर निस्तारण कर दिया। निगेटिव फीडबैक दिया तो अफसरों ने आनन-फानन में निर्माण करा दिया।
काम कराने के लिए कुछ भी करेंगे
देवनगर पार्षद निशांत सिंह ने बताया कि जनता ने चुनकर इसलिए भेजा है कि उनके काम हों, न कि उन्हें बहाने सुनने को मिलें। हम पहली कोशिश तो सिस्टम में रहकर काम कराने की करते हैं, लेकिन जब बाबूगीरी की वजह से काम न हो तो सभी विकल्पों का उपयोग किया ही जाएगा।
अफसरों की चल रही मनमानी
चारसू दरवाजा की पार्षद ऊषा देवी का कहना है कि अफसरों की मनमानी चल रही है। अगर अफसर के साथ तालमेल रखेंगे तो ही काम हो रहे हैं। जाहिर है, जनता आईजीआरएस पोर्टल या हर उस माध्यम का उपयोग करेगी, जिसके माध्यम से काम हो रहे हों। अच्छा यही है कि स्थानीय स्तर पर ही सुनवाई हो और काम भी हों।
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यह हाल तब है जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर जिले के प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह तक लगातार अफसरों को जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय स्थापित कर काम करने के लिए कह रहे हैं। हालांकि, इन निर्देशों के बावजूद पार्षद प्रस्तावों, शिकायताें और समस्याओं के समाधान के लिए नगर निगम के अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
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केस एक : क्षेत्र की एक काॅलोनी के लोगों ने देवनगर वार्ड से पार्षद निशांत सिंह से लाइट लगवाने के लिए संपर्क किया। पार्षद ने अधिकारियों से कहा, लेकिन क्षेत्रीय अधिकारी ने कार्रवाई नहीं की। लोगों ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की तो लाइट लग गई। अब निशांत काम कराने के लिए निगम के विभिन्न विभागों से संबंधित शिकायतें आईजीआरएस के जरिये कर रहे हैं।
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केस दो: चारसू दरवाजा वार्ड की पार्षद ऊषा देवी के बेटे व पूर्व पार्षद श्रीकांत चौहान ने एक छोटे से निर्माण कार्य के लिए निगम के अधिकारियों को पत्र लिखा। अफसरों ने बजट का हवाला देकर उनकी शिकायत को फाइलों तले दबा दिया। उन्होंने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की तो पहले अफसरों ने कागजों पर निस्तारण कर दिया। निगेटिव फीडबैक दिया तो अफसरों ने आनन-फानन में निर्माण करा दिया।
काम कराने के लिए कुछ भी करेंगे
देवनगर पार्षद निशांत सिंह ने बताया कि जनता ने चुनकर इसलिए भेजा है कि उनके काम हों, न कि उन्हें बहाने सुनने को मिलें। हम पहली कोशिश तो सिस्टम में रहकर काम कराने की करते हैं, लेकिन जब बाबूगीरी की वजह से काम न हो तो सभी विकल्पों का उपयोग किया ही जाएगा।
अफसरों की चल रही मनमानी
चारसू दरवाजा की पार्षद ऊषा देवी का कहना है कि अफसरों की मनमानी चल रही है। अगर अफसर के साथ तालमेल रखेंगे तो ही काम हो रहे हैं। जाहिर है, जनता आईजीआरएस पोर्टल या हर उस माध्यम का उपयोग करेगी, जिसके माध्यम से काम हो रहे हों। अच्छा यही है कि स्थानीय स्तर पर ही सुनवाई हो और काम भी हों।