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तीन घंटे इमरजेंसी में मरीजों के लिए ‘नो एंट्री’

Tue, 31 May 2016 12:43 AM IST
अमर उजाला आगरा
अमर उजाला आगरा Updated Tue, 31 May 2016 12:43 AM IST
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NO ENTRY FOR PATIENT IN EMERJENCEE
एम्‍ारजेंसी - फोटो : अमर उजाला ब्‍यूूराो
 लखनऊ में उत्तर प्रदेश पोस्ट ग्रेजुएशन मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम (यूपीपीजीएमईई) की काउंसलिंग में अतिरिक्त अंक लाभ का विरोध कर रहे डाक्टरों पर लाठीचार्ज का असर एसएन मेडिकल कालेज में भी दिखा। यहां गुस्साए जूनियर डाक्टरों ने तीन घंटे तक इमरजेंसी में मरीजों के लिए नो एंट्री कर दी। मुख्य गेट बंद कर जमकर नारेबाजी की। पुलिस-प्रशासन के न आने पर प्रदर्शनकारियों ने भर्ती मरीजों को बाहर निकालना शुरू कर दिया। कालेज के कार्यवाहक प्राचार्य और प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक ने उनकी मांगों को शासन तक पहुंचाने का आश्वासन देकर प्रदर्शन बंद कराया।
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लखनऊ में यूपीपीजीएमईई की काउंसलिंग में अतिरिक्त अंक लाभ का विरोध करने वाले डाक्टरों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। इससे आक्रोशित मेडिकल छात्र एकजुट होकर इमरजेंसी पहुंच गए। ‘वी वांट जस्टिस’ के नारे लगाते हुए धरने पर बैठ गए। इनके साथ जूनियर डाक्टर भी आ गए। उन्होंने इमरजेंसी में भर्ती मरीजों को बाहर निकालना शुरू कर दिया। जानकारी पर कालेज प्रशासन के अधिकारी पहुंचे और उनसे बात कर अपनी मांग को कानूनी प्रक्रिया के तहत रखने की सीख दी। काफी समझाने-बुझाने के बाद प्रदर्शनकारी शांत हुए। करीब तीन बजे मरीजों के लिए गेट खोल दिया गया।
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यूपीपीजीएर्मईई की काउंसलिंग के विरोध में जूनियर डाक्टरों ने कार्य बंद कर दिया था। दो-ढाई घंटे तक चिकित्सकीय सेवाएं प्रभावित रहीं। निर्णय सुप्रीम कोर्ट का है, ऐसे में इन्हें अपना विरोध कानूनी प्रक्रिया के तहत कोर्ट में रखने के लिए भी कहा। इनसे मांगपत्र मांगा गया है, जिसे शासन तक पहुंचाया जाएगा।
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प्रो. पीके माहेश्वरी, कार्यवाहक प्राचार्य

ये है मामला:
मार्च में यूपीपीजीएमईई की काउंसलिंग के जरिए डाक्टर सीट आवंटित होने पर सेवाएं देना शुरू कर दिया। इसके खिलाफ प्राइमरी हेल्थ मेडिकल सर्विसेज के चिकित्सकों ने कोर्ट में याचिका दायर की। तर्क दिया कि ग्रामीण क्षेत्र में सेवाएं देने के चलते उन्हें पीजी के लिए पढ़ाई का पर्याप्त समय नहीं मिलता। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें कुल अंकों का 30 फीसदी अतिरिक्त अंकों का लाभ दिया। इससे पूर्व में चयनित डाक्टरों की सीट गई और उनके मुकाबले अंक में पिछड़ने के कारण अधिकांश नई काउंसलिंग में भी जगह नहीं बना पाएंगे। इसके विरोध में प्रदेश भर से पूर्व काउंसलिंग में चयनित डाक्टर लखनऊ में प्रदर्शन को जुटे थे।


मरीज की हालत बिगड़ने पर भी भगाते रहे
तीन घंटे चिकित्सकीय सेवाएं ठप होने से कई मरीजों की जान पर बन आई। खेरागढ़ के राकेश हीमोफीलिया के रोगी हैं, लेकिन इन्हें अंदर ही नहीं घुसने दिया। बोदला के राजू के बच्चे को खसरा निकला था, हालत बिगड़ने लगी, डाक्टरों से एक बार देखने की मिन्नत की, लेकिन उन्हें दुत्कार दिया। नगला बूढ़ी के बालकिशन अपनी भाभी मुन्नी देवी को लेकर इमरजेंसी आए, इनकी सांस उखड़ रही थी, डाक्टरों ने बात तक नहीं की। मुन्नी देवी जमीन पर गिर पड़ीं। इरादत नगर के रवि रक्त की जांच कराने आए थे। अंदर घुसने लगे तो डाक्टरों ने उन्हें धकिया दिया।
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