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आनंद इंजीनियरिंग कॉलेज मामला : 'गोलमोल' रिपोर्ट पर एनजीटी ने तलब किए संयुक्त सचिव

Mon, 07 Sep 2020 01:49 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 07 Sep 2020 01:49 PM IST
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NGT summoned Joint Secretary  in Anand Engineering College case agra
एनजीटी

सूर सरोवर पक्षी विहार (कीठम झील) के पास बने हिंदुस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और आनंद इंजीनियरिंग कॉलेज के मामले में ‘गोलमोल’ रिपोर्ट पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने नाराजगी जताई है। एनजीटी ने चार सितंबर को सुनवाई के दौरान पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की ओर से उसके उठाए सवालों पर रिपोर्ट न देने पर संयुक्त सचिव को पेश करने का आदेश दिया। 

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18 सितंबर को सुनवाई में मंत्रालय के संयुक्त सचिव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से या खुद पेश होंगे। एनजीटी ने कीठम पक्षी विहार के पर्यावरण संवेदनशील और वन क्षेत्र में निर्माण पर सवालों के जवाब मांगे थे, लेकिन पर्यावरण मंत्रालय की ओर से वन विभाग ने गोलमोल रिपोर्ट सौंपी। 
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शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए डीके जोशी की याचिका नंबर 41/ 2015 की सुनवाई की गई। इसमें अब उमाशंकर पटवा पैरोकार हैं। एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल, जस्टिस एसपी बांगड़ी और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. नगीन नंदा की बेंच ने मंत्रालय के संयुक्त सचिव को 18 सितंबर की सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए तलब किया। 
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बेंच ने आदेश में कहा कि 13 दिसंबर, 2019 को हुई सुनवाई में उन्होंने पर्यावरण मंत्रालय से अभ्यारण्य के अंदर हिंदुस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और आनंद इंजीनियरिंग कॉलेज के बने होने के मामले पर रिपोर्ट मांगी थी। 

दो माह की जगह नौ माह में सौंपी रिपोर्ट 

रिपोर्ट में पक्षी अभ्यारण्य का पूरा क्षेत्र 403.09 हेक्टेयर नीली लाइन से दिखाया गया है। प्रस्तावित पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र 1020.25 हेक्टेयर रेखांकित किया है। यहां क्या नियम है, इस पर 9 अप्रैल 2019 की सुनवाई में दो महीने में रिपोर्ट मांगी गई थी लेकिन बीते साल 3 सितंबर और 21 अक्तूबर को हुई सुनवाई में भी कोई रिपोर्ट पेश नहीं की गई। एनजीटी की नाराजगी के बाद ज्वाइंट सेक्रेट्री को पेश होने को कहा गया।

बेंच ने कहा कि ट्रिब्यूनल के आदेश को न मानने पर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाए। इसके बाद गिरफ्तारी वारंट, वेतन रोकने की कार्रवाई भी की जा सकती है। इस चेतावनी के बाद 28 जनवरी, 2020 को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने एक रिपोर्ट दी लेकिन इस रिपोर्ट से एनजीटी संतुष्ट नहीं थी। संयुक्त सचिव के पेश न होने पर बेंच ने नाराजगी जताई।   

18 को ही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 

सूर सरोवर पक्षी विहार के पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र को तय करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता ने बताया कि 18 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सूर सरोवर पक्षी विहार मामले की भी सुनवाई होनी है। वन विभाग ने पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र को तय करने में गड़बड़ी की है। विभाग ने कीठम झील से यह क्षेत्र तय किया है जबकि पक्षी विहार क्षेत्र के बाहर का क्षेत्र पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र में तय किया जाना चाहिए था।

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