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जिला अस्पताल में दस साल से नहीं दिल का डॉक्टर
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26एमएनपी-42- जिला अस्पताल में बंद हृदयरोग विभाग
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। 21 लाख की आबादी वाले जिले में हृदय रोगियों के लिए उपचार की व्यवस्था नहीं है। पिछले दस वर्षों से जिला अस्पताल में दिल का डॉक्टर नहीं है। इलाज के लिए आने वाले मरीजों को ब्लड प्रेशर की जांच के बाद मेडिकल कॉलेज आगरा और सैफई रेफर कर दिया जाता है।
जिले में बड़ी संख्या में लोग हृदय रोगों से पीड़ित हैं। ब्लड प्रेशर, डायबिटीज आदि के मरीज घर-घर देखे जा रहे हैं। जिले में हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने के कारण इन मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ओपीडी में केवल ब्लड प्रेशर की माप की जाती है, उन्हें उपचार देने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। 10 साल से जिले को हृदय रोग विशेषज्ञ का इंतजार है। हृदय रोग विशेष की तैनाती न होने के कारण जिले से मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद ही रेफर कर दिया जाता है। इसके बाद या तो मरीज आगरा और सैफई मेडिकल कॉलेज जाता है या फिर निजी डॉक्टर के यहां उपचार कराता है।
हर रोज जिला अस्पताल पहुंचते हैं तीन सौ मरीज
जिला अस्पताल में प्रतिदिन दो सौ से तीन सौ मरीज हृदय रोग से पीड़ित होकर पहुंचते हैं। अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने के कारण मरीजों को निराश ही लौटना पड़ रहा है। हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने के कारण हार्टअटैक और हृदय संबंधी अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीज जिन्हें तुरंत बेहतर उपचार की जरूरत होती है वे दम तोड़ देते हैं।
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इस साल अब तक 25 मरीजों की हो चुकी है मौत
जिला अस्पताल में दर्ज रिकॉर्ड पर यदि नजर डालें तो पता चलता है कि जनवरी से लेकर अब तक 25 मरीजों ही हृदय रोग से पीड़ित होने पर जिला अस्पताल में मौत हुई है। इनमें से अधिकतर मरीज मृत अवस्था में ही अस्पताल पहुंचे। जबकि आठ सौ से अधिक मरीजों को गंभीर हालत में सैफई के लिए रेफर किया गया है।
80 से 100 मरीजों का प्रतिदिन नापा जाता है ब्लडप्रेशर
जिला अस्पताल में दर्ज रिकार्ड बताता है कि जिले में हृदय के मरीजों की संख्या बहुत अधिक है। औसतन 80 से 100 मरीजों का प्रतिदिन जिला अस्पताल में ब्लडप्रेशर नापा जाता है। हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने के कारण इन मरीजों को यहां से रेफर कर दिया जाता है।
हृदय रोग विशेषज्ञ के लिए कई बार उच्चाधिकारियों को लिखा गया, लेकिन तैनाती नहीं हो सकी। फिर से एक पत्र उच्चाधिकारियों व स्वास्थ्य मंत्री को भेजा गया है।
डॉ. अरविंद कुमार गर्ग, सीएमएस
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जिले में बड़ी संख्या में लोग हृदय रोगों से पीड़ित हैं। ब्लड प्रेशर, डायबिटीज आदि के मरीज घर-घर देखे जा रहे हैं। जिले में हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने के कारण इन मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ओपीडी में केवल ब्लड प्रेशर की माप की जाती है, उन्हें उपचार देने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। 10 साल से जिले को हृदय रोग विशेषज्ञ का इंतजार है। हृदय रोग विशेष की तैनाती न होने के कारण जिले से मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद ही रेफर कर दिया जाता है। इसके बाद या तो मरीज आगरा और सैफई मेडिकल कॉलेज जाता है या फिर निजी डॉक्टर के यहां उपचार कराता है।
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हर रोज जिला अस्पताल पहुंचते हैं तीन सौ मरीज
जिला अस्पताल में प्रतिदिन दो सौ से तीन सौ मरीज हृदय रोग से पीड़ित होकर पहुंचते हैं। अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने के कारण मरीजों को निराश ही लौटना पड़ रहा है। हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने के कारण हार्टअटैक और हृदय संबंधी अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीज जिन्हें तुरंत बेहतर उपचार की जरूरत होती है वे दम तोड़ देते हैं।
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इस साल अब तक 25 मरीजों की हो चुकी है मौत
जिला अस्पताल में दर्ज रिकॉर्ड पर यदि नजर डालें तो पता चलता है कि जनवरी से लेकर अब तक 25 मरीजों ही हृदय रोग से पीड़ित होने पर जिला अस्पताल में मौत हुई है। इनमें से अधिकतर मरीज मृत अवस्था में ही अस्पताल पहुंचे। जबकि आठ सौ से अधिक मरीजों को गंभीर हालत में सैफई के लिए रेफर किया गया है।
80 से 100 मरीजों का प्रतिदिन नापा जाता है ब्लडप्रेशर
जिला अस्पताल में दर्ज रिकार्ड बताता है कि जिले में हृदय के मरीजों की संख्या बहुत अधिक है। औसतन 80 से 100 मरीजों का प्रतिदिन जिला अस्पताल में ब्लडप्रेशर नापा जाता है। हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने के कारण इन मरीजों को यहां से रेफर कर दिया जाता है।
हृदय रोग विशेषज्ञ के लिए कई बार उच्चाधिकारियों को लिखा गया, लेकिन तैनाती नहीं हो सकी। फिर से एक पत्र उच्चाधिकारियों व स्वास्थ्य मंत्री को भेजा गया है।
डॉ. अरविंद कुमार गर्ग, सीएमएस