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साइकिल पर हाथी सवार होने से यहां मुश्किल में है भाजपा, दांव पर है साख
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Mon, 12 Mar 2018 10:20 AM IST
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सपा, बसपा
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आगरा में जिला पंचायत अध्यक्ष के उपचुनाव की तपिश जोर पकड़ने लगी है। जोड़तोड़ के लिए गुणा-भाग का खेल अंतिम पड़ाव पर है। इस बीच सपा और बसपा की नजदीकी ने भाजपाई खेमे की मुश्किल बढ़ा दी हैं।
दोनों ही पार्टियां अपने समर्थन से चुने गए जिला पंचायत सदस्यों को जोड़ने में जुट गई हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष के उपचुनाव के लिए 12 मार्च को नामांकन होना है।
प्रबल प्रताप (राकेश बघेल) के साथ पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष कुशल यादव के लिए पति राजपाल यादव ने भी पर्चा ले लिया है। पहले माना जा रहा था कि इस बार कुशल यादव चुनाव मैदान से दूर रहेंगी।
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दोनों ही पार्टियां अपने समर्थन से चुने गए जिला पंचायत सदस्यों को जोड़ने में जुट गई हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष के उपचुनाव के लिए 12 मार्च को नामांकन होना है।
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प्रबल प्रताप (राकेश बघेल) के साथ पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष कुशल यादव के लिए पति राजपाल यादव ने भी पर्चा ले लिया है। पहले माना जा रहा था कि इस बार कुशल यादव चुनाव मैदान से दूर रहेंगी।
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भाजपा
- फोटो : amar ujala
मगर, जैसे ही सपा और बसपा की जुगलबंदी हुई, उनके पति राजपाल यादव सक्रिय हो गए। उच्च स्तर पर हुए इस गठजोड़ का वह स्थानीय स्तर पर फायदा उठाना चाहते हैं।
बताया जा रहा है कि इसके लिए सपा और बसपा के बीच बैठकों के दौर शुरू हो गए हैं। दोनों ही पार्टियां अपने-अपने समर्थन से चुने जा चुके सदस्यों से संपर्क साधने में जुट गई हैं।
बता दें कि पिछले साल 26 सितंबर को भाजपाई खेमे ने तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष कुशल यादव का तख्ता पलट कर दिया था। कुशल को समर्थन देने वाले तमाम सदस्यों को भाजपाई खेमे ने तोड़ दिया था।
बताया जा रहा है कि इसके लिए सपा और बसपा के बीच बैठकों के दौर शुरू हो गए हैं। दोनों ही पार्टियां अपने-अपने समर्थन से चुने जा चुके सदस्यों से संपर्क साधने में जुट गई हैं।
बता दें कि पिछले साल 26 सितंबर को भाजपाई खेमे ने तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष कुशल यादव का तख्ता पलट कर दिया था। कुशल को समर्थन देने वाले तमाम सदस्यों को भाजपाई खेमे ने तोड़ दिया था।
15 सदस्य अनुपस्थिज रहे थे
अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में 36 सदस्य आ गए थे, जबकि कुशल यादव को समर्थन करने वाले लगभग 15 सदस्य सदन से अनुपस्थित रहे थे।
इनमें से भी अब कई सदस्य उनका साथ छोड़ चुके हैं। इन तमाम सदस्यों को भाजपाई खेमे के दावेदारों ने गुप्त स्थान पर भ्रमण के लिए भेज दिया है।
इनके मोबाइल फोन भी बंद करवा दिए हैं। ऐसे में सपा-बसपा को अपने सदस्यों से संपर्क साधने में मुश्किल आ रही है। हालांकि वह इनके घरों के चक्कर काट रहे हैं।
इनमें से भी अब कई सदस्य उनका साथ छोड़ चुके हैं। इन तमाम सदस्यों को भाजपाई खेमे के दावेदारों ने गुप्त स्थान पर भ्रमण के लिए भेज दिया है।
इनके मोबाइल फोन भी बंद करवा दिए हैं। ऐसे में सपा-बसपा को अपने सदस्यों से संपर्क साधने में मुश्किल आ रही है। हालांकि वह इनके घरों के चक्कर काट रहे हैं।