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अगले साल से बोरिंग कराने पर लेनी होगी एनओसी, जितना लेंगे पानी उतना चुकाना होगा शुल्क
Sat, 15 Dec 2018 11:13 AM IST
Priyesh Mishra
अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला, आगरा
अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला, आगरा
Published by: Priyesh Mishra
Updated Sat, 15 Dec 2018 11:13 AM IST
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भूगर्भ जल दोहन
- फोटो : अमर उजाला
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भूगर्भ जल निकालने के लिए एक जून, 2019 से कोई भी, कहीं भी बोरिंग नहीं करा सकेगा। भूमिगत जल के सीमित उपयोग के लिए केंद्र सरकार ने कई कड़े नियम बनाए हैं। बोरिंग के लिए अनुमति लेनी होगी और रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य किया गया है।
भूगर्भ जल के अति दोहित क्षेत्रों के लिए सख्त नियमों का पालन करना होगा। यही नहीं, जल शुल्क भी देना होगा। पांच साल के लिए केंद्रीय भूमिगत जल प्राधिकरण एनओसी जारी करेगा, जिसे समय पर रिन्यू कराना होगा।
भूमिगत जल को री-चार्ज किए बिना अंधाधुंध तरीके से इसका उपयोग किया जा रहा है। इस पर शिकंजा कसते हुए एनजीटी के आदेश पर सरकार ने केंद्रीय भूमिगत जल प्राधिकरण का गठन किया है। यह प्राधिकरण एक जून, 2019 से नए नियमों का पालन कराने के लिए जिम्मेदार होगा।
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भूगर्भ जल के अति दोहित क्षेत्रों के लिए सख्त नियमों का पालन करना होगा। यही नहीं, जल शुल्क भी देना होगा। पांच साल के लिए केंद्रीय भूमिगत जल प्राधिकरण एनओसी जारी करेगा, जिसे समय पर रिन्यू कराना होगा।
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भूमिगत जल को री-चार्ज किए बिना अंधाधुंध तरीके से इसका उपयोग किया जा रहा है। इस पर शिकंजा कसते हुए एनजीटी के आदेश पर सरकार ने केंद्रीय भूमिगत जल प्राधिकरण का गठन किया है। यह प्राधिकरण एक जून, 2019 से नए नियमों का पालन कराने के लिए जिम्मेदार होगा।
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जितना लेंगे पानी, उतना चुकाएंगे जल संरक्षण शुल्क
प्राधिकरण को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत अधिकार दिए गए हैं। बोतलबंद पानी बेचने वालों, साफ़्ट ड्रिंक, डिस्टरीज इकाइयों को पहली बार कानून के दायरे में लाया गया है और इनसे जल संरक्षण शुल्क वसूला जाएगा। यह अति दोहित इलाकों में 20 से 100 रुपये प्रति घन मीटर तक वसूला जा सकता है।
भूमिगत जल का जितना निकास किया जाएगा, लोगों को उतना जल संरक्षण शुल्क चुकाना होगा। यह देश में पहली बार होगा। इस शुल्क का भुगतान क्षेत्र की श्रेणी, उद्योग के प्रकार और भूमिगत जल निकालने की मात्रा के अनुसार अलग-अलग करना होगा।
दोहित, अति दोहित क्षेत्रों में जल संरक्षण शुल्क की दरें कई गुना ज्यादा रखी गई हैं, ताकि पानी निकालने वाली इकाइयों को हतोत्साहित किया जा सके। घरेलू उपयोगकर्ताओं को एक से दो रुपये प्रति घन मीटर का शुल्क चुकाना होगा।
भूमिगत जल का जितना निकास किया जाएगा, लोगों को उतना जल संरक्षण शुल्क चुकाना होगा। यह देश में पहली बार होगा। इस शुल्क का भुगतान क्षेत्र की श्रेणी, उद्योग के प्रकार और भूमिगत जल निकालने की मात्रा के अनुसार अलग-अलग करना होगा।
दोहित, अति दोहित क्षेत्रों में जल संरक्षण शुल्क की दरें कई गुना ज्यादा रखी गई हैं, ताकि पानी निकालने वाली इकाइयों को हतोत्साहित किया जा सके। घरेलू उपयोगकर्ताओं को एक से दो रुपये प्रति घन मीटर का शुल्क चुकाना होगा।
इन्हें दी गई है एनओसी, शुल्क से छूट
भूगर्भ जल निकाली के लिए एनओसी और जल संरक्षण शुल्क से किसानों को छूट दी गई है। कृषि संबंधी कार्य के लिए जल का उपयोग करने वालों, गैर ऊर्जा उपाय जैसे रस्सी, बाल्टी, हैंडपंप के जरिए पानी निकालने वालों को छूट रहेगी।
घरेलू उपयोग के लिए एक इंच व्यास के डिलीवरी पाइप के जरिए पानी निकालने पर परिवारों को छूट रहेगी। इसके अलावा जंगी कार्रवाई तैनाती और सीमा पर तैनात सशस्त्र सेना प्रतिष्ठानों को अनापत्ति प्रमाण-पत्र की आवश्यकता से छूट दी गई है।
ये है पैकिंग पेयजल के लिए जल संरक्षण शुल्क
सुरक्षित, गंभीर, अति दोहित श्रेणी में इन कंपनियों से 200 घन मीटर प्रतिदिन निकासी पर 3 रुपये प्रति घनमीटर से 20 रुपये तक वसूले जाएंगे। पानी की मात्रा बढ़ने के साथ 200 से 1000 घन मी. प्रति दिन पर 5 से 40 रुपये, 5 हजार घन मी. प्रति दिन निकासी पर 8 से 60 रुपये और 5 हजार से ज्यादा पानी की निकासी पर 10 से 100 रुपये प्रति घन मीटर का शुल्क चुकाना होगा। इसके लिए मीटर लगाया जाएगा, जिसके मुताबिक भुगतान करना होगा।
घरेलू उपयोग के लिए एक इंच व्यास के डिलीवरी पाइप के जरिए पानी निकालने पर परिवारों को छूट रहेगी। इसके अलावा जंगी कार्रवाई तैनाती और सीमा पर तैनात सशस्त्र सेना प्रतिष्ठानों को अनापत्ति प्रमाण-पत्र की आवश्यकता से छूट दी गई है।
ये है पैकिंग पेयजल के लिए जल संरक्षण शुल्क
सुरक्षित, गंभीर, अति दोहित श्रेणी में इन कंपनियों से 200 घन मीटर प्रतिदिन निकासी पर 3 रुपये प्रति घनमीटर से 20 रुपये तक वसूले जाएंगे। पानी की मात्रा बढ़ने के साथ 200 से 1000 घन मी. प्रति दिन पर 5 से 40 रुपये, 5 हजार घन मी. प्रति दिन निकासी पर 8 से 60 रुपये और 5 हजार से ज्यादा पानी की निकासी पर 10 से 100 रुपये प्रति घन मीटर का शुल्क चुकाना होगा। इसके लिए मीटर लगाया जाएगा, जिसके मुताबिक भुगतान करना होगा।
इन्हें निर्माण के लिए पानी निकालने पर चाहिए एनओसी
स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, मेट्रो स्टेशन, बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, आवासीय संरचना, आफिस भवन, नेशनल हाइवे, अग्निशमन केंद्र, गोदाम, बिजनेस प्लाजा, मल्टीप्लेक्स, मॉल, अस्पताल, नर्सिंग होम, वाटर पार्क, होटल, रेस्टोरेंट, गेस्ट हाउस, बैंक्वेट हॉल, मैरिज होम, क्लब, व्यापार केंद्र के निर्माण को पानी निकालने को प्राधिकरण से अनुमति लेनी होगी। यह पांच साल के लिए होगी। वैधता खत्म होने से 90 दिन पहले रिन्यूवल कराना होगा। रेन वाटर हार्वेस्टिंग इस एनओसी की प्रमुख शर्त है।