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फिर से शुरू होगी शौचालय से छूटे पात्रों की खोज
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एटा। स्वच्छ भारत मिशन के तहत तीसरी बार शौचालय निर्माण के लिए पात्रों का सर्वे कराए जाने की तैयारी है। शासन ने बेसलाइन और एलओबी से छूटे पात्र लाभार्थियों को शौचालय का लाभ देने के लिए वेबसाइट खोल दी है। जिले के आठ ब्लॉकों की ग्राम पंचायतों में लाभार्थियों को जोड़ने के लिए अभियान शुरू होने जा रहा है।
दरअसल, साल 2014 में शुरू हुए स्वच्छ भारत अभियान के तहत जिले में बेस लाइन सूची से चिह्नित 2.48 लाख लाभार्थियों के शौचालय बनवाए गए। इसके बाद साल 2018 में जिले को ओडीएफ घोषित कर दिया गया। बेसलाइन से छूटे करीब 10 हजार लाभार्थियों को एलओबी सूची में शामिल किया गया। इसमें पांच हजार शौचालय बन चुके हैं। इसके बाद भी शासन को लगातार पात्रों के योजना से छूटने की शिकायतें मिल रही थीं। इसे लेकर शासन ने तीसरी बार सर्वे शुरू कराने के निर्देश दिए हैं। जिसके तहत दो बार शौचालय का लाभ मिलने से वंचित रहे पात्रों को जोड़ा जाएगा।
ग्राम पंचायतों में होगा चिन्हांकन
पात्रों का चयन करने का जिम्मा पंचायत सचिवों को सौंपा गया है। ग्राम पंचायत सचिव अपनी-अपनी पंचायतों में शौचालय क लाभ पाने से वंचित रहे पात्रों की पहचान करेंगे।
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कागजों में बन गए शौचालय
बेसलाइन सूची के आधार पर जिले में 2.48 लाख शौचालय बन चुके हैं, लेकिन कागजों में ही इनका निर्माण हुआ है। आलम यह है कि तमाम गांवों में आज भी गड्ढे खोदे पड़े हैं और लोगों को अनुदान भी नहीं मिल सका है। मंडलीय टीम भी जिले को ओडीएफ घोषित कर नहीं सकी है।
इनका कहना है
शौचालयों के निर्माण के लिए फिर से सर्वे होगा। शासन के निर्देश मिलने के बाद ब्लॉक स्तरीय अधिकारी और पंचायत सचिवों को निर्देश दिए गए हैं। मदन वर्मा, सीडीओ एटा
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दरअसल, साल 2014 में शुरू हुए स्वच्छ भारत अभियान के तहत जिले में बेस लाइन सूची से चिह्नित 2.48 लाख लाभार्थियों के शौचालय बनवाए गए। इसके बाद साल 2018 में जिले को ओडीएफ घोषित कर दिया गया। बेसलाइन से छूटे करीब 10 हजार लाभार्थियों को एलओबी सूची में शामिल किया गया। इसमें पांच हजार शौचालय बन चुके हैं। इसके बाद भी शासन को लगातार पात्रों के योजना से छूटने की शिकायतें मिल रही थीं। इसे लेकर शासन ने तीसरी बार सर्वे शुरू कराने के निर्देश दिए हैं। जिसके तहत दो बार शौचालय का लाभ मिलने से वंचित रहे पात्रों को जोड़ा जाएगा।
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ग्राम पंचायतों में होगा चिन्हांकन
पात्रों का चयन करने का जिम्मा पंचायत सचिवों को सौंपा गया है। ग्राम पंचायत सचिव अपनी-अपनी पंचायतों में शौचालय क लाभ पाने से वंचित रहे पात्रों की पहचान करेंगे।
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कागजों में बन गए शौचालय
बेसलाइन सूची के आधार पर जिले में 2.48 लाख शौचालय बन चुके हैं, लेकिन कागजों में ही इनका निर्माण हुआ है। आलम यह है कि तमाम गांवों में आज भी गड्ढे खोदे पड़े हैं और लोगों को अनुदान भी नहीं मिल सका है। मंडलीय टीम भी जिले को ओडीएफ घोषित कर नहीं सकी है।
इनका कहना है
शौचालयों के निर्माण के लिए फिर से सर्वे होगा। शासन के निर्देश मिलने के बाद ब्लॉक स्तरीय अधिकारी और पंचायत सचिवों को निर्देश दिए गए हैं। मदन वर्मा, सीडीओ एटा