अमर उजाला पड़ताल: नगर निगम में शामिल सात गांवों में सालभर में भी नहीं हुए विकाय कार्य
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आगरा नगर निगम में पिछले साल 26 नवंबर को शामिल हुए सात गांवों में सालभर में विकास के कार्य नहीं हुए। न सीवर लाइन बिछाई गई न पानी की। न तो सफाई का इंतजाम हुआ और न ही नाली खड़ंजे बनाए गए। गांवों के निगम में जाने के बाद ग्राम पंचायतों ने काम बंद कर दिया जबकि निगम ने काम शुरू ही नहीं किए। लोग परेशान हैं और अफसरों के चक्कर काट रहे हैं।
शहर से सटे गांव बाबरपुर, तोरा, कलाल खेड़िया, कहरई, चमरौली, नगला अलबतिया और दहतोरा को ठीक एक साल पहले नगर निगम ने अपनी सीमा में शामिल किया था। लेकिन सफाई, सीवर, सड़क निर्माण, जल निकासी का जिम्मा अब तक नहीं लिया है।
16.12 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली सातों ग्राम पंचायतें अब इन गांवों में विकास नहीं करा रहीं, वहीं नगर निगम गजट न होने के कारण विकास और सफाई कराने से इनकार कर रहा है।
कचरे के ढेर... सड़कों पर भरा पानी
कहरई ग्राम पंचायत में सड़कों पर एक फुट तक नाली का पानी भरा हुआ है। यहां सफाई के नाम पर केवल एक कर्मचारी है। जगह जगह गांव में कचरे के ढेर हैं। कुछ यही हाल दहतोरा का है। यहां जगह जगह कचरे के ढेर लगे हैं।
इससे तो हम गांव में ही अच्छे थे
कहरई के ग्राम प्रधान रवि जौनवार ने कहा कि एक साल से हमारा गांव शहरी सीमा में शामिल हुआ है, लेकिन नगर निगम कोई काम नहीं करा रहा। यहां तक कि सफाई व्यवस्था भी नहीं संभाली। हम लोग अधर में लटके हैं। इससे अच्छा था कि गांव ही बने रहते।
कहरई निवासी राकेश त्रिपाठी ने कहा कि पहले पंचायत से काम करा लेते थे, लेकिन एक साल से पंचायत भी काम नहीं करा रही। सड़कों पर पानी भरा है। नालियां हैं नहीं। सभी इस इंतजार में हैं कि नगर निगम काम कराएगा। फिलहाल तो नरक है यहां।
दलील : सरकारी आदेश पर संभालेंगे जिम्मेदारी
नगर आयुक्त निखिल टी. फुंडे का कहना है कि जब तक गांव और शहरी क्षेत्र को आगरा नगर निगम में शामिल करने का गजट (सरकारी आदेश) नहीं हो जाता, तब तक नगर निगम वहां व्यवस्थाएं नहीं संभाल सकता। पहले गजट हो, तब हम काम शुरू करा पाएंगे।
'अधिसूचना का इंतजार है'
मेयर नवीन जैन ने बताया कि प्रदेश सरकार सीमा विस्तार को मंजूर कर चुकी है। अधिसूचना बाकी है। जैसे ही गजट होगा, हम सबसे पहले सफाई, फिर नालियां और फिर सड़कों का निर्माण कराएंगे। बजट मिले न मिले, काम कराना शुरू कर देंगे। इन गांवों की तस्वीर बदल जाएगी।
गांव ये रकम होगी खर्च
बाबरपुर मुस्तकिल 19.85 करोड़
चमरौली 9.34 करोड़
नगला अलबतिया 12.49 करोड़
दहतोरा 4.16 करोड़
शास्त्रीपुरम योजना 23.22 करोड़
अवधपुरी 6.46 करोड़
यूपीएसआईडीसी 46.04 करोड़
(कहरई और कलाल खेरिया स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल हैं)