{"_id":"610c42ab8ebc3ea9f774ba5f","slug":"now-retina-transplant-in-sn-agra-news-agr5026613165","type":"story","status":"publish","title_hn":"एसएन में अब उन्नत पुतली प्रत्यारोपण की सुविधा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एसएन में अब उन्नत पुतली प्रत्यारोपण की सुविधा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आगरा। एसएन मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में अब एडवांस्ड पुतली प्रत्यारोपण (कॉर्निया ट्रांसप्लांटेशन) की सुविधा शुरू हो गई है। मरीजों को अब यहां और बेहतर उपचार मिल जाएगा।
नेत्र रोग विभाग की कॉर्निया यूनिट की हेड और आई बैंक की प्रभारी डॉ. शेफाली मजूमदार के मुताबिक आगरा परिक्षेत्र में इस तरह की सुविधा और कहीं नहीं है। पूरे प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में केजीएमयू के बाद एसएन मेडिकल कॉलेज में ही एडवांस्ड पुतली प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि विभिन्न बीमारियों की वजह से पुतली पारदर्शिता खो देती है और सफेद हो जाती है। जिससे मरीजों को दिखना बंद हो जाता है। कुछ बीमारियों में पुतली की कुछ परतें और कुछ में सभी परतें खराब हो जाती हैं।
उन्होंने बताया कि एसएन मेडिकल कॉलेज में अभी तक जो पुतली प्रत्यारोपण किया जाता था, उसे फुल थिकनेस कॉर्निया ट्रांसप्लांट कहते हैं। इसमें खराब पुतली को काटकर हटा देते थे और उसकी जगह नई पुतली, जो कि नेत्रदान से मिलती है, लगा दी जाती है। इसे 16 टांकों से चाराें तरफ से जोड़ा जाता था। इस ऑपरेशन में रिजेक्शन और टांकों से जोड़े जाने से आंख की क्षमता कम होने का खतरा रहता था। एडवांस्ड पुतली प्रत्यारोपण में ये खतरे नहीं होते। सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि मरीज की रोशनी जल्दी आ जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
नेत्र रोग विभाग की कॉर्निया यूनिट की हेड और आई बैंक की प्रभारी डॉ. शेफाली मजूमदार के मुताबिक आगरा परिक्षेत्र में इस तरह की सुविधा और कहीं नहीं है। पूरे प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में केजीएमयू के बाद एसएन मेडिकल कॉलेज में ही एडवांस्ड पुतली प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि विभिन्न बीमारियों की वजह से पुतली पारदर्शिता खो देती है और सफेद हो जाती है। जिससे मरीजों को दिखना बंद हो जाता है। कुछ बीमारियों में पुतली की कुछ परतें और कुछ में सभी परतें खराब हो जाती हैं।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि एसएन मेडिकल कॉलेज में अभी तक जो पुतली प्रत्यारोपण किया जाता था, उसे फुल थिकनेस कॉर्निया ट्रांसप्लांट कहते हैं। इसमें खराब पुतली को काटकर हटा देते थे और उसकी जगह नई पुतली, जो कि नेत्रदान से मिलती है, लगा दी जाती है। इसे 16 टांकों से चाराें तरफ से जोड़ा जाता था। इस ऑपरेशन में रिजेक्शन और टांकों से जोड़े जाने से आंख की क्षमता कम होने का खतरा रहता था। एडवांस्ड पुतली प्रत्यारोपण में ये खतरे नहीं होते। सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि मरीज की रोशनी जल्दी आ जाती है।
विज्ञापन