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रफ्तार पर ब्रेक: अब स्पीड गवर्नर के बिना नहीं बिकेगा नया वाहन, रजिस्ट्रेशन पर भी रोक; ये है नया आदेश

Mon, 21 Sep 2026 10:00 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Mon, 21 Sep 2026 10:00 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा को लेकर सख्त आदेश देते हुए नए परिवहन वाहनों में स्पीड गवर्नर की पुष्टि को अनिवार्य कर दिया है। इसके बिना वाहन की बिक्री और पंजीकरण नहीं होगा। कोर्ट ने राज्यों से समयबद्ध अनुपालन रिपोर्ट मांगी है और वाहन ट्रैकिंग उपकरणों का विवरण वाहन पोर्टल पर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
 

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No sale or registration of new transport vehicles without speed governors Supreme Court order
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सड़क सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक सख्त आदेश जारी किया है। इसके तहत अब देश में कोई भी नया परिवहन वाहन गति नियंत्रक (स्पीड गवर्नर) के बिना न तो बेचा जाएगा और न ही उसका पंजीकरण होगा। केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वाहन की बिक्री, पंजीकरण और फिटनेस जांच के समय इसकी पुष्टि करनी होगी।
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न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने 15 सितंबर को रिट याचिका (सिविल संख्या 295 वर्ष 2012) में यह फैसला सुनाया। यह आदेश सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन की याचिकाओं और सुझावों पर आया है। कोर्ट ने केंद्र को नियम 118 के दायरे वाले परिवहन वाहनों में यह उपकरण अनिवार्य करने को कहा है। नियम तोड़ने वाले निर्माताओं या विक्रेताओं पर कार्रवाई होगी। सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को आरटीओ अधिकारियों को निर्देश देने को कहा गया है कि पंजीकरण से पहले स्पीड गवर्नर की पुष्टि अनिवार्य हो। पुराने वाहनों में नियम पालन पर राज्यों को शपथपत्र देना होगा।
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अधिवक्ता केसी जैन के सुझाव पर पात्र वाहनों, ट्रैकिंग उपकरणों और गति नियंत्रकों का जिला व राज्यवार विवरण हर महीने वाहन पोर्टल से सार्वजनिक करने को कहा गया है। जिला सड़क सुरक्षा समितियां हर महीने समीक्षा कर राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड को रिपोर्ट भेजेंगी। प्रत्येक ट्रैकिंग उपकरण का पहचान नंबर वाहन पोर्टल पर दर्ज होकर राज्य के निगरानी केंद्र से जुड़ा होना चाहिए।
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कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के गंभीर मोटर वाहन मामलों पर चिंता जताई, जो 2023 के कानून के कारण समाप्त मान लिए गए थे। अदालत ने कहा कि गैर-समझौता योग्य और अनिवार्य जेल वाले मामलों में मुकदमा न चलाने का कोई उचित कारण नहीं है। इसके अलावा, दिल्ली में मथुरा रोड पर पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार को छह सप्ताह में विशेषज्ञ नियुक्त कर सुरक्षित पारपथ, सिग्नल और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के उपाय सुझाने के निर्देश दिए गए हैं।
 
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