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बंदरों के उत्पात से मुक्ति दिलाने की मुहिम
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Fri, 01 May 2015 01:59 AM IST
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शहर को बंदरों के उत्पात से मुक्ति दिलाने की कवायद में प्रशासन एक बार फिर जुट गया है। गुरुवार को मंडलायुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय किया कि बंदरों को पकड़ने से पहले शहर की जनता के साथ सीधा संवाद स्थापित किया जाए, ताकि जिस समय बंदरों को पकड़ने की कार्यवाही हो तो कोई विरोध न करे।
शहर को बंदरों से मुक्ति दिलाने के प्रयास पिछले चार वर्ष से चल रहे हैं लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही है। जबकि बंदर घुड़की शहर में कई लोगों की जान ले चुकी है। भागते समय छतों से गिरकर कई लोग दम तोड़ चुके हैं। इतना ही नहीं बंदर बच्चों और बड़ों को शिकार बना रहे हैं। यही वजह है कि जिला अस्पताल में मंकी बाइट के इंजेक्शन लगवाने वालों की कतार लगी रहती है। इनसे बचने के लिए पुराने शहर में लोगों ने घरों की छत को कवर कर लिया है।
आगरा विकास प्राधिकरण के सचिव प्रभांशु श्रीवास्तव ने बताया कि शहर को बंदरों से मुक्त करने के लिए योजना पर काम चल रहा है। बंदरों को पकड़कर कहीं और भेजा सकता है या फिर इनका इस्टरलाइजेशन (बधियाकरण) करके वहीं छोड़ा जा सकता हैं, जहां से पकड़े थे। इससे इनकी आबादी कम रहेगी। इस कार्य के लिए कीथम में रेस्क्यू सेंटर प्रस्तावित है। बैठक में एडीए, नगर निगम, प्रशासन, वन विभाग, पीएफए सहित कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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पिछले चार वर्ष से चल रही कोशिश
पूर्व नगर आयुक्त विनय शंकर पांडे के कार्यकाल में नगर निगम के पशु चिकित्साधिकारी डा. बीएस वर्मा ने बंदरों को पकड़ कर चित्रकूट के जंगलों में भेजने की योजना पर काम किया था। पहले तो चित्रकूट प्रशासन ने अनुमित दे दी लेकिन बाद में इनकार कर दिया गया। इसके बाद पूर्व नगर आयुक्त डीके सिंह के कार्यकाल में भी प्रयास हुए लेकिन सफलता नहीं मिल सकी।
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शहर को बंदरों से मुक्ति दिलाने के प्रयास पिछले चार वर्ष से चल रहे हैं लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही है। जबकि बंदर घुड़की शहर में कई लोगों की जान ले चुकी है। भागते समय छतों से गिरकर कई लोग दम तोड़ चुके हैं। इतना ही नहीं बंदर बच्चों और बड़ों को शिकार बना रहे हैं। यही वजह है कि जिला अस्पताल में मंकी बाइट के इंजेक्शन लगवाने वालों की कतार लगी रहती है। इनसे बचने के लिए पुराने शहर में लोगों ने घरों की छत को कवर कर लिया है।
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आगरा विकास प्राधिकरण के सचिव प्रभांशु श्रीवास्तव ने बताया कि शहर को बंदरों से मुक्त करने के लिए योजना पर काम चल रहा है। बंदरों को पकड़कर कहीं और भेजा सकता है या फिर इनका इस्टरलाइजेशन (बधियाकरण) करके वहीं छोड़ा जा सकता हैं, जहां से पकड़े थे। इससे इनकी आबादी कम रहेगी। इस कार्य के लिए कीथम में रेस्क्यू सेंटर प्रस्तावित है। बैठक में एडीए, नगर निगम, प्रशासन, वन विभाग, पीएफए सहित कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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पिछले चार वर्ष से चल रही कोशिश
पूर्व नगर आयुक्त विनय शंकर पांडे के कार्यकाल में नगर निगम के पशु चिकित्साधिकारी डा. बीएस वर्मा ने बंदरों को पकड़ कर चित्रकूट के जंगलों में भेजने की योजना पर काम किया था। पहले तो चित्रकूट प्रशासन ने अनुमित दे दी लेकिन बाद में इनकार कर दिया गया। इसके बाद पूर्व नगर आयुक्त डीके सिंह के कार्यकाल में भी प्रयास हुए लेकिन सफलता नहीं मिल सकी।