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एनर्जी ड्रिंक के नाम पर अब नशे के पाउच
अमर उजाला आगरा
Updated Fri, 12 Aug 2016 01:18 AM IST
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रेडबुल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराो
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एनर्जी ड्रिंक के नाम पर नशे का धंधा बहुत पहले से चल रहा है। ऐसे ही एक एनर्जी ड्रिंक रेडबुल की बिक्री पर तो एफएसडीए ने प्रतिबंध ही लगा दिया है। लेकिन इसके अलावा और भी एनर्जी ड्रिंक है जिन्हें एक बार पीकर बार बार पीने का मन करता है। युवा इनके आदी होते जा रहे हैं। बाजार में हाल ही में 30-30 रुपये के पाउच भी आ गए हैं। इन्हें बगैर बिल के मेडिकल स्टरों पर बेचा जा रहा है।
दवा कारोबार से जुड़े लोगों ने बताया कि पाउच बेचने वाली कंपनी ने अपने डीलर नहीं बनाए हैं। इसके सेल्समैन मेडिकल स्टोरों पर 10-10 पाउच दे जाते हैं। कहते हैं कि बिक जाएंगे, तब पैसे लेंगे। बिक्री खूब चल पड़ी है। जो युवा इन्हें एक बार लेता है, वो आदी हो जाता है। माना जा रहा है कि रेडबुल की तरह इसमें भी कैफीन है। पाउच पर कैफीन की जानकारी नहीं दी गई है। कंपनी का टिन भी नहीं है।
बता दें, मेरठ से लिए गए सैंपल की जांच में रेडबुल में कैफीन की मात्रा अधिक पाई गई थी। ड्रिंक के अंदर अधिकतम 320 पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) होना चाहिए था। रेडबुल में 382 पीपीएम पाया गया। इसकेबाद भी एनर्जी ड्रिंक के बाजार पर एफएसडीए की नजर नहीं गई है।
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एनर्जी ड्रिंक के नाम पर ऐसे प्रोडक्ट बेचे जा रहे हैं जो युवाओं को आदी बना रहे हैं, इनमें से कई में कैफीन की मात्रा भी काफी है - पुनीत कालरा ( सचिव, मेडिकल ट्रेडर्स वेल्फेयर एसोसिएशन )
मैंने कुछ दिन पूर्व ही चार्ज संभाला है। एनर्जी ड्रिंक के सैंपल लेने के लिए अभियान चलाया जाएगा। अगर कहीं रेडबुल की बिक्री होती मिली तो कार्रवाई की जाएगी - विनीत कुमार ( अभिहीत अधिकारी, एफएसडीए )
मॉल में भी बिक रहा रेडबुल
मदिया कटरा, दिल्ली गेट, संजय प्लेस, दरेसी आदि स्थानों पर रेडबुल की बिक्री खुलेआम हो रही है। यह शॉपिंग मॉल्स में भी उपलब्ध है। खुले बाजार में 200 एमएल का केन 110 रुपये में बिक रहा है।
साल भर से सैंपल ही नहीं
एनर्जी ड्रिंक में कोई कंपनी कैफीन मिलाकर बेचे या अल्कोहल, एफएसडीए पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है, आलम यह है कि साल भर से जनपद में एनर्जी ड्रिंक का कोई सैंपल ही नहीं लिया गया है।
सेहत के लिए खतरनाक है कैफीन
कैफीन के सेवन से हाईपर टेंशन और नींद न आने जैसी बीमारियां होती हैं। ज्यादा सेवन से धमनियां सिकुड़ जाती हैं। ब्लड प्रेशर की शिकायत होती है। सिर दर्द, पेट का खराब होने जैसी परेशानियां भी होती हैं। सीनियर फिजिशियन डा. सुनील बंसल का कहना है कि कैफीन एक तरह का एडिक्शन है।
दवा कारोबार से जुड़े लोगों ने बताया कि पाउच बेचने वाली कंपनी ने अपने डीलर नहीं बनाए हैं। इसके सेल्समैन मेडिकल स्टोरों पर 10-10 पाउच दे जाते हैं। कहते हैं कि बिक जाएंगे, तब पैसे लेंगे। बिक्री खूब चल पड़ी है। जो युवा इन्हें एक बार लेता है, वो आदी हो जाता है। माना जा रहा है कि रेडबुल की तरह इसमें भी कैफीन है। पाउच पर कैफीन की जानकारी नहीं दी गई है। कंपनी का टिन भी नहीं है।
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बता दें, मेरठ से लिए गए सैंपल की जांच में रेडबुल में कैफीन की मात्रा अधिक पाई गई थी। ड्रिंक के अंदर अधिकतम 320 पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) होना चाहिए था। रेडबुल में 382 पीपीएम पाया गया। इसकेबाद भी एनर्जी ड्रिंक के बाजार पर एफएसडीए की नजर नहीं गई है।
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एनर्जी ड्रिंक के नाम पर ऐसे प्रोडक्ट बेचे जा रहे हैं जो युवाओं को आदी बना रहे हैं, इनमें से कई में कैफीन की मात्रा भी काफी है - पुनीत कालरा ( सचिव, मेडिकल ट्रेडर्स वेल्फेयर एसोसिएशन )
मैंने कुछ दिन पूर्व ही चार्ज संभाला है। एनर्जी ड्रिंक के सैंपल लेने के लिए अभियान चलाया जाएगा। अगर कहीं रेडबुल की बिक्री होती मिली तो कार्रवाई की जाएगी - विनीत कुमार ( अभिहीत अधिकारी, एफएसडीए )
मॉल में भी बिक रहा रेडबुल
मदिया कटरा, दिल्ली गेट, संजय प्लेस, दरेसी आदि स्थानों पर रेडबुल की बिक्री खुलेआम हो रही है। यह शॉपिंग मॉल्स में भी उपलब्ध है। खुले बाजार में 200 एमएल का केन 110 रुपये में बिक रहा है।
साल भर से सैंपल ही नहीं
एनर्जी ड्रिंक में कोई कंपनी कैफीन मिलाकर बेचे या अल्कोहल, एफएसडीए पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है, आलम यह है कि साल भर से जनपद में एनर्जी ड्रिंक का कोई सैंपल ही नहीं लिया गया है।
सेहत के लिए खतरनाक है कैफीन
कैफीन के सेवन से हाईपर टेंशन और नींद न आने जैसी बीमारियां होती हैं। ज्यादा सेवन से धमनियां सिकुड़ जाती हैं। ब्लड प्रेशर की शिकायत होती है। सिर दर्द, पेट का खराब होने जैसी परेशानियां भी होती हैं। सीनियर फिजिशियन डा. सुनील बंसल का कहना है कि कैफीन एक तरह का एडिक्शन है।