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एनजीटी का राज्य व केंद्र को नोटिस

ब्यूरो, अमर उजाला Updated Sat, 04 Jul 2015 01:46 AM IST
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ताजमहल के आसपास पेड़ों पर आरी चलवाने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) से लेकर मुख्यमंत्री तक ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। इस मामले में ट्रिब्यूनल द्वारा केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करने के कुछ घंटे बाद ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मामले की जांच को तीन सदस्यीय कमेटी गठित करने का निर्णय ले लिया। मंडलायुक्त इस जांच कमेटी के अध्यक्ष होंगे।
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बता दें, गुरुवार को मुख्य वन संरक्षक आगरा जोन एके जैन की जांच रिपोर्ट ने हरियाली घोटाले से पर्दा उठाया था। भ्रष्टाचार का यह मामला मीडिया में सुर्खियां बन गया। इसके बाद शुक्रवार को एनजीटी ने ताजमहल के आसपास पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में पेड़ों की कथित तौर पर अवैध कटाई के मामले में केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने एक अखबार की रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय तथा उत्तर प्रदेश सरकार को इस संबंध में नोटिस जारी किया है। दोनों को दो सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा गया है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, जिले के पूर्व वन अधिकारी (डीएफओ) एनके जानू ने ताजमहल के आसपास पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र में हजारों पेड़ों को अवैध तरीके से कटवाया और उन्हें बिना किसी इजाजत के बेच दिया। हरित पंचाट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस मामले की जांच कराए। राज्य सरकार से उन उपायों की जानकारी भी मांगी गई है, जो इस क्षेत्र में पर्यावरण की बहाली के लिए उठाए गए हैं। बेंच ने पूछा, ‘यह पर्यावरण को गंभीर नुकसान है। राज्य सरकार क्या कर रही है।’
रिपोर्ट के मुताबिक, आगरा के पूर्व डीएफओ ने ताजमहल के 500 मीटर के दायरे में आने वाले बाबूपुर से 8,000 तथा आसपास के इलाकों से 4,000 पेड़ कटवाए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, यह क्षेत्र पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील है। नियम के अनुसार, इस क्षेत्र में शीर्ष अदालत की इजाजत लिए बिना पेड़ नहीं कटवाए जा सकते। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ज्यादातर पेड़ वर्ष 2011-12 के दौरान कटवाए गए। इससे पहले शीर्ष अदालत ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए उसके चारों ओर पौधा रोपण को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किए गए गलत दावे को लेकर उसकी खिंचाई कर चुकी है।
इधर, एनजीटी के नोटिस के घंटे बाद ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पेड़ों के अवैध कटान की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच के लिए तीन सदस्यों की समिति गठित करने का निर्णय ले लिया। आगरा मंडल के आयुक्त समिति के अध्यक्ष होंगे। यह जानकारी देते हुए सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि अपर प्रमुख वन संरक्षक  अजय कुमार द्विवेदी तथा मुख्य वन संरक्षक मनोज सिन्हा समिति के सदस्य होंगे। समिति को 15 दिन के अंदर जांच करके रिपोर्ट देने को कहा गया है।

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