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UP: आगरा- ग्वालियर हाईवे पर बहता सीवेज...एडीए को फटकार, उपाध्यक्ष की होगी वर्चुअल पेशी
Thu, 28 Aug 2025 09:52 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 28 Aug 2025 09:52 AM IST
सार
आगरा-ग्वालियर हाईवे पर अवैध कॉलोनियों के सीवेज और जलभराव को लेकर एनजीटी ने एडीए की कार्यशैली पर कड़ी नाराज़गी जताई है। अदालत ने 10 नवंबर को एडीए उपाध्यक्ष को वर्चुअल पेश होने के आदेश दिए हैं।
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आगरा-ग्वालियर हाईवे पर जलभराव और फैली गंदगी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
आगरा- ग्वालियर हाईवे पर बह रहे अवैध कॉलोनियों के सीवर और जलभराव मामले में बुधवार को सुनवाई में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अख्तियार किया है। लापरवाही के लिए आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) को फटकार लगाई। 10 नवंबर को उपाध्यक्ष की वर्चुअल पेशी के आदेश दिए हैं। साथ ही, तत्काल गंदे पानी की निकासी और नाला सफाई कराने के साथ जिलाधिकारी से भी हलफनामा मांगा है।
ग्वालियर हाईवे पर पीएस गार्डन से गौरी कुंज तक करीब 2 किमी क्षेत्र में नारकीय हालात हैं। सीवेज और जलभराव से हाईवे पर गहरे गड्ढे हो गए। जिनमें गिरने से रोज दुर्घटनाएं हो रही हैं। वाहन पलट रहे हैं। क्षेत्रीय लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। मंडलायुक्त, डीएम, एडीए व जनप्रतिनिधियों से बार-बार शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होने पर क्षेत्रीय निवासी रविंद्र सिंह ने एनजीटी में याचिका दाखिल की। बुधवार को एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने मामले की सुनवाई की। एक तरफ एडीए की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़ा करते हुए फटकार लगाई। दूसरी तरफ डीएम से हलफनामा मांगा है। इस नवंबर को उपाध्यक्ष को वर्चुअल रूप से पेश होकर कार्यों का हिसाब देने के लिए कहा है।
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ग्वालियर हाईवे पर पीएस गार्डन से गौरी कुंज तक करीब 2 किमी क्षेत्र में नारकीय हालात हैं। सीवेज और जलभराव से हाईवे पर गहरे गड्ढे हो गए। जिनमें गिरने से रोज दुर्घटनाएं हो रही हैं। वाहन पलट रहे हैं। क्षेत्रीय लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। मंडलायुक्त, डीएम, एडीए व जनप्रतिनिधियों से बार-बार शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होने पर क्षेत्रीय निवासी रविंद्र सिंह ने एनजीटी में याचिका दाखिल की। बुधवार को एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने मामले की सुनवाई की। एक तरफ एडीए की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़ा करते हुए फटकार लगाई। दूसरी तरफ डीएम से हलफनामा मांगा है। इस नवंबर को उपाध्यक्ष को वर्चुअल रूप से पेश होकर कार्यों का हिसाब देने के लिए कहा है।
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अदालत में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने बताया कि उन्होंने यहां 300 मीटर पक्की सड़क और दो पुलिया बनाए हैं। सड़क का यह हिस्सा 8 मई 2025 में लोक निर्माण विभाग को सौंपा जा चुका है। इसकी मरम्मत और देखरेख के लिए करीब 4.99 करोड़ रुपये भी मंजूर किए हैं। आधी राशि करीब 2.50 करोड़ जारी भी हो चुके हैं। ऐसे में अदालत ने कहा कि संयुक्त समिति को अब एक समयबद्ध कार्ययोजना प्रस्तुत करनी होगी। सुनवाई के दौरान याची के वकील ने कहा कि अभी तक कोई सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई है।
जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं दिखाई : एनजीटी
जिलाधिकारी अरविंद एम बंगारी ने 19 अगस्त 2025 को इस संबंध में एनजीटी अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की, लेकिन इस रिपोर्ट में समस्या के समाधान के लिए एनजीटी को जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं दिखाई दी। रिपोर्ट में केवल अधिकारियों की तरफ से आयोजित कुछ बैठकों का ही जिक्र था। अदालत ने कहा कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने भी 20 अगस्त को एक रिपोर्ट दाखिल की है, लेकिन उस रिपोर्ट में भी यह नहीं बताया गया है कि उन्होंने क्या कार्रवाई की। एनजीटी ने कहा कि जहां तक एडीए का सवाल है, उसे बहुत पहले ही नोटिस दिया जा चुका है, लेकिन एडीए की ओर से अभी तक कोई रिपोर्ट अदालत को नहीं मिली है। इसके अलावा, एडीए के वकील ने बताया है कि रिपोर्ट सुनवाई वाले दिन सुबह दाखिल की गई है, लेकिन दो साल से ज्यादा समय बीत चुका है और कोई काम नहीं दिख रहा। अदालत ने डीएम के वकील ने कहा है कि जमीनी स्तर पर कार्रवाई करना एडीए की जिम्मेदारी है।
जिलाधिकारी अरविंद एम बंगारी ने 19 अगस्त 2025 को इस संबंध में एनजीटी अनुपालन रिपोर्ट दाखिल की, लेकिन इस रिपोर्ट में समस्या के समाधान के लिए एनजीटी को जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं दिखाई दी। रिपोर्ट में केवल अधिकारियों की तरफ से आयोजित कुछ बैठकों का ही जिक्र था। अदालत ने कहा कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने भी 20 अगस्त को एक रिपोर्ट दाखिल की है, लेकिन उस रिपोर्ट में भी यह नहीं बताया गया है कि उन्होंने क्या कार्रवाई की। एनजीटी ने कहा कि जहां तक एडीए का सवाल है, उसे बहुत पहले ही नोटिस दिया जा चुका है, लेकिन एडीए की ओर से अभी तक कोई रिपोर्ट अदालत को नहीं मिली है। इसके अलावा, एडीए के वकील ने बताया है कि रिपोर्ट सुनवाई वाले दिन सुबह दाखिल की गई है, लेकिन दो साल से ज्यादा समय बीत चुका है और कोई काम नहीं दिख रहा। अदालत ने डीएम के वकील ने कहा है कि जमीनी स्तर पर कार्रवाई करना एडीए की जिम्मेदारी है।
यह है मामला:
आवेदक रविद्र सिंह ने एक याचिका दायर की थी। इसमें दावा किया था कि ग्वालियर हाईवे स्थित गौरी कुंज और सर्विस लेन पर नालियों की सफाई नहीं हो रही है। इसके चलते इलाके में पानी भर जाता है। जलजनित बीमारियां फैल रही हैं। याचिका ने यह भी कहा गया है कि यहां पर जल निकासी की व्यवस्था (ड्रेनेज सिस्टम) ही नहीं है। आवेदक की शिकायत पर विचार करते हुए अदालत ने 22 मई, 2023 के आदेश में एडीए, यूपीपीसीबी और जिलाधिकारी की एक संयुक्त समिति का गठन किया था, जिसे इस मुद्दे पर विचार करने और सुधारात्मक कार्रवाई करनी थी।
आवेदक रविद्र सिंह ने एक याचिका दायर की थी। इसमें दावा किया था कि ग्वालियर हाईवे स्थित गौरी कुंज और सर्विस लेन पर नालियों की सफाई नहीं हो रही है। इसके चलते इलाके में पानी भर जाता है। जलजनित बीमारियां फैल रही हैं। याचिका ने यह भी कहा गया है कि यहां पर जल निकासी की व्यवस्था (ड्रेनेज सिस्टम) ही नहीं है। आवेदक की शिकायत पर विचार करते हुए अदालत ने 22 मई, 2023 के आदेश में एडीए, यूपीपीसीबी और जिलाधिकारी की एक संयुक्त समिति का गठन किया था, जिसे इस मुद्दे पर विचार करने और सुधारात्मक कार्रवाई करनी थी।
108 करोड़ से बनेगा नाला
जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने बताया कि जलभराव की निकासी के लिए 108 करोड़ रुपये से नाला निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा है। नाला बनने से ही स्थायी समाधान होगा। एडीए को अवैध कॉलोनियों के विरुद्ध कार्रवाई करनी है।
जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने बताया कि जलभराव की निकासी के लिए 108 करोड़ रुपये से नाला निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा है। नाला बनने से ही स्थायी समाधान होगा। एडीए को अवैध कॉलोनियों के विरुद्ध कार्रवाई करनी है।
पंचायत ने पास किए नक्शे
आगरा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष अरुन्मोली ने कहा कि एडीए से पूर्व यहां जिला पंचायत ने नक्शे पास किए हैं। इसमें जिला पंचायत को पार्टी बनाना चाहिए था। अवैध निर्माण ध्वस्त कराएं हैं। अदालत के आदेश का पालन किया जाएगा।
आगरा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष अरुन्मोली ने कहा कि एडीए से पूर्व यहां जिला पंचायत ने नक्शे पास किए हैं। इसमें जिला पंचायत को पार्टी बनाना चाहिए था। अवैध निर्माण ध्वस्त कराएं हैं। अदालत के आदेश का पालन किया जाएगा।