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Agra News: यमुना में नाले गिरने पर एनजीटी सख्त, निगम से चार सप्ताह में मांगी रिपोर्ट
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यमुना नदी मे नालों के टैप न होने से सीधे गिर रहा सीवर और प्लास्टिक कचरा, जिसे एनजीटी मे पेश किय
आगरा। यमुना में गिर रहे गंदे नालों और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के शुरू न होेने के कारण पहुंच रहे सीवर के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने नगर निगम से चार सप्ताह में प्रगति रिपोर्ट मांगी है। प्रदेश सरकार के नगर विकास विभाग ने याचिकाकर्ता और शल्य चिकित्सक डाॅ. संजय कुलश्रेष्ठ की याचिका पर चार सप्ताह का समय मांगा है। अगली सुनवाई 18 जनवरी को होगी।
एनजीटी में चेयरमैन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की बेंच ने डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ की ओर से दर्ज की गई आपत्तियों को सुना। याचिकाकर्ता ने कहा कि एनजीटी ने 24 अप्रैल 2024 को आगरा नगर निगम पर 58.39 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। तब से अब तक 780 दिनों में यमुना नदी में गिरने से कोई नाला नहीं रुका।
ऐसे में 158.14 करोड़ रुपये का जुर्माना और लगाया जाए तथा इस पर ब्याज वसूला जाए। उन्होंने यमुना नदी में प्रदूषण फैलाने के लिए जल अधिनियम, 1974 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के उल्लंघन के तहत जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई और व्यक्तिगत जुर्माना लगाने का अनुरोध किया है, ताकि करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग न हो। उन्होंने यमुना की मौजूदा दुर्दशा के साक्ष्य पेश किए।
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यमुना में गिर रहा 131 एमएलडी सीवर
याचिका में बताया गया कि आगरा में हर दिन 306 एमएलडी अपशिष्ट जल में से लगभग 131 एमएलडी (43%) बिना उपचार के सीधे यमुना नदी में बहाया जा रहा है। शहर के कुल 91 नालों में से 21 पूरी तरह और आठ आंशिक रूप से मोड़े गए हैं। 61 नाले पूरी तरह खुले हैं।
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100 एमएलडी का नया प्लांट बनाएंगे
आगरा नगर निगम ने बेंच के सामने हलफनामे में कहा कि पर्यावरण क्षतिपूर्ति की 58.39 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग धांधूपुरा में 100 एमएलडी क्षमता के नए सीवेज शोधन संयंत्र के निर्माण और पुनरुद्धार योजना में किया जाएगा। 10 करोड़ रुपये भी जमा किए जाएंगे। डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने बेंच से कहा कि केवल जुर्माना लगाकर केस खत्म न किया जाए, बल्कि जब तक यमुना साफ नहीं हो जाती, तब तक एनजीटी निगरानी बनाए रखे और प्रगति रिपोर्ट लेता रहे। एनजीटी ने अगली सुनवाई से पहले चार सप्ताह में रिपोर्ट तलब की है।
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एनजीटी में चेयरमैन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की बेंच ने डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ की ओर से दर्ज की गई आपत्तियों को सुना। याचिकाकर्ता ने कहा कि एनजीटी ने 24 अप्रैल 2024 को आगरा नगर निगम पर 58.39 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। तब से अब तक 780 दिनों में यमुना नदी में गिरने से कोई नाला नहीं रुका।
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ऐसे में 158.14 करोड़ रुपये का जुर्माना और लगाया जाए तथा इस पर ब्याज वसूला जाए। उन्होंने यमुना नदी में प्रदूषण फैलाने के लिए जल अधिनियम, 1974 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के उल्लंघन के तहत जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई और व्यक्तिगत जुर्माना लगाने का अनुरोध किया है, ताकि करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग न हो। उन्होंने यमुना की मौजूदा दुर्दशा के साक्ष्य पेश किए।
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यमुना में गिर रहा 131 एमएलडी सीवर
याचिका में बताया गया कि आगरा में हर दिन 306 एमएलडी अपशिष्ट जल में से लगभग 131 एमएलडी (43%) बिना उपचार के सीधे यमुना नदी में बहाया जा रहा है। शहर के कुल 91 नालों में से 21 पूरी तरह और आठ आंशिक रूप से मोड़े गए हैं। 61 नाले पूरी तरह खुले हैं।
100 एमएलडी का नया प्लांट बनाएंगे
आगरा नगर निगम ने बेंच के सामने हलफनामे में कहा कि पर्यावरण क्षतिपूर्ति की 58.39 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग धांधूपुरा में 100 एमएलडी क्षमता के नए सीवेज शोधन संयंत्र के निर्माण और पुनरुद्धार योजना में किया जाएगा। 10 करोड़ रुपये भी जमा किए जाएंगे। डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने बेंच से कहा कि केवल जुर्माना लगाकर केस खत्म न किया जाए, बल्कि जब तक यमुना साफ नहीं हो जाती, तब तक एनजीटी निगरानी बनाए रखे और प्रगति रिपोर्ट लेता रहे। एनजीटी ने अगली सुनवाई से पहले चार सप्ताह में रिपोर्ट तलब की है।

यमुना नदी मे नालों के टैप न होने से सीधे गिर रहा सीवर और प्लास्टिक कचरा, जिसे एनजीटी मे पेश किय