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प्रदूषण का कहर : एसएन का सांस रोग वार्ड फुल, ऑक्सीजन पर 22 मरीज
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आगरा। बढ़ते प्रदूषण ने सांस-दमा और टीबी मरीजों की मुसीबत खड़ी हो गई। पांच दिन में एसएन मेडिकल कॉलेज के सांस एवं टीबी रोग विभाग का वार्ड फुल हो गया है। इनमें से 22 मरीजों हालत गंभीर होने पर ऑक्सीजन दी जा रही है।
वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डॉ. जीवी सिंह ने बताया कि बीते चार-पांच दिनों से हवा में कार्बन डाईऑक्साइड, लेड और धूल के 2.5 पीएम कणों की मात्रा बढ़ी है। इन पर सूरज की रोशनी पड़ने पर ओजोन बनने लगती है, वातावरण की नमी इसे ऊपरी सतह पर नहीं पहुंचने देती। इससे जमीनी स्तर पर ओजोन का प्रभाव बढ़ गया है। इससे फेफड़ों पर सीधे प्रभाव पड़ रहा है। इसके चलते पांच दिन में वार्ड फुल हो गया है। इनमें से टीबी, सांस और दमा के पुराने मरीजों को सांस उखड़ने और बलगम में खून आने पर ऑक्सीजन दी जा रही है। मंगलवार को ओपीडी में 219 मरीज देखे गए, जिसमें से 141 मरीजों की छाती का एक्सरे कराके जांच की तो इनमें फेफड़ों में संक्रमण मिला।
हर दूसरे बच्चे को गले में खराश
आगरा पीडियाट्रिक्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. अरुण जैन ने बताया कि प्रदूषण का स्तर अधिक है और बच्चे स्कूल भी जा रहे हैं। इस कारण ओपीडी में लगभग हर दूसरे बच्चे को गले में खराश, नाक में खुजली, आंखों में जलन की परेशानी बता रहे हैं। इनमें बुखार के साथ खांसी और जुकाम भी हो गया है। दवा देने के साथ बच्चों को प्रदूषण से बचाने को परामर्श भी दे रहे हैं।
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नाक में खुजली, सिर में दर्द, गले में सूजन
नाक, कान और गला रोग विशेषज्ञ डॉ. आलोक मित्तल ने बताया कि दिवाली बाद से नाक में खुजली, छींक आना, सिर में दर्द, गले में सूजन, खराश के मरीजों की संख्या दोगुना हो गई है। इनमें कामकाजी लोग और बच्चों की संख्या अधिक है। बच्चों के गले में दर्द होने से वह रात भर सो नहीं पा रहे, रोने से चिड़चिड़े भी हो गए हैं।
ये बरतें सावधानियां
- थ्री लेयर मास्क पहनकर ही बाहर जाएं।
- दमा-टीबी के मरीज हैं तो घर में भी मास्क लगाएं।
- गर्म पानी से भाप लें, गुनगुना पानी पीएं।
- खराश होने पर गुनगुने पानी से गरारे करें।
- घरों की खिड़िकियों को बंद करके रखें।
- सुबह-शाम टहलने से बचें, बच्चों को बाहर न खेलने दें।
- बाहर जाते वक्त आंखों पर चश्मा लगाकर जाएं।
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वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डॉ. जीवी सिंह ने बताया कि बीते चार-पांच दिनों से हवा में कार्बन डाईऑक्साइड, लेड और धूल के 2.5 पीएम कणों की मात्रा बढ़ी है। इन पर सूरज की रोशनी पड़ने पर ओजोन बनने लगती है, वातावरण की नमी इसे ऊपरी सतह पर नहीं पहुंचने देती। इससे जमीनी स्तर पर ओजोन का प्रभाव बढ़ गया है। इससे फेफड़ों पर सीधे प्रभाव पड़ रहा है। इसके चलते पांच दिन में वार्ड फुल हो गया है। इनमें से टीबी, सांस और दमा के पुराने मरीजों को सांस उखड़ने और बलगम में खून आने पर ऑक्सीजन दी जा रही है। मंगलवार को ओपीडी में 219 मरीज देखे गए, जिसमें से 141 मरीजों की छाती का एक्सरे कराके जांच की तो इनमें फेफड़ों में संक्रमण मिला।
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हर दूसरे बच्चे को गले में खराश
आगरा पीडियाट्रिक्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. अरुण जैन ने बताया कि प्रदूषण का स्तर अधिक है और बच्चे स्कूल भी जा रहे हैं। इस कारण ओपीडी में लगभग हर दूसरे बच्चे को गले में खराश, नाक में खुजली, आंखों में जलन की परेशानी बता रहे हैं। इनमें बुखार के साथ खांसी और जुकाम भी हो गया है। दवा देने के साथ बच्चों को प्रदूषण से बचाने को परामर्श भी दे रहे हैं।
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नाक में खुजली, सिर में दर्द, गले में सूजन
नाक, कान और गला रोग विशेषज्ञ डॉ. आलोक मित्तल ने बताया कि दिवाली बाद से नाक में खुजली, छींक आना, सिर में दर्द, गले में सूजन, खराश के मरीजों की संख्या दोगुना हो गई है। इनमें कामकाजी लोग और बच्चों की संख्या अधिक है। बच्चों के गले में दर्द होने से वह रात भर सो नहीं पा रहे, रोने से चिड़चिड़े भी हो गए हैं।
ये बरतें सावधानियां
- थ्री लेयर मास्क पहनकर ही बाहर जाएं।
- दमा-टीबी के मरीज हैं तो घर में भी मास्क लगाएं।
- गर्म पानी से भाप लें, गुनगुना पानी पीएं।
- खराश होने पर गुनगुने पानी से गरारे करें।
- घरों की खिड़िकियों को बंद करके रखें।
- सुबह-शाम टहलने से बचें, बच्चों को बाहर न खेलने दें।
- बाहर जाते वक्त आंखों पर चश्मा लगाकर जाएं।